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मलेशिया में फंसे झारखंड के मजदूरों का दूसरा जत्था पहुंचा चेन्नई, तीसरे जत्थे की वापसी होगी कल

Malaysia Labors: 26 मई गुरुवार की सुबह मलेशिया से 5 मजदूर चेन्नई पहुंचे.

Malaysia Labors: 26 मई गुरुवार की सुबह मलेशिया से 5 मजदूर चेन्नई पहुंचे.

Jharkhand News: मलेशिया से 27 मई की सुबह पांच मजदूरों का तीसरा जत्था चेन्नई पहुंचेगा. इससे पहले 28 अप्रैल गुरुवार को 10 मजदूरों के पहले जत्थे की मलेशिया से वतन वापसी हुई थी. यह सभी मजदूर झारखंड के बोकारो, धनबाद और गिरिडीह जिले के रहने वाले हैं.

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रांची. मलेशिया में फंसे झारखंड के 30 मजदूरों के दूसरे जत्थे की अब वतन वापसी शुरू हो गई है. 26 मई गुरुवार की सुबह मलेशिया से 5 मजदूर चेन्नई पहुंचे. यह मजदूर चेन्नई से ट्रेन से रवाना होकर झारखंड स्थित अपने अपने घर पहुंचेंगे. ‌वहीं मलेशिया से 27 मई की सुबह पांच मजदूरों का तीसरा जत्था चेन्नई पहुंचेगा. इससे पहले 28 अप्रैल गुरुवार को 10 मजदूरों के पहले जत्थे की मलेशिया से वतन वापसी हुई थी.

यह सभी मजदूर झारखंड के बोकारो, धनबाद और गिरिडीह जिले के रहने वाले हैं. ये लोग मलेशिया के एक पावर प्रोजेक्ट कंपनी में काम करने पहुंचे थे. लेकिन, अनुबंध खत्म हो जाने के बाद भी मजदूरों को घर लौटने नहीं दिया जा रहा था. साथ ही उनका वेतन भुगतान भी रोक दिया गया था. लेकिन, अब भारतीय एंबेसी के दबाव की वजह से मजदूरों की वतन वापसी संभव हो पा रही है.

28 अप्रैल को आया था पहला जत्था 

बता दें कि मलेशिया में जिस पावर प्रोजेक्ट में झारखंड के मजदूर काम कर रहे थे, वहां उनके वेतन का भुगतान रोक दिया गया था, जिसके बाद मजदूरों ने गुरुद्वारे में शरण ली थी और भारतीय दूतावास को इसकी जानकारी दी थी. भारतीय एंबेसी के दबाव के कारण कंपनी ने 28 अप्रैल को पहले 10 लोगों को भारत लौटने का टिकट दिया था. उसके बाद ही जल्द बचे 20 लोगों को भी वतन वापसी का भरोसा दिया गया था. उसी के तहत अब दूसरे और तीसरे चरण में मजदूरों की वापसी संभव हो पा रही है.

अभी भी मलेशिया में फंसे हैं 10 मजदूर

कुल 30 मजदूरों में 20 के स्वदेश वापसी के बाद अभी भी वहां 10 मजदूर फंसे हैं, जिनके लौटने की भी संभावना जल्द जताई जा रही है. मलेशिया में फंसे मजदूर बेहद गरीब तबके के हैं. यह सभी इस उम्मीद में विदेश पहुंचे थे कि वहां काम करने के बाद उनकी जिंदगी बदल जाएगी. लेकिन, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। ‌ मजदूरों ने बताया कि वेतन भुगतान बंद हो जाने के बाद लंबे समय तक उन्हें कुआलालंपुर के एक गुरुद्वारे में शरण लेनी पड़ी, जहां किसी तरह उनका भोजन चलता रहा.

आधी सैलरी पर कराया गया काम 

मलेशिया से मजदूरों ने न्यूज़ 18 को फोन कर बताया कि जितनी सैलरी का भरोसा देकर उन्हें वहां बुलाया गया था. उससे आधी सैलरी वहां दी गई. विरोध करने पर बाद में उसका भी भुगतान बंद कर दिया गया. इससे पहले घर लौटे मजदूरों ने राज्य सरकार से अपने घर में ही रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की थी.

Tags: Indian Embassy, Jharkhand News Live, Malaysia

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