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लोकसभा चुनाव के नतीजों से तनाव में आए लालू, छोड़ा दोपहर का खाना

फाइल फोटो
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लालू प्रसाद यादव बीते तीन दिनों से न तो सो पा रहे हैं और न ही दोपहर का खाना खा रहे हैं. ऐसे में उनका दैनिक कार्य देखकर डॉक्टरों की भी परेशानी बढ़ गई है.

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झारखंड की राजधानी रांची में रिम्स के पेइंग वार्ड में भर्ती आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद की दिनचर्या बिगड़ गई है. बता दें कि तीन दिनों से लालू न तो सो पा रहे हैं और न ही दोपहर का खाना खा रहे हैं. ऐसे में उनका दैनिक कार्य देखकर डॉक्टरों की भी परेशानी बढ़ गई है.

वहीं इस संबंध में लालू प्रसाद का इलाज कर रहे प्रोफेसर डॉ. उमेश प्रसाद ने बताया कि लालू सुबह में नाश्ता तो किसी तरह कर लेते हैं, लेकिन दोपहर का खाना नहीं खा रहे हैं. इस तरह वे सुबह में नाश्ता करने के बाद सीधा रात को खाना खाते हैं, जिसके कारण उन्हें इंसुलिन देने में परेशानी हो रही है. डॉक्टर ने बताया कि तनाव के कारण उनकी यह स्थिति बनी है.

डॉक्टर के समझाने पर भी नहीं माने लालू
इस क्रम में बीते शनिवार को डॉ. उमेश प्रसाद ने लालू को काफी समझाया. उनसे कहा कि उनकी सेहत ठीक नहीं है, इसलिए समय से खाना और दवा लेना काफी जरूरी है. अगर समय से खाना नहीं खाएंगे तो दवा देने में मुश्किल होगी. इससे उनकी सेहत पर बुरा असर होगा. डॉ. प्रसाद ने बताया कि शनिवार को लालू का ब्लड प्रेशर और शुगर ठीक था, लेकिन उनकी दिनचर्या में सुधार नहीं हुआ तो फिर आगे कुछ कहा नहीं जा सकता है.
आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम वाले दिन लालू प्रसाद सुबह 8 बजे से ही टीवी खोलकर देख रहे थे. इस दौरान जैसे-जैसे चुनाव परिणाम आने शुरू हुए उनकी उदासी बढ़ती चली गई. इसके बाद दोपहर करीब 1 बजे वे टीवी बंद करने के बाद सो गए.



लालू की ऑटोबायोग्राफी ‘गोपालगंज टू रायसीना’
मिली जानकारी के मुताबिक, रिम्स के पेइंग वार्ड में बीते शनिवार को राजद प्रदेश अध्यक्ष अभय सिंह, पीरपैंती, बिहार के राजद विधायक रामविलास यादव और लालू प्रसाद की जीवनी लिखने वाले नलिन वर्मा ने लालू प्रसाद से मुलाकात की. लालू प्रसद से मुलाकात के बाद अभय सिंह ने कहा कि लालू प्रसाद ठीक से सो नहीं पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हमलोग उनकी अच्छी सेहत की कामना कर रहे हैं.

वहीं लालू प्रसाद के साथ मिलकर किताब लिखने वाले नलिन वर्मा ने कहा कि उन्होंने लालू प्रसाद की ऑटोबायोग्राफी ‘गोपालगंज टू रायसीना’ उन्हें सौंपी है. ऑटोबायोग्राफी में उनके 50 साल के राजनीतिक जीवन को दर्शाया गया है. इसमें लालू प्रसाद ने अपनी उपलब्धि के साथ-साथ कमियों को भी बताया है.

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