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एक हार से खत्म नहीं होती जिंदगी', कोच पूर्णिमा महतो के इस मंत्र ने पेरिस वर्ल्ड कप में दिलाया गोल्ड

तीरंदाज दीपिका कुमारी ने पेरिस तीरंदाजी विश्वकप में गोल्ड पर निशाना साधा है. (Deepika Kumari/Instagram)

दीपिका कुमारी ने जहां तीन गोल्ड जीते. वहीं, महिला रिकर्व टीम में शामिल अंकिता भगत और कोमोलिका बारी ने भी स्वर्ण जीता.

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रांची. पेरिस तीरंदाजी विश्वकप में गोल्डन निशाना साधने के बाद झारखंड की तीरंदाज दीपिका कुमारी (Deepika Kumari) की चर्चा चारों तरफ है. शुभकामना और आशीर्वाद के इस दौर में टोक्यो ओलंपिक के लिए गोल्डन उम्मीदें भी अब ज्यादा मजबूत हो गई हैं. पेरिस तीरंदाजी वर्ल्ड कप स्टेज थ्री में दीपिका कुमारी, कोमोलिका बारी और अंकिता भगत का प्रदर्शन शानदार रहा. दीपिका कुमारी ने जहां तीन गोल्ड जीते. वहीं, महिला रिकर्व टीम में शामिल अंकिता भगत और कोमोलिका बारी ने भी स्वर्ण जीता.

भारतीय तीरंदाजी टीम की कोच पूर्णिमा महतो ने बताया कि पेरिस वर्ल्ड कप तीरंदाजी में सफर इतना आसान नहीं था. ओलंपिक क्वॉलिफायर में महिला रिकर्व टीम के बाहर हो जाने पर अंकिता भगत और कोमोलिका बारी का हौसला टूटने लगा था. लेकिन उन्होंने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि एक गेम से जिंदगी खत्म नहीं होती. जिसके बाद दोनों खिलाड़ियों ने पेरिस वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिला रिकर्व टीम के लिए गोल्ड जीता. कोच पूर्णिमा महतो ने कहा कि सफलता का यह सफर आगे भी जारी रहेगा.

पेरिस तीरंदाजी वर्ल्ड कप में दीपिका जब गोल्डन निशाना साध रही थी, तब उस समय दीपिका के परिवार और झारखंड समेत देशभर की सांसें भी अटकी हुई थी. रांची के रातू चट्टी मैं रहने वाले दीपिका के माता पिता को पूरा भरोसा था कि पेरिस से उनकी बेटी गोल्ड मेडल लेकर जरूर लौटेगी. लेकिन बेटी के तीन तीन गोल्ड मेडल के साथ दमाद के स्वर्ण पदक ने भी परिवार को बेहद खुशी दी है. मुफलिसी से जिंदगी शुरू करने वाली गीता देवी ने बताया कि दीपिका जब से उनकी जिंदगी में आई. परिवार के बदलाव के दिन तभी से ही शुरू हो गए थे.



दीपिका की मां गीता देवी ने बताया कि बचपन से ही दीपिका बड़े सपने देखा करते थी.. और एक कामकाजी महिला होने के नाते उन्होंने भी अपनी बेटी को बचपन से ही स्वाभिमान के साथ आत्मनिर्भर होना सिखाया.

उन्होंने बताया कि पूरा घर दीपिका के जीते हुए मेडल, कप और सरकार की ओर से दिए गए सम्मान से भरा पड़ा है. उन्होंने कहा कि दीवार पर टंगा राष्ट्रपति की ओर से दिये गये पदमश्री के साथ-साथ अब ओलंपिक के लिए बगल में जगह खाली है. गीता देवी ने कहा कि मां का आशीर्वाद बेटी के साथ है .. और टोक्यो ओलंपिक से इस बार तीरंदाजी में दीपिका स्वर्ण पदक लेकर जरूर लौटेगी

दीपिका के पिता शिवनारायण प्रजापति आज भी ऑटो चलाते हैं. घर पर रहने के दौरान उनका ज्यादा वक्त बेटी की शादी की तस्वीरें को निहारने में ही गुजरता है. उन्होंने बताया कि बचपन में जब बेटी को तीरंदाजी प्रशिक्षण के लिए भेजा..तब समाज ने उन्हें ऐसा करने से रोका था और बेटी होने का हवाला देकर दीपिका को घर में ही रखने की बात कही थी. लेकिन उन्होंने तब अपने दिल की सुनी और आज दीपिका सफलता की इस मुकाम पर उनकी सोच को सार्थक कर रही है. हालांकि शिवनारायण दीपिका और अतनु की शादी के पक्ष में नहीं थे. क्योंकि अतनु उनकी जाति से ताल्लुक नहीं रखते थे. लेकिन बेटी के समझाने पर उन्होंने इस रिश्ते को भी खुशी-खुशी स्वीकार किया.



हालांकि दीपिका की मां गीता देवी को आज ही इस बात का मलाल है कि राज्य सरकार ने बेटी की सफलता के अनुसार उनकी कोई खास मदद नहीं की. उन्होंने कहा कि दीपिका सिर्फ उनकी नहीं बल्कि झारखंड की भी बेटी है. ऐसे में हरमू में अर्जुन मुंडा की ओर से दी गई जमीन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अगर घर बना कर दीपिका को गिफ्ट करें तो यह दीपिका के लिए एक बेहतर सम्मान होगा.
दरअसल दीपिका टोक्यो ओलंपिक के बाद ही अब रांची अपने घर लौटेगी और माता-पिता से मिलेगी. क्योंकि पेरिस से लौटने के बाद दीपिका अपने पति अतनु दास के साथ इस समय पुणे में हैं और वहां दोनों प्रशिक्षण में जुटे हैं.

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