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Jharkhand Mob Lynching Bill: राज्यपाल के बाद सत्ताधारी विधायकों ने भी भीड़ की परिभाषा पर उठाये सवाल

हेमंत सरकार के मॉब लिंचिंग बिल पर अब सत्तापक्ष के विधायक भी सवाल उठाने लगे हैं.

हेमंत सरकार के मॉब लिंचिंग बिल पर अब सत्तापक्ष के विधायक भी सवाल उठाने लगे हैं.

Jharkhand Mob Lynching Bill: जेएमएम के वरिष्ठ विधायक स्टीफन मरांडी ने बिल में भीड़ की संख्या पर सवाल उठाया है. उनका कहना है कि दो या दो से अधिक के उल्लेख पर उन्हें भी एतराज है. सरकार को नये सिरे से इसे परिभाषित करने की जरूरत है.

रांची. झारखंड में मॉब लिंचिंग बिल फिर से चर्चा में है. राज्यपाल रमेश बैस के द्वारा मॉब लिंचिंग बिल को आपत्तियों के साथ वापस किये जाने के बाद नये सिरे से इस पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है. जहां एक तरफ इस बिल का पहले से विरोध कर रही बीजेपी ने राज्य सरकार पर हमला तेज कर दिया है, वहीं सत्ता पक्ष के अंदर से भी इसको लेकर निर्धारित संख्या पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

झारखंड में मॉब लिंचिंग की घटना को रोकने के उद्देश्य से तैयार बिल पर बवाल शुरू हो गया है. राज्यपाल रमेश बैस के द्वारा मॉब लिंचिंग बिल में तय संख्या पर आपत्ति दर्ज होने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है .दो या दो से अधिक लोगों की संख्या को मॉब लिंचिंग के दायरे में रखने पर जेएमएम के विधायकों को भी आपत्ति है.

जेएमएम के वरिष्ठ विधायक स्टीफन मरांडी ने बिल में भीड़ की संख्या पर सवाल उठाया है. उनका कहना है कि दो या दो से अधिक के उल्लेख पर उन्हें भी एतराज है. अब सरकार को फिर से एक बार नये सिरे से इसे परिभाषित करने की जरूरत है.

मॉब लिंचिंग बिल पर कांग्रेस के अंदर भी एक राय नहीं दिख रही है. बंधु तिर्की जहां इसे राज्यपाल के अधिकार और उनके द्वारा दिये गए सुझाव पर सरकार को विचार करने के साथ जोड़ कर देख रहे हैं, वही इरफान अंसारी का गुस्सा उनके शब्दों से झलक रहा है. इरफान अंसारी का कहना है कि अब संवैधानिक संस्थानों पर भी बीजेपी का प्रभाव दिख रहा है. बीजेपी के इशारे पर अब ये काम करने लगे हैं.

राज्यपाल के द्वारा मॉब लिंचिंग बिल वापस किये जाने के बाद बीजेपी विधायकों के हौसले बुलंद हैं. बीजेपी ने इससे पहले भी सदन में बिल के आने के बाद कड़ी आपत्ति जताई थी. उस वक्त भी बीजेपी विधायक अनंत ओझा और रणधीर सिंह ने मॉब लिंचिंग बिल में भीड़ की संख्या को दो या दो से अधिक के रूप में दर्शाने पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया था. बीजेपी ने इस बिल में तुष्टिकरण की राजनीति के साथ जोड़ कर भी बताया है.

हेमंत सोरेन सरकार में ये दूसरा मौका है जब राज्यपाल ने सरकार के निर्णय पर आपत्ति जताई है. इससे पहले TAC कमिटी के गठन और इस बार मॉब लिंचिंग बिल पर आपत्ति जताते हुए राज्य सरकार को झटका दे दिया है. अब राज्य की हेमंत सोरेन सरकार को नये सिरे से इसे परिभाषित करना होगा और राज्यपाल की उस पर सहमति जरूरी होगी.

Tags: Hemant soren government, Jharkhand news, Mob lynching

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