झारखंड में अपने ही नेताओं को नहीं समझ पाए लालू! जिसे सौंपी पार्टी, वही बना दलबदलू

लालू को छोड़ कर आज उनके पूर्व अध्यक्षों में से कोई भाजपा में है तो कोई झामुमो में. किसी ने खुद की पार्टी बना ली है.

News18 Jharkhand
Updated: July 13, 2019, 6:35 AM IST
झारखंड में अपने ही नेताओं को नहीं समझ पाए लालू! जिसे सौंपी पार्टी, वही बना दलबदलू
लालू प्रसाद शायद झारखंड के नेताओं की तासीर और उनकी महत्वाकांक्षा कर परख पाने में अभी तक विफल रहे हैं.
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Updated: July 13, 2019, 6:35 AM IST
अकलूराम महतो, योगेन्द्र बैठा, बालदेव हाजरा, गिरिनाथ सिंह, अन्नपूर्णा देवी और गौतमसागर राणा...क्या आप जानते हैं कि झारखंड के इन नेताओं में क्या समानता है.नहीं, तो हम बता देते हैं ये सभी झारखंड राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में दूसरे दलों की शोभा बढ़ा रहे हैं.

भारत की राजनीति में खास स्थान रखने वाले लालू प्रसाद के बारे में कहा जाता है कि उनकी राजनीतिक समझ इतनी है कि वह सामने वाले के दिल की बात भी बखूबी जान जाते हैं पर झारखंड को लेकर उनकी राजनीतिक समझ हमेशा मात खाती रही है. इसका कारण ये है कि झारखंड गठन के बाद से लालू प्रसाद ने राज्य राजद का जिन्हें भी प्रदेश अध्यक्ष बनाया उन सभी ने राजद को बाय-बाय कर दूसरे दलों का दामन थाम लिया.



लालू प्रसाद शायद झारखंड के नेताओं की तासीर और उनकी महत्वाकांक्षा कर परख पाने में अभी तक विफल रहे हैं. यही कारण है कि झारखंड बनने के बाद राजद के पहले अध्यक्ष अकलू राम महतो से लेकर गौतमसागर राणा तक जितने भी अध्यक्ष बने या लालू प्रसाद ने जिसे प्रदेश की कमान सौंपी, सभी ने राजद का दामन छोड़ दिया. इसमें से कई ऐसे नाम भी हैं जिसके राजद छोड़ने की कल्पना न लालू प्रसाद ने की थी और न ही राजद के कार्यकर्ताओं ने.

राजद के पहले अध्यक्ष अकलू राम महतो,योगेन्द्र बैठा, बालदेव हाजरा, गौतमसागर राणा, गिरिनाथ सिंह,अन्नपूर्णा देवी नाम पर लालू प्रसाद ने भरोसा कर उन्हें प्रदेश की कमान सौंपी पर किसी ने दल के साथ निष्ठा नहीं निभाई. तो सवाल है कि क्या लालू प्रसाद झारखंड की राजनीति और यहां के नेताओं के महत्वाकांक्षी स्वाभाव को समझने में चूक करते रहे हैं.

हालांकि राजद के कद्दावर नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहते हैं कि हमारे पास से जो नेता जाते हैं वह फिर वापस आ जाते हैं. वहीं वर्तमान अध्यक्ष अभय कुमार सिंह कहते है कि कोई इधर से उधर जाए, उसका असर पार्टी की सेहत पर नहीं पड़ता है.

गिरिनाथ सिंह और अन्नापूर्णा देवी


क्या कहते हैं गौतम सागर राणा
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कभी लालू प्रसाद के बेहद करीबी रहे और तीन बार राजद के प्रदेश अध्यक्ष रहे गौतम सागर राणा ने अपनी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल लोकतांत्रिक बना ली है. वो कहते हैं हर पार्टी एक सिस्टम से चलती है पर राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सिस्टम पर पार्टी को चलने ही देना नहीं चाहते. यही वजह है कि जब कोई नेता झारखंड राजद का प्रदेश अध्यक्ष बनता है तो उसे इसका अहसास होता है और वह पार्टी को बाय-बाय करना ही बेहतर समझता है.

उबड़-खाबड़ रास्ते को समझ नहीं पाते लालू -झामुमो
लालू को छोड़ कर आज उनके पूर्व अध्यक्षों में से कोई भाजपा में है तो कोई झामुमो में. किसी ने खुद की पार्टी बना ली है. ऐसे में झारखंड में राजद के सहयोगी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता कहते हैं कि बिहार के सपाट मैदानी इलाकों में राजनीति करने वाले लालू शायद झारखंड की पथरीली जमीन की राजनीति को समझ नहीं पाते.

( रांची से उपेंद्र कुमार )
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