झारखंड के बड़े साइबर अपराधियों की 100 करोड़ की संपत्ति का तैयार हुआ डेटाबेस, ईडी से साझा करेगी पुलिस

झारखंड के देवघर, जामताड़ा और गिरिडीह जिले साइबर अपराधियों का हब माना जाता है. (सांकेतिक तस्वीर)
झारखंड के देवघर, जामताड़ा और गिरिडीह जिले साइबर अपराधियों का हब माना जाता है. (सांकेतिक तस्वीर)

झारखंड पुलिस ने राज्य के बड़े साइबर अपराधियों (Cyber Criminals) की 100 करोड़ की संपत्तियों का डेटाबेस तैयार किया है. अब इस जानकारी को ईडी (Enforcement directorate) से साझा किया जाएगा.

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रांची. झारखंड में साइबर अपराधियों (Cyber Criminals) पर पुलिस और ईडी का एक साथ डंडा चलेगा. झारखंड पुलिस (Jharkhand Police) ने साइबर अपराधियों का डेटा बेस तैयार किया है, जिसमें उनके द्वारा अर्जित की गई करीब 100 करोड़ की संपत्ति की जानकारी है. अब इस जानकारी को ईडी (Enforcement directorate) के साथ साझा किया जाएगा. और फिर साइबर अपराधियों पर दोतरफा शिकंजा कसा जाएगा.

झारखंड पुलिस के द्वारा साइबर अपराध पर की गई समीक्षा में ये बात सामने आई कि सायबर अपराधी इनदिनों पश्चिम बंगाल की सिम का इस्तेमाल कर लोगों की गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं.

आईजी एचआर नवीन कुमार सिंह ने बताया कि जामताड़ा के अलावा देवघर और गिरिडीह में भी इनदिनों साइबर अपराधियों की बड़ी पैठ है. इनके खिलाफ पुलिस और साइबर सेल नई रणनीति के तहत कार्रवाई कर रही है.



3 तरह से कर रहे फ्रॉड 
झारखंड पुलिस के मुताबिक साइबर अपराधी इनदिनों तीन तरह के सायबर अपराध को अंजाम दे रहे हैं. ATM क्लोनिंग, OTP और OLX फ्रॉड. रांची सिटी एसपी सौरभ ने बताया कि रांची साइबर सेल की टीम इनदिनों देवघर, गिरिडीह और जामताड़ा में लगातार छापेमारी कर रही है.



गूगल की रिमोट ऐप से ठगी करने वाले 11 अपराधी गिरफ्तार 

बता दें कि झारखंड के गिरिडीह, देवघर और जामताड़ा जिले साइबर अपराध के लिए देश में बदनाम हैं. देवघर पुलिस साइबर ठगों पर लगाम लगाने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है. एक बार फिर शुक्रवार को 11 ठगों को पुलिस ने धर दबोचा है. पुलिस की दो टीमों ने सारठ, मारगोमुंडा, कर्रों और देवीपुर थाना क्षेत्रों से इन साइबर क्रिमिनल्स को गिरफ्तार किया.

देवघर पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार साइबर अपराधी फर्जी मोबाइल नंबर से फर्जी बैंक मैनेजर बनकर ठगी की घटना को अंजाम देते थे. इसके लिए ये गूगल की रिमोट एक्सेस ऐप का सहारा लेते थे. एटीएम बंद होने या केवाईसी अपडेट करने के बहाने से ये अपराधी लोगों को OTP भेज कर या फिर गूगल पर रिमोट एक्सेस जैसे Team viewer, Quick Support ऐप इंस्टॉल करवाकर लोगों के खाता से रकम उड़ा लेते थे.
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