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झारखंड: कैसे होगा नक्सलियों का खात्मा? सरकार की नीति के चलते जगुआर से अलग हो रहे पुलिस जवान

झारखंड जगुआर में फिलहाल आईजी और डीआईजी के भी पद खाली है. (फाइल फोटो)

झारखंड जगुआर में फिलहाल आईजी और डीआईजी के भी पद खाली है. (फाइल फोटो)

4022 स्ट्रेंथ वाले झारखंड जगुआर (Jharkhand Jaguar) से 15 सौ जवान डोर हो चुके हैं. अब महद 15 सौ जवान ही इस स्पेशल टास्क फोर्स का हिस्सा हैं. ऐसे में राज्य में एंटी नक्सल ऑपरेशन (Anti Naxal Operation) बुरी तरह प्रभावित होगा.

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रांची. झारखंड का एक मात्र फोर्स, जो अपने दम पर नक्सलियों (Naxal) से लोहा लेने का माद्दा रखता है, आज सरकार (Hemant Government) की उपेक्षा का शिकार है. जवानों का मनोबल नक्सली हमले में शहीद होने से नहीं, बल्कि सरकार की नीतियों से गिर रहा है. हाल ये है कि 4022 की स्ट्रेंथ वाली झारखंड जगुआर (Jharkhand Jaguar) में अब महज 25 सौ ही जवान रह गए हैं. आईजी और डीआईजी के पद खाली होने से भी स्पेशल टास्क फोर्स का नेतृत्वकर्ता भी कोई नहीं है. इस कारण जवान खुद को अनाथ समझ रहे हैं.

झारखंड के जिस फोर्स के नाम से नक्सली खौफ खाते थे, आज उसी फोर्स से जवान अपने आप को दूर कर रहे हैं. वजह भत्ते के रूप में जो राशि जवानों को मिलती थी, वो भत्ता वर्ष 2019 से ही बंद कर दिया गया है. आज हालात ऐसी हो गई है जवान अब STF से कन्नी काट रहे हैं. 4 हज़ार 22 स्ट्रेंथ वाले जगुआर से 15 सौ जवान डोर हो चुके हैं. अब मजह 15 सौ जवान ही STF का हिस्सा हैं.

जगुआर के उपाध्यक्ष रामाकांत उपाध्याय का कहना है कि जगुआर (STF) को नक्सलियों के खात्मे के लिए बनाया गया था और STF ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई. इस फोर्स में चुन-चुन कर जवानों को लाया गया और जवानों ने भी इसमें अपनी जान की परवाह किए बगैर आते थे. क्योंकि यहां उन्हें अपने वेतन का 50% बतौर प्रोत्साहन भत्ते के रूप में मिलता था, जो अब नहीं मिल रहा. सरकार से गुजारिश है कि उन्हें उनका हक मिले. वहीं आईजी और डीआईजी के पद को भी जल्द भरा जाना चाहिए.



जगुवार के जवान लगातार जंगलों में एंटी नक्सल ऑपरेशन चलाते हैं. इन्हें जंगलों में ही लंबे समय तक रहना होता है और जंगलों में ये वर्दी में ही रहते हैं. इसके कारण वर्दी और जूते का खर्च भी जिला बल से ज्यादा होता है. लेकिन उसके एवज में भी इन्हें अतिरिक्त भत्ता नहीं दिया जा रहा.
झारखंड पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेंद्र सिंह का कहना है कि जगुवार के लिए प्रोत्साहन भत्ते को फिर शुरू किया जाना चाहिए. इसको लेकर एसोसिएशन भी गंभीर है. उन्होंने बताया कि पड़ोसी राज्य की तर्ज पर ही झारखंड में इस तरह के भत्ते दिए जाने को लेकर एसोसिएशन ने अपनी बातों को रखा है.

झारखंड में वर्तमान हालात में जब एक बार फिर नक्सल अपना फन उठा रहे हैं. ऐसे हालात में नक्सलियों के सिर को कुचलने के लिए झारखंड जगुआर के मनोबल को बढ़ाने की जरूरत है. नहीं तो नक्सलियों के मनोबल को तोड़ना सरकार के लिए आसान नहीं होगा.
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