झारखंड: पोस्ट कोविड बच्चों में MIS-C बीमारी का खतरा, हार्ट-किडनी पर खतरनाक असर

रांची के अस्पताल में भर्ती बच्चा.

रांची के अस्पताल में भर्ती बच्चा.

कोरोना (Corona) के बाद एक नई बीमारी बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रही है. या फिर यूं कहें कि जिंदगी भर के लिए बीमार बना सकती हैं.

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रांची. कोरोना (Corona) के बाद एक नई बीमारी बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रही है. या फिर यूं कहें कि जिंदगी भर के लिए बीमार बना सकती हैं. पोस्ट कोविड होने वाली इस बीमारी का नाम MIS- C है. राज्यभर में फिलहाल ऐसे 16 मामले फिलहाल रेफर होकर रांची पहुंचे हैं. कोरोना ने जहां एक तरफ जिंदगी को झकझोरा है तो वहीं दूसरी तरफ पोस्ट कोविड में होने वाली एक नई बीमारी ने राज्य के नौनिहालों की जिंदगी के लिए खतरा पैदा कर दिया है. इस नई बीमारी का नाम है MIS- C. यानि मल्टी सिस्टम इनफ्लामेट्री सिंड्रोम.

ये एक ऐसी बीमारी जो पोस्ट कोविड बच्चों को अपना निशाना बनाती है. ये उनके हर्ट, लीवर, किडनी, स्किन और आंख को बुरी तरह प्रभावित करती है. नॉन कम्युनिकेबल यह बीमारी इम्यून रिएक्शन की वजह से होती है, जिसमें शरीर में इम्यून सिस्टम ठीक से काम नहीं करता है और शरीर में जो एंटीबॉडी बनती है वही एंटीबॉडी शरीर के अपने ही अंगों को नुकसान पहुंचाती है. झारखंड में अभी तक ऐसे 16 मामले सामने आ चुके हैं. बोकारो, पलामू, हजारीबाग, साहिबगंज, धनबाद से रेफर कर इन बच्चों को इलाज के लिए रांची भेजा गया है.

पोस्ट कोविड MIS-C का असर

* अभी तक राज्य में MIS-C कुल 16 मामले
* पहला मामला 12 मई को धनबाद में आयाा

* 5 साल से ज्यादा और 20 साल से कम के बच्चों में ज्यादा खतरा

* मां के कोविड होने पर नवजात में भी इस बीमारी का खतरा



* हर्ट में कोरोनरी आर्टरी को डैमेज करता है

* बीमारी समय पर पकड़ में आने पर पूर्ण स्वस्थ होने की संभावना

* बच्चों के वजन के हिसाब से बढ़ता है इलाज का खर्च

* 10 किलो के बच्चे में बीमारी होने पर एक लाख तक का खर्च

* 35-40 किलो के वजन के बच्चे पर ढाई लाख तक का इलाज में खर्च

MIS-C के लक्षण

* कोरोना होने के 2 से 6 हफ्ते के बाद तेज बुखार

* शरीर में लाल दाने निकलना* आंखों में लालीपन

* शरीर में सूजन

* पेशाब कम हो जाना

एक महीने बाद बीमारी का पीक

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर राजेश की मानें तो पोस्ट कोविड बीमारी होने के कारण कोरोना के पीक समय के ठीक एक महीने के बाद इस बीमारी का भी पीक टाइम होगाऔर 10 जून के बाद यदि मारी बच्चों में बढ़ सकती है. इस बीमारी के इलाज में बच्चों को इम्यूनोथेरेपी के साथ कम डोज में स्टेरायड दिए जाते हैं. बहरहाल राजधानी के एक निजी अस्पताल में इस MIS- C के शिकार 16 बच्चे भर्ती हैं. MIS- C के बढ़ते खतरे में लोगों को बुरी तरह परेशान कर दिया है. घर में किसी भी व्यक्ति के कोरोना संक्रमित होने के बाद या फिर जिन बच्चों में कोरोना के लक्षण देखे गए हों. उन सभी में इस बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है. आज जरूरत इस बात की है कि बच्चों को सबसे पहले कोरोना संक्रमण से बचाया जाए. ताकि पोस्ट कोविड होने वाली इस नॉन कम्युनिकेबल बीमारी से बचा जा सके.

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