झारखंड : तेंदुओं का घर बना पलामू टाइगर रिज़र्व, कैसे हो रही हैं बाघों की वापसी की कोशिशें?

कभी बाघ दिखते थे, अब पलामू रिज़र्व में तेंदुओं की भरमार है.

कभी बाघ दिखते थे, अब पलामू रिज़र्व में तेंदुओं की भरमार है.

Jharkhand News : साल और बांस के जंगलों के साथ ही कोयल, बूढ़ा और औरंगा नदियों के उपजाऊ क्षेत्र के चलते पर्यावरण के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण पलामू टाइगर रिज़र्व का ऐतिहासिक महत्व भी देश ही नहीं, दुनिया भर में मशहूर रहा है.

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रांची/पलामू. कुछ समय पहले तक बाघों की अच्छी खासी आबादी के लिए देश व दुनिया में गौरवान्वित महसूस करता रहा पलामू टाइगर रिज़र्व इन दिनों करीब 150 तेंदुओं के स्वर्ग बना हुआ है. यहां पर्यटक आते हैं और उछलते दौड़ते तेंदुओं के झुंडों के साथ सेल्फी खिंचवाते हैं. यहां के अधिकारियों की मानें तो अब इस टाइगर रिज़र्व में एक भी टाइगर नहीं देखा जाता. आखिरी बार एक बाघिन फरवरी 2020 में बेटला राष्ट्रीय उद्यान के पास मृत पाई गई थी. वन के मुख्य संरक्षक वायके दास की मानें तो हर संभव कोशिश ज़रूर की जा रही है कि यहां टाइगरों की किसी तरह वापसी हो सके.

पलामू टाइगर रिज़र्व के प्रोजेक्ट डायरेक्टर दास ने कहा कि आखिरी बार जो अखिल भारतीय स्तर पर अनुमानित बाघ गणना हुई थी, उसमें यहां एक भी टाइगर न होना पाया गया था. पीटीआई ने दास के हवाले से लिखा 'टाइगरों की वापसी के लिए यहां उनके शिकार के संसाधन बढ़ाए जा रहे हैं. सबसे पहले, दो गांवों लाटू और कुजरुम के लोगों को कहीं और बसाया जा रहा है. करीब 300 वर्ग किलोमीटर में इंसानी बस्तियां बस गई हैं, जिन्हें इस प्रोजेक्ट के तहत कहीं और शिफ्ट किया जाएगा.

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बाघों की वापसी के लिए इंसानी बस्तियों को पलामू रिज़र्व के दायरे से कहीं और बसाने की कवायद हो रही है.

आखिर क्यों गायब हो गए टाइगर?

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