15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर झारखंड सरकार को अपने मेडल लौटा देंगे 33 पदकवीर खिलाड़ी!
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15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर झारखंड सरकार को अपने मेडल लौटा देंगे 33 पदकवीर खिलाड़ी!
झारखंड के पदक विजेता खिलाड़ी नौकरी और नियुक्ति के पूर्व में दिए गए सरकारी आदेश को अभी तक अमल में नहीं लाने से नाराज हैं

राष्ट्रीय खेल, कॉमनवेल्थ और अन्य राष्ट्रीय खेलों में पदक जीतने वाले राज्य के 33 खिलाड़ियों ने सामूहिक रूप से घोषणा करते हुए कहा कि यदि सरकार 15 अगस्त से पहले उन्हें खेल विभाग (Sports Department) में नियुक्ति पत्र नहीं देती है तो वो अपने सभी मेडल और सर्टिफिकेट सरकार और खेल विभाग को लौटा देंगे

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 5, 2020, 11:53 PM IST
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रांची. झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार (Hemant Soren Government) राज्य में खेल प्रतिभा का सम्मान और मौका मिले इसके लिए शीघ्र नई खेल नीति (Sports Policy) लाने जा रही है. वहीं इससे अलग, बुधवार को रांची (Ranchi) के मोरहाबादी मैदान में राष्ट्रीय खेल, कॉमनवेल्थ और अन्य राष्ट्रीय खेलों में पदक जीतने वाले 33 खिलाड़ी एकजुट हुए. इन सभी ने घोषणा की कि यदि सरकार 15 अगस्त से पहले उन्हें खेल विभाग (Sports Department) में नियुक्ति पत्र नहीं देती है तो स्वतंत्रता दिवस के दिन अपने सभी मेडल और सर्टिफिकेट सरकार और खेल विभाग को लौटा देंगे.

ताइकवांडो खिलाड़ी प्रीति सिंह ने कहा कि एक दशक से भी ज्यादा समय से वो और उनके जैसी कई खेल प्रतिभाएं कुंठित हो रही हैं. अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर मेडल जीत कर देश-दुनिया में नाम करने वाले खिलाड़ियों को अब लगने लगा है कि पुरानी और नई खेल नीति के बीच में कहीं उनका भविष्य न पिस जाए.

खिलाड़ी सरिता तिर्की ने कहा- अनाज नहीं, नौकरी चाहिए
हाल ही में मीडिया में लॉन बॉल खिलाड़ी सरिता तिर्की की पीड़ा दिखाने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर सरिता बहन को सभी सुविधाएं देने का निर्देश दिया था. बुधवार को सरिता ने भी उन खिलाड़ियों के साथ अपना मेडल लौटाने की बात कही. सरिता का कहना है कि सरकारी राहत के नाम पर उनको अनाज दिया गया है, लेकिन उसे अनाज नहीं नौकरी चाहिए.
क्या है यह पूरा मामला


दरअसल खेल विभाग ने वर्ष 2019 में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को अलग-अलग संवर्ग में बहाली और सीधी नियुक्ति का आवेदन मांगा था. फरवरी 2020 में 200 से ज्यादा खिलाड़ियों में से 33 खिलाड़ियों का मेडल और सर्टिफिकेट वेरिफिकेशन भी हो गया था. पर विभागीय अधिकारी अब बहाली को लेकर टाल-मटोल कर रहे हैं. इसे देखते हुए खिलाड़ियों के सब्र का बांध टूटने लगा है. कराटे में सामने वाले खिलाड़ी को परास्त करने वाली विमला मुंडा हो या लॉन बॉल में कई पदक जीतने वाली नूतन मंजू मिंज सबको लगता है कि कहीं नई खेल नीति को आगे कर उनकी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द न कर दिया जाए.

देश और दुनिया मे झारखंड का नाम रोशन कर चुके खिलाड़ी हेमंत सरकार की नई प्रस्तावित खेल नीति का स्वागत तो करते हैं. पर उन्हें डर है कि कहीं नई खेल नीति की आड़ में उनकी नियुक्ति और सुखद भविष्य का सपना अधूरा न रह जाए.
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