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चमत्कार! झारखंड के संस्कृत विद्यालय बिन शिक्षक दे रहे 90 फीसदी रिजल्ट

झारखंड के संस्कृत विद्यालय बिना शिक्षक 90 फीसदी रिजल्ट दे रहे हैं.

झारखंड के संस्कृत विद्यालय बिना शिक्षक 90 फीसदी रिजल्ट दे रहे हैं.

झारखंड के संस्कृत स्कूल बिन शिक्षक बेहतर परफॉर्म कर रहे हैं. मध्यमा की परीक्षा में 99 फीसदी छात्र पास होते रहे हैं. जबकि पिछले 10 वर्षों में मैट्रिक-इंटर का रिजल्ट कभी 90 फीसदी तक नहीं पहुंचा.

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रांची. झारखंड के संस्कृत विद्यालय मात्र डिग्री लेने का माध्यम बनकर रह गये हैं. शिक्षकों के अभाव में संस्कृत स्कूलों में ताला लगने लगा है. रांची के किशोरगंज इलाके में स्थित राजकीय संस्कृत उच्च विद्यालय बंद होने के कगार पर है. दरअसल, इस स्कूल के शिक्षक एक-एक कर रिटायर होते गए और कुछ शिक्षकों को प्रमोशन देकर विभाग में उच्च पद पर पदस्थापित कर दिया गया. जब एक भी शिक्षक नहीं बचा, तो फिर विद्यार्थियों का भला इस स्कूल में क्या काम.

शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो ने बताया कि मुख्यमंत्री ही इस बारे में बता सकते हैं. उनके पास ही मंत्रालय है. मैं तो बिना विभाग का मंत्री हूं. जब चार्ज लूंगा तभी कुछ बता सकता हूं. इस मामले पर मेरे पास अभी तक कोई जानकारी नहीं आई है. शिक्षा विभाग के अधिकारी ही इस मामले पर बता पाएंगे.

राजकीयकृत संस्कृत उच्च विद्यालय के पूर्व शिक्षक और वर्तमान में जैक में संयुक्त सचिव मोहन झा के अनुसार संस्कृत विद्यालय सिर्फ डिग्री देने का माध्यम बन गये हैं. बाहर से लोग सिर्फ डिग्री लेने यहां आते हैं. पढ़ाई से उनका कोई मतलब नहीं है.

किशोरगंज संस्कृत उच्च विद्यालय में मात्र दो ही कर्मचारी बचे हुए हैं. पिछले साल से यहां मध्यमा का फार्म भी नहीं भरा रहा है. स्कूल जर्जर हो चुका है. स्थिति ऐसी की है कि कभी भी छत गिर सकता है.

हालांकि राज्य के संस्कृत स्कूल बिन शिक्षक बेहतर परफॉर्म कर रहे हैं. मध्यमा की परीक्षा में 99 फीसदी छात्र पास होते रहे हैं. सिर्फ 2019 में रिजल्ट 55 फीसदी रहा था. वहीं, प्रदेश में पिछले 10 वर्षों में मैट्रिक-इंटर का रिजल्ट कभी 90 फीसदी तक नहीं पहुंचा.

स्थिति ये है कि मध्यमा का फॉर्म जमा होने तक स्कूलों में नामांकन की प्रक्रिया चलती रहती है. विद्यार्थी बिना एक दिन स्कूल गये, परीक्षा में शामिल हो जाते हैं. देवभाषा कही जाने वाली संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए एक तरफ सरकार कई योजनाएं चला रही हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों की कमी के चलते संस्कृत के स्कूल बंद हो रहे हैं.

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