झारखंड: रिश्वतखोरी के मामले में कार्यपालक अभियंता की 6 साल कैद की सजा बरकरार
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झारखंड: रिश्वतखोरी के मामले में कार्यपालक अभियंता की 6 साल कैद की सजा बरकरार
शिकायत के बाद एसीबी ने 28 मार्च 2014 को सोनेलाल को अस्सी हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया था.

अदालत (Court) ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में प्रार्थी के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं और अभियोजन इसे साबित करने में कामयाब रहा.

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  • Last Updated: September 9, 2020, 12:22 PM IST
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रांची. झारखंड उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) ने रिश्वत लेने के मामले में चाईबासा (Chaibasa) में भवन निर्माण के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता सोनेलाल दास (Sone Lal Das) की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत द्वारा उन्हें सुनायी गई छह साल कारावास और एक लाख जुर्माने की सजा मंगलवार को बरकरार रखी. न्यायमूर्ति एके चौधरी ने रिश्वतखोरी के मामले में सजायाफ्ता सोनेलाल दास की अपील खारिज कर दी और निचली अदालत से उन्हें मिली सजा को बरकरार रखा.

जब्त ठेकेदार के पैसों को उसे वापस देने का भी आदेश दिया
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस मामले में प्रार्थी के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं और अभियोजन इसे साबित करने में कामयाब रहा. इसलिए निचली अदालत का आदेश सही है. इसके अलावा अदालत ने इस मामले में जब्त ठेकेदार के पैसों को उसे वापस देने का भी आदेश दिया.

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सोनेलाल दास ने ठेकेदार से डेढ़ लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी


सुनवाई के दौरान भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (एसीबी) के अधिवक्ता टीएन वर्मा ने पीठ को बताया कि सोनेलाल दास चाईबासा के भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता के पद पर कार्यरत थे. ठेकेदार जितेंद्र चौबे को चाईबासा जिला स्कूल की मरम्मत काम मिला था. कार्य पूरा होने के बाद बकाया आठ लाख रुपये निर्गत करने के एवज में सोनेलाल दास ने ठेकेदार से डेढ़ लाख रुपये रिश्वत की मांग की. बाद में बात अस्सी हजार रुपये पर तय हुई. शिकायत के बाद एसीबी ने 28 मार्च 2014 को सोनेलाल को अस्सी हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया था. इनके आवास से छापेमारी के दौरान तीन लाख रुपये नकद भी बरामद हुए थे.
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