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ST स्टेटस के लिए आदिवासी बेटियों पर फेंका जा रहा प्रेमजाल, निकाह के बाद बिना धर्मांतरण के खेला जा रहा खेल!

ST स्टेटस के लिए आदिवासी बेटियों पर फेंका जा रहा प्रेमजाल, निकाह के बाद बिना धर्मांतरण के खेला जा रहा खेल!

Jharkhand ST Status: पिछले कई दशकों से आदिवासी बेटियों को प्रेम जाल में फंसाकर ST स्टेटस हासिल करने की साजिश चल रही है.

Jharkhand ST Status: पिछले कई दशकों से आदिवासी बेटियों को प्रेम जाल में फंसाकर ST स्टेटस हासिल करने की साजिश चल रही है.

Jharkhand ST Status: झारखंड में आदिवासी समाज की सभ्यता और संस्कृति (Tribal Civilization and Culture) पर वैचारिक हमला लंबे समय से जारी है. पिछले कई दशकों से आदिवासी बेटियों को प्रेम जाल में फंसाकर ST स्टेटस हासिल करने की साजिश चल रही है. सामाजिक संस्कार पर की जा रही इस चोट से सरना समाज में गहरी नाराजगी देखी जा रही है.

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रांची. झारखंड में आदिवासी समाज की सभ्यता और संस्कृति (Tribal Civilization and Culture) पर वैचारिक हमला लंबे समय से जारी है. पिछले कई दशकों से आदिवासी बेटियों को प्रेम जाल में फंसाकर ST स्टेटस हासिल करने की साजिश चल रही है. सामाजिक संस्कार पर की जा रही इस चोट से सरना समाज में गहरी नाराजगी देखी जा रही है. दरअसल झारखंड में पिछले कई दशकों से आदिवासी बेटियों को प्रेम जाल में फंसाकर निकाह करने का खेल चल रहा है. ‌ताकि उनके एसटी स्टेटस (ST Status) का जमकर लाभ उठाया जा सके. यह खेल खासकर उन ग्रामीण इलाकों में ज्यादा खेला जा रहा है, जहां सरना समाज के साथ-साथ मुस्लिम आबादी भी बहुलता में है. ऐसे इलाकों में मुखिया पद के लिए एसटी महिला सीट आरक्षित होती है. लिहाजा प्रेम जाल में फंसाकर उनसे निकाह कर उन्हें उनके सरना धर्म में ही छोड़ दिया जाता है. उनका धर्मांतरण नहीं कराया जाता है. रांची के नगड़ी प्रखंड के टुंडुल उत्तरी पंचायत की कहानी भी कुछ ऐसी ही है.

टुंडुल उत्तरी पंचायत की 11 साल से मुखिया नीलम तिग्गा से गांव के ही यूनुस अंसारी ने 2003 में प्रेम विवाह किया था. लेकिन, निकाह के बाद आदिवासी समाज की नीलम तिग्गा का धर्मांतरण नहीं किया गया. इसी वजह से मुखिया पद के लिए एसटी महिला आरक्षित सीट से नीलम तिग्गा 2010 में मुखिया पद के चुनाव में उतरी और जीती भी.

एसटी आरक्षित सीट का उठा रहे लाभ
नीलम तिग्गा बताती हैं कि उन्होंने यूनुस अंसारी से 2003 में निकाह किया और उनका धर्मांतरण नहीं कराया और आज उनकी जिंदगी बहुत अच्छी चल रही है.‌ टुंडुल उत्तरी पंचायत की आबादी करीब छह हजार के आसपास है. पिछले 11 साल से यहां की मुखिया नीलम तिग्गा मूल रूप से यहीं की हैं. 2003 में उन्हें इंटर ITI पास यूनुस अंसारी से प्यार हुआ और दोनों ने निकाह कर लिया. लेकिन, स्नातक नीलम तिग्गा का धर्मांतरण नहीं कराया गया. फिर इस एसटी आरक्षित सीट से नीलम तिग्गा को मुखिया पद के लिए उतार दिया गया, जिसके बाद से एसटी और मुस्लिम वोट के कॉम्बिनेशन से पिछले 11 साल से मुखिया पद पर वह काबिज हैं.

एक ही गांव में रहने का मिला लाभ
नीलम की जेठानी तरन्नुम परवीन बताती है कि निकाह के बाद नीलम ने भले ही धर्मांतरण नहीं किया. लेकिन, वह कभी भी सरना पूजा स्थल नहीं गयी. बल्कि मस्जिद जाकर उसने कलमा जरूर सीख लिया. नीलम तिग्गा की जेठानी तरन्नुम परवीन भी वार्ड पार्षद हैं. तरन्नुम बताती हैं कि किस तरह नीलम और यूनुस का प्यार परवान चढ़ा.‌ बता दें, करीब छह हजार की आबादी वाले टुंडुल उत्तरी गांव में करीब 100 घर हैं, जिनमें 3 हजार की आबादी सरना आदिवासियों की, ढाई हजार मुस्लिमों की और करीब 500 अन्य जाति और धर्म के लोग हैं. गांव में सरना स्थल के साथ पांच मस्जिदें भी हैं. नीलम तिग्गा बताती हैं कि एक ही गांव में मायके और ससुराल होने की वजह से संपत्ति का लाभ और दूसरी मदद भी मिली.

सरना समाज ने जताई नाराजगी
वहीं आदिवासी बेटियों के साथ चल रहे इस खेल और सामाजिक आक्रमण से सरना समाज में गहरी नाराजगी है. राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा के प्रदेश महासचिव रवि तिग्गा की मानें तो मासूम बेटियों को बहला-फुसलाकर उनका निकाह कराया जा रहा है और निकाह के साथ ही मुखिया चुनाव में उतारकर आदिवासी हितों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. वीर बुधु भगत हूही मोर्चा के उपसचिव पंकज टोप्पो गहरी नाराजगी जताते हुए बताते हैं कि अब आदिवासी समाज जाग चुका है, लेकिन समाज की बेटियों को अपना भला-बुरा समझना होगा और इस तरह के प्रेम जाल के चंगुल से बचना होगा.

Tags: Ranchi news, Tribal cultural, Tribal Voters

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