Jharkhand: सरकार में भागीदारी के बावजूद हर मंच से दर्द बयां क्यों कर रहे RJD नेता

झारखंड में सत्ता में रहकर भी आरजेडी के नेताओं का दर्द आज फिर एक बार छलका.

Jharkhand RJD: झारखंड में सत्ता में रहकर भी आरजेडी नेता अपना दर्द बयां करते रहते हैं. आरजेडी प्रदेश अध्यक्ष अभय कुमार सिंह ने कह दिया कि अगले चुनाव में आरजेडी याचक की जगह 'किंग मेकर' की भूमिका निभाने के लिए आगे बढ़ रहा है.

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रांची. झारखंड में आरजेडी लगातार संगठन विस्तार में लगी है. इसी क्रम में पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आरजेडी मिलन समारोह का आयोजन किया गया. पूर्व कांग्रेसी नेता हरीश तिवारी अपने समर्थकों के साथ आरजेडी में शामिल हो गए. सत्ता में भागीदारी के बावजूद भी एक दर्द गाहे-बगाहे आरजेडी नेताओं की
जुबान पर आ ही जाता है. झारखंड में सत्ता में रहकर भी आरजेडी के नेताओं का दर्द आज फिर एक बार छलका. आरजेडी प्रदेश अध्यक्ष अभय कुमार सिंह ने यहां तक कह दिया कि अगले चुनाव में आरजेडी याचक की जगह 'किंग मेकर' की भूमिका निभाने के लिए आगे बढ़ रहा है.

आरजेडी झारखंड में खुद को क्यों बता रही याचक


दरअसल, आरजेडी नेताओं को यह दर्द सहयोगी कांग्रेस और झामुमो की ओर से वर्ष 2019 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले दिया गया था. जब झामुमो और कांग्रेस ने खुद सीटें बांट ली थी. अपनी मर्जी से आरजेडी के लिए चंद सीटें एकतरफा छोड़ दी थी. प्रेस क्लब में महागठबंधन में सीटों की सीटों की घोषणा के समय हेमंत सोरेन, आरपीएन सिंह और अन्य कांग्रेसी नेता पहुंच गए थे लेकिन रांची में रहकर भी तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस से दूरी बना ली थी.

सूत्र बताते हैं कि लालू प्रसाद के हस्तक्षेप से इच्छा के विपरीत स्वीकार कर आरजेडी गठबंधन में बना रहा. और विश्रामपुर जैसे जनाधार वाले क्षेत्र की जगह बिना जनाधार वाले बरकट्ठा विधानसभा सीट को भी स्वीकार कर लिया था. हालांकि, तेजस्वी यादव ने अपने प्रदेश नेताओं को संगठन को मजबूत बनाने का टास्क दे दिया. वह भी पूरे 22 सीटों पर ताकि गठबंधन में कोई उसे नजरअंदाज न कर पाएं और सत्ता की चाबी उसके पास रहे.

लालू प्रसाद का आधार वोट नहीं खिसका


2019 के चुनाव में झारखंड में आरजेडी सिर्फ एक सीट चतरा ही जीत सका था. कोडरमा, गोड्डा, देवघर जैसे विधानसभा क्षेत्र में प्रदर्शन दमदार रहा था. वह भी तब जब प्रदेश अध्यक्ष होते हुए अनपूर्णा देवी, चतरा के पूर्व विधायक जनार्दन पासवान, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गिरिनाथ सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गौतम सागर राणा सहित कई बड़े नाम वाले नेताओं ने आरजेडी छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया था.

आरजेडी भले ही 2019के विधानसभा चुनाव में सिर्फ एक सीट जीत सका हो लेकिन बड़ी संख्या में मुस्लिम यादव वोट महागठबंधन के अन्य दल झामुमो कांग्रेस को ट्रांसफर होने का नतीजा रहा कि आरजेडी के दोनों सहयोगियों ने झारखंड में राज्य गठन के बाद सबके ज्यादा सीटें जीती. अब आरजेडी राज्य की 22 विधानसभा सीट को चिह्नित कर वहां अपना संगठन विस्तार का खाका तैयार किया है ताकि उसे महागठबंधन में झुककर सीटों का समझौता न करना पड़े और जरूरत पड़ने पर इन 22 सीटों पर किसी का भी खेल बिगाड़ दे.

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