जानिए कैसे... नई शिक्षा नीति पर फंस गई झारखंड की रघुवर सरकार!

कुछ ही महीनों बाद झारखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में सरकार पारा शिक्षकों को नाराज नहीं करना चाहती है. वहीं, केन्द्र की नई शिक्षा नीति में पारा शिक्षकों के पद को पूरी तरह से समाप्त करने की बात है.

Ajay Lal | News18 Jharkhand
Updated: August 6, 2019, 12:21 PM IST
जानिए कैसे... नई शिक्षा नीति पर फंस गई झारखंड की रघुवर सरकार!
जानिए कैसे- नई शिक्षा नीति पर फंस गई झारखंड की रघुवर सरकार!
Ajay Lal
Ajay Lal | News18 Jharkhand
Updated: August 6, 2019, 12:21 PM IST
70 हजार पारा शिक्षकों की फौज झारखंड सरकार के लिए सिरदर्द बना हुआ है. दरअसल, केन्द्र ने राज्य सरकार से नई शिक्षा नीति के लिए 31 जुलाई तक सलाह मांगी थी. इसको लेकर रघुवर सरकार असमंजस की स्थिति में है. नई शिक्षा नीति में पारा शिक्षकों के पद को पूरी तरह से समाप्त करने का प्रावधान है. अगर सरकार इस शिक्षा नीति की सराहना करती है तो उसे पारा शिक्षकों के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा और यदि वह पारा शिक्षकों के बनाये रखने की बात कहती है तो इसका मतलब होगा नई शिक्षा नीति का विरोध करना.

नई शिक्षा नीति पर ऐसे फंस गई झारखंड सरकार

सर्वशिक्षा अभियान के तहत राज्य में नियुक्त किये गये 70 हजार पारा शिक्षक अब सरकार के लिए एक ऐसी चुनौती बन गयी है, जिसे ना निगलते बन रहा है और ना ही उगलते. केन्द्र सरकार ने झारखंड से नई
शिक्षा नीति पर अपना मंतव्य देने को कहा था. इसके लिए केंद्र सरकार ने 31 जुलाई 2019 तक समय दिया था. लेकिन रघुवर सरकार तय नहीं कर पायी कि वह केन्द्र को क्या सलाह दे. इसकी बड़ी वजह थी- पारा शिक्षकों की बड़ी फौज. बता दें कि कुछ ही महीनों बाद झारखंड में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में सरकार पारा शिक्षकों को नाराज नहीं करना चाहती है. वहीं, केन्द्र की नई शिक्षा नीति में पारा शिक्षकों के पद को पूरी तरह से समाप्त करने की बात कही गयी है.

नई शिक्षा नीति को लेकर झारखंड में उहापोह की स्थिति-new education policy in jharkhand
नई शिक्षा नीति को लेकर झारखंड में उहापोह की स्थिति


तीन-तीन बैठकों के बाद भी नहीं निकला कोई नतीजा

नई शिक्षा नीति को लेकर शिक्षा विभाग ने तीन-तीन बार बैठक की, उसके बाद भी केन्द्र को किसी प्रकार की सलाह देने की स्थिति में नहीं आ पायी. लिहाजा राज्य सरकार ने एक पत्र लिखकर केन्द्र से कहा कि उसे एक और महीने का वक्त दिया जाये ताकि वो नई शिक्षानीति पर अपनी राय दे सके. दरअसल, शिक्षा विभाग की बड़ी चिंता ये है कि यदि वह 70 हजार पारा शिक्षकों को हटाती है उसे एक बड़े आंदोलन से दो चार होना पड़ेगा. सरकार के साथ दूसरी परेशानी ये है कि वह इतनी बड़ी संख्या को नियमित शिक्षक के रूप में नियुक्त करे तो कैसे करे. यही वजह है कि केन्द्र को किसी प्रकार की सलाह नहीं दे पायी.
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झारखंड पारा-शिक्षक-jharkhand para teacher
शिक्षा विभाग की बड़ी चिंता ये है कि यदि वह 70 हजार पारा शिक्षकों को हटाती है उसे एक बड़े आंदोलन से दो चार होना पड़ेगा


पारा शिक्षकों की नाराजगी नहीं चाहती सरकार

शिक्षा विभाग के रवैये पर विभिन्न शिक्षक संगठन नाराज है. संगठनों का कहना है कि शिक्षा विभाग को आगे आकर अपना कद दिखाना चाहिए था. ना सिर्फ पारा शिक्षक बल्कि राज्य में बड़ी संख्या में स्थापना अनुमति प्राप्त शिक्षक हैं, उनके बारे में भी फैसला करना चाहिए था. राज्य में 70 हजार पारा शिक्षक कार्यरत हैं. नई शिक्षा नीति को लेकर केन्द्र, राज्य सरकार से स्पष्ट मंत्व्य का इंतजार कर रहा है. लेकिन लगता है कि अभी इंतजार लंबा खिचेगा. इसके पीछे ये भी माना जा रहा है कि सरकार आगामी चुनाव को देखते हुए पारा शिक्षिकों को नाराजगी का खतरा मोल लेना नहीं चाह रही है.

सवाल ये नहीं है कि राज्य सरकार केन्द्र को नई शिक्षानीति के तहत केन्द्र को कोई सलाह नहीं दे पायी. सवाल तो ये उठता है कि अगर केन्द्र नई शिक्षा नीति को लागू करती है तब राज्य सरकार को दोतरफा हाथ मलना पड़ सकता है. एक तो पारा शिक्षकों का आक्रोश और दूसरी स्कूलों में शिक्षकों की कमी. देखना होगा कि शिक्षा विभाग कौन सा रास्ता अख्तियार करता है.

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First published: August 6, 2019, 11:54 AM IST
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