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झारखंड : पानी है या ज़हर! शर्मनाक जीवन जी रहा है राजधानी से सटा यह गांव

रांची के पास के गांव पचफेड़िया में इस गड्ढे का पानी पीने को मजबूर हैं ग्रामीण.

Water Crisis : राजधानी रांची के एक ऐसे गांव की तस्वीर दिखाते हैं, जहां पेयजल व पानी से जुड़ी रोज़मर्रा की हर ज़रूरत ऐसे पूरी होती है कि दिल बैठ जाए. क्या आपको इस गांव के बारे में पता है, जो चिराग तले अंधेरे को चरितार्थ करता है?

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रांची. झारखंड की राजधानी रांची में एक तरफ आलीशान मकान, फ्लैट्स और चमचमाते भवन हैं, जहां बाकायदा नलों या वॉटर प्यूरीफायरों का पानी आसानी से उपलब्ध है. इसी शहर से सटा एक गांव है, पचफेड़िया, जहां सैकड़ों लोग वो पानी पीते हैं, जिससे शहरों के लोग घर साफ करना तक पसंद न करें! इस गांव की तस्वीर ऐसी है, जो सरकार के मुख्यालय को आंखें झुकाने पर मजबूर कर सकती है. रांची शहर से तकरीबन 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गांव सालों से आज भी 12 फीट गहरे गड्ढे का दूषित पानी पीने को मजबूर है. करीब 50 घरों में रहने वाली ढाई सौ की आबादी वाले गांव ने साफ पानी का न तो स्वाद चखा है और न ही रंग कभी देखा है.

शुद्ध, साफ और पीने लायक पानी कैसा होता है? शायद राजधानी के कांके प्रखंड के पचफेड़िया गांव ने कभी देखा ही नहीं. दाढ़ी के गंदे पानी से प्यास बुझाने के साथ-साथ इस गांव में रोज़मर्रा की जिंदगी शर्मनाक हाल में है. पचफेड़िया गांव में नहाने और दूसरी ज़रूरतों के लिए महज़ एक छोटा सा डोभा है, जहां 50 घरों के ग्रामीण बर्तन और कपड़े धोने के साथ साथ नहाते भी हैं. ऐसे में, गांव वालों ने एक व्यवस्था बना ली है, जिसके तहत सुबह 6 बजे से 9 बजे तक इस छोटे से डोभे में पुरुष स्नान करते हैं. उसके बाद महिलाओं की बारी आती है.

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रांची के पचफेड़िया गांव की एक 80 वर्षीय वृद्धा ने कहा कि उन्होंने जीवन में कभी साफ पानी नहीं पिया. (न्यूज़18 क्रिएटिव)


क्या सीएम साहब पी पाएंगे यह पानी?
पचफेड़िया गांव की अनिमा मुंडा की मानें तो पूरा गांव शर्मिंदगी की स्थिति से गुजर रहा है. एक छोटे गड्ढे में करीब दो सो लोगों का नहाना, हर दिन नई बीमारी पैदा करता है. 80 साल की बुजुर्ग सुखिया मुंडा की मानें तो उन्होंने आज तक कभी भी नल का साफ पानी नहीं पिया है़. इस बुजुर्ग महिला ने पूछा कि सालों से जो गंदा पानी वह पी रही है, क्या राज्य के मुख्यमंत्री वह पानी पी पाएंगे?

पचफेड़िया गांव के एक युवा अमित मुंडा ने बताया कि गांव की ओर से कई बार पेयजल और तालाब को लेकर बीडीओ को पत्र दिया गया, लेकिन आज तक इस मामले में कोई काम नहीं हुआ. ऐसे में हताश और निराश ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इज्जत की जिंदगी की मांग की है.
Published by:Bhavesh Saxena
First published: