Home /News /jharkhand /

2016 में झारखंड पुलिस : कहीं बेबसी झलकी तो कहीं वर्दी पर दिखा दाग, आंकड़े कहते शाबास

2016 में झारखंड पुलिस : कहीं बेबसी झलकी तो कहीं वर्दी पर दिखा दाग, आंकड़े कहते शाबास

आंकड़ो के आईने में वर्ष 2016 झारखंड पुलिस के लिए संतुष्टि भरा रहा, वहीं कई मामले को सुलझाने में पुलिस नाकाम साबित हुई. इसके साथ ही कुछ घटनाओं ने वर्दी को कंलकित भी किया. पूरे साल की अपराधिक घटनाओं को खंगालती खास रिपोर्ट.

आंकड़ो के आईने में वर्ष 2016 झारखंड पुलिस के लिए संतुष्टि भरा रहा, वहीं कई मामले को सुलझाने में पुलिस नाकाम साबित हुई. इसके साथ ही कुछ घटनाओं ने वर्दी को कंलकित भी किया. पूरे साल की अपराधिक घटनाओं को खंगालती खास रिपोर्ट.

आंकड़ो के आईने में वर्ष 2016 झारखंड पुलिस के लिए संतुष्टि भरा रहा, वहीं कई मामले को सुलझाने में पुलिस नाकाम साबित हुई. इसके साथ ही कुछ घटनाओं ने वर्दी को कंलकित भी किया. पूरे साल की अपराधिक घटनाओं को खंगालती खास रिपोर्ट.

आंकड़ो के आईने में वर्ष 2016 झारखंड पुलिस के लिए संतुष्टि भरा रहा, वहीं कई मामले को सुलझाने में पुलिस नाकाम साबित हुई. इसके साथ ही कुछ घटनाओं ने वर्दी को कंलकित भी किया. पूरे साल की अपराधिक घटनाओं को खंगालती खास रिपोर्ट.

p3

 

आंकड़ों में चमका चेहरा

p1

आंकड़ों के आईने में वर्ष 2016 झारखंड पुलिस के लिए सुकून देने वाला हो सकता है. क्योंकि अपराध से जुड़े विभिन्न कांडों जैसे हत्या, डकैती, किडनैपिंग, चोरी, दुष्कर्म जैसे मामले के आंकड़े गिरे हैं. बीते वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष नवम्बर तक के मिले आंकड़ों में  हत्या के 1752 मामले सामने आए जो बीते वर्ष की तुलना में 26 कम हैं. वहीं डकैती के 192 मामले आएजो बीते वर्ष से 16 कम हैं. फिरौती के लिए अपहरण के 1057 मामले नवंबर तक सामने आए. यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 54 कम है.  इतना ही नहीं, इस वर्ष दर्ज कुल मामलों  की बात करें तो 44434 मामले दर्ज किए गए हैं जो पिछले वर्ष 51163 की तुलना में कम हैं.

p7

हुए ये प्रयास भी

इस वर्ष पुलिस के छवि को बदलने का प्रयास भी किया गया. इसको लेकर जहां अनुसंधान पर जोर देने की कोशिश हुई, दारोगा स्तर के अधिकारियों की संख्या बढ़ाई गई. वहीं हवलदार और कांस्टेबल स्तर के कर्मियों की भारी नियुक्ति भी की गई. इतना ही नहीं एटीएस जैसी संस्था भी राज्य पुलिस को मिली. इसके साथ ही राजधानी रांची समेत बड़े शहरों में पेट्रोलिंग के लिए सिटी पुलिसिंग, बीट पुलिसिंग, नए टीओपी , हाईवे पेट्रोलिंग, महिला शक्ति कमांडो की व्यवस्था की गई. तकनीकी तौर पर भी राज्य पुलिस को मजबूत बनाने की कवायद इस वर्ष 100 डायल , शक्ति एप आदि , साईबर थाना के रुप में सामने आया.

यहां बेबस दिखी पुलिस

चेहरा बदलने में लगी राज्य पुलिस की यह सारी कवायद के बीच कुछ कई ऐसी घटनाएं भी घटी  जहां पुलिस बेबस नजर आयी । वहीं कुछ पुलिसकर्मियों ने अपने कुकृत्य से वर्दी को शर्मशार भी किया. गुमनाम पत्र के माध्यम से राजभवन, रांची स्टेशन ,विधानसभा समेत कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को उड़ाने की धमकी देने वाला आज भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. वहीं रांची के बरियातू के रिवरसिवा अपार्टमेंट में पांच लोगों की सामूहिक हत्या , बूटी बस्ती में बीटेक छात्रा की निर्मम हत्या के मामले अनसुलझे हैं. लवकुश शर्मा, लखन सिंह समेत कई अपराधी लगातार प्रयास के बाद भी पुलिस की पहुंच से काफी दूर हैं.

लगा वर्दी पर दाग भी

लातेहार में पुलिस हिरासत में नाबालिग बच्ची की मौत का मामला हो या रांची के बुंडू में पुलिस हिरासत में निर्दोष किशोर के मौत का मामला, या फिर धनबाद में पुलिस इंस्पेक्टर की थाने में रहस्यमय कथित आत्महत्या मामला, पुलिस की वर्दी इन मामलों में दागदार हुई है. हालांकि राज्य पुलिस के वरीय अधिकारियों को इस बात की उम्मीद है कि आने वाले दिनों में लोगों को बेहतर पुलिसिंग मिलेगी.

 

 

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर