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हेमंंत सरकार की इस नीति को अपना अपमान बता रहे झारखंड आंदोलनकारी, 24 जिलों से आकर विधानसभा का किया घेराव

झारखंड आंदोलनकारियों ने अपनी मांग को लेकर विधानसभा का घेराव किया.

झारखंड आंदोलनकारियों ने अपनी मांग को लेकर विधानसभा का घेराव किया.

Jharkhand Aandolankari: आंदोलनकारियों का कहना है कि झारखंड आंदोलन के समय सिर्फ जेल जाने वाले ही आंदोलनकारी नहीं थे, बल्कि वे भी आंदोलनकारी थे, जिन्होंने जेल के बाहर आंदोलन को धार दिया.

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रांची. झारखंड आंदोलनकारी मोर्चा के बैनर तले 24 जिलों से आये आंदोलनकारियों ने रांची में विधानसभा (Jharkhand Assembly) के सामने प्रदर्शन किया. और झारखंड आंदोलनकारियों की पहचान के लिए सरकार की नीति का विरोध कर उसे वापस लेने की मांग की. आंदोलनकारियों ने कहा कि झारखंड आंदोलन के समय सिर्फ जेल जाने वाले ही आंदोलनकारी नहीं थे, बल्कि कई ऐसे लोग थे जो आंदोलन को धार देने में जुटे हुए थे. उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है.

बीडीओ और सरकारी अधिकारियों द्वारा झारखंड आंदोलनकारियों की पहचान की व्यवस्था का विरोध करते हुए मोर्चा ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे सरकार को भी उखाड़ फेंकेंगे.

बड़ी संख्या में जुटे आंदोलनकारियों ने हुंकार भरते हुए कहा कि अगर झारखंड आंदोलनकारी के चयन की प्रक्रिया में बदलाव नहीं हुआ तो वे जोरदार आंदोलन करेंगे. झारखंड आंदोलनकारी स्वर्गीय टेकलाल महतो के संबंधी और हजारीबाग से लोकसभा चुनाव लड़ चुके शिवलाल महतो ने कहा कि सिर्फ जेल जाने वाले ही झारखंड आंदोलनकारी नहीं थे. आंदोलन के समय दीवार लेखन, गीत गाकर लोगों को जागरूर करने वाले से लेकर अखबार में लेख लिखने वाले तक आंदोलनकारी थे.



झारखंड अलग राज्य के लिए आंदोलन करने वालों में वैसे लोगों को सरकार पेंशन दे रही है, जो उस दौरान कम से कम तीन महीना जेल काटा हो. छह माह से ज्यादा समय जेल में रहने वाले आंदोलनकारियों को 5000 रुपये प्रतिमाह पेंशन देने का प्रावधान किया गया है. वहीं छह माह से कम व तीन महीने से ज्यादा दिनों तक जेल में रहने वाले आंदोलनकारियों को 3000 रुपये प्रतिमाह पेंशन देने का प्रावधान है. झारखंड आंदोलनकारी सरकार की इस व्यवस्था को आंदोलनकारियों का अपमान बताते हुए विरोध जता रहे हैं.
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