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रेलवे की पहल से झारखंड के लोकल प्रोडक्ट्स को मिला नया बाजार, यात्रियों को खूब आ रहे पसंद

रांची स्टेशन पर इनदिनों झारखंड के लोकल प्रोडक्ट्स के स्टॉल लगाये गये हैं.

रांची स्टेशन पर इनदिनों झारखंड के लोकल प्रोडक्ट्स के स्टॉल लगाये गये हैं.

रेल मंत्रालय ने बड़ी पहल करते हुए वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट के तहत "वन स्टेशन वन प्रोडक्ट" में देशभर में लोकल प्रोडक्ट को बढ़ावा देने का फैसला लिया है. इसके तहत रांची स्टेशन के प्रवेश और एक्जिट द्वार पर एक काउंटर लगाया गया है. जहां झारखंड के लघु उद्योग, हस्तशिल्प और हैंडलूम के बने सामानों को बेचा जा रहा है. इसके तहत हर स्वयंसेवी संस्था को 15 दिन तक अपना प्रोडक्ट रेल यात्रियों को बेचने का बड़ा मौका मिल रहा है.

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रांची. झारखंड को संसाधनों और संभावनाओं का भंडार कहा जाता है. इसको लेकर अक्सर लोकल प्रोडक्ट को बाजार उपलब्ध कराने का दावा किया जाता है. हालांकि इन सबके बीच रेल मंत्रालय की एक पहल ने लोकल प्रोडक्ट को एक ऐसा बाजार उपलब्ध करा दिया है. जिससे राजधानी रांची के स्वयंसेवी संस्थाओं के चेहरे पर मुस्कान आ गयी है.

दुनिया कहती है कि झारखंड की मिट्टी किसी सोने से कम नहीं. प्रकृति ने इतना कुछ दिया है कि उससे बनने वाले प्रोडक्ट को ही अगर बाजार मिल जाए तो झारखंड का नाम पिछड़े राज्य की सूची से हट जाने में देर नहीं लगेगी. रेल मंत्रालय ने एक बड़ी पहल करते हुए ताजा वित्तीय वर्ष 2022-23 के बजट के तहत “वन स्टेशन वन प्रोडक्ट” में देशभर में लोकल प्रोडक्ट को बढ़ावा देने का फैसला लिया है. इसके तहत रांची रेलमंडल की ओर से भी रांची रेलवे स्टेशन के प्रवेश और एक्जिट द्वार पर एक काउंटर लगाया गया है. जहां झारखंड के लघु उद्योग, हस्तशिल्प और हैंडलूम के बने सामानों को बेचा जा रहा है. इस योजना के तहत हर स्वयंसेवी संस्था को 15 दिन तक अपना बनाया प्रोडक्ट रेल यात्रियों के सामने बेचने का एक बड़ा मौका है.

काउंटर पर 25 से ज्यादा लोकल प्रोडक्ट बेचे जा रहे हैं, जो राज्य के ही संसाधनों और हुनर से बनाये गये हैं. इसमें मुख्य रूप से कपड़े, हैंडबैग, जूट के बने थैले और दूसरे सामान यात्रियों को विशेष पसंद आ रहे हैं. इसमें खासकर ट्राइबल तौलिये की जमकर खरीदारी की जा रही है. इसके अलावा ऑर्गेनिक प्रोडक्ट जिसमें सिरका, जामुन का रस, आंवला सुपारी और हनी भी यात्रियों की मुख्य पसंद में शामिल हैं.

रांची रेलवे स्टेशन पर काउंटर लगाने वाली रानी परवीन बताती हैं कि रेलवे स्टेशन पर भीड़ काफी होती है. लिहाजा यहां बिक्री काफी ज्यादा होती है. रानी उत्साह के साथ बताती हैं कि स्टेशन से गुजरने वाले ग्राहकों को जूट के बैंग और महिलाओं को खासकर पर्स काफी पसंद आ रहे हैं.

वहीं पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता चंद्रशेखर आजाद बताते हैं कि झारखंड का लोकल प्रोडक्ट शानदार है. यह खूबसूरत होने के साथ मजबूत और किफायती भी है. वे बताते हैं कि लोकल फोर वोकल को ऐसी ही पहल से मजबूती मिलती है.

वहीं कोलकाता से पहुंचे तन्मय बनर्जी भी झारखंड के हस्तशिल्प, हैंडलूम और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट के मुरीद हैं. वे बताते हैं कि जो सामान बड़े दुकानों में महंगे बेचे जाते हैं…उससे बेहतर सामान आप स्वयंसेवी संस्थाओं से हाथों हाथ कम कीमत पर खरीद सकते हैं.

Tags: Indian railway, Jharkhand news, Ranchi news

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