झारखंड पुलिस : 40 एसआई को सौंपी 3 महीने में 400 लंबित केस निबटाने की जिम्मेवारी

स्पेशल टास्क फोर्स के लोगों को तीन महीने में 400 केस निबटाने हैं.

स्पेशल टास्क फोर्स के लोगों को तीन महीने में 400 केस निबटाने हैं.

सभी एसआई को 10-10 केस का भार सौपा गया है. इस टीम के जिम्मे सबसे ज्यादा मामले ठगी से संबंधित हैं. वहीं इसके अलावा अपहरण के साथ अन्य मामले भी शामिल हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 21, 2021, 8:11 PM IST
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रांची. वर्ष 2018 के पेंडिंग केसों के डिस्पोजल को लेकर रांची पुलिस (Ranchi Police) ने 40 एसआई की स्पेशल टास्क फोर्स (Special task force) का गठन किया है. इस टीम को 3 महीने में 400 लंबित केसों (pending cases) के डिस्पोजल की जिम्मेवारी सौंपी गई है. वहीं, इस दरम्यान इस टीम में शामिल लोगों का न तो तबादला होगा और न ही इन्हें विधि व्यवस्था से संबंधित कोई काम का बोझ सौंपा जाएगा.

प्रदेश के डीजीपी ने लंबित कांडों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी, जिसके बाद प्रदेश भर के एसपी को निर्देश दिया कि वे इन लंबित केसों के निस्तारण को लेकर टीम का गठन करें ताकि केसों का डिस्पोजल हो सके. डीजीपी के आदेश के बाद रांची पुलिस ने स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया.

13 डीएसपी की निगरानी में 40 सब इंस्पेक्टर

इस टीम में 40 सब इंस्पेक्टर हैं. उनकी मॉनिटरिंग के लिए हर 3 इंस्पेक्टरों की टीम पर एक डीएसपी लगाए गए हैं. इस बारे में रांची के सिटी एसपी सौरभ ने बताया कि इन 40 लोगों को 3 महीने के दौरान 400 केसों का डिस्पोजल करना है.
न ट्रांसफर, न दूसरी जिम्मेवारी

इस दरम्यान इन लोगों को विधि व्यवस्था के मामलों से दूर रखा जाएगा और जबतक कोई विशेष परिस्थिति न हो तबतक इन्हें हटाया भी नहीं जाएगा.

सभी थानों के एक-एक दरोगा भी टीम में



सभी एसआई को 10-10 केस का भार सौपा गया है. सबसे खास बात है कि इस टीम में रांची के करीब-करीब तमाम थानों के एक-एक पदाधिकारी को जोड़ा गया है. इस टीम के जिम्मे सबसे ज्यादा मामले ठगी से संबंधित हैं. वहीं इसके अलावा अपहरण के साथ अन्य मामले भी शामिल हैं.

3 महीने बाद फिर बनेगी दूसरी टीम

ये 400 वैसे केस हैं जिनका प्रभार किसी के पास नहीं था. इसके 3 महीने बाद एक दूसरी स्पेशल टीम बनेगी जो अन्य 400 मामलों का निष्पादन करेगी.

रोटेशन पॉलिसी का मिलेगा लाभ

बहरहाल 3 महीने की रोटेशन पॉलिसी के साथ टास्क फोर्स का गठन रांची पुलिस को कितनी राहत देता है, ये देखना होगा. दरअसल, पेंडिंग मामलों की संख्या सैकड़ों में नहीं, हजारों में है. वहीं रोटेशन पॉलिसी की वजह से कर्मी रिफ्रेश होंगे, जिसका लाभ भी पुलिस को मिलेगा.
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