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झारखंड को लेकर यूनिसेफ की चौंकाने वाली रिपोर्ट! 95 कुपोषण उपचार केन्द्र के बावजूद 43% बच्चे हैं कुपोषित

सरकार के द्वारा रोजाना 100 रुपये देने के बावजूद मांएं बच्चों को लेकर एमटीसी सेंटर नहीं पहुंचती हैं.

सरकार के द्वारा रोजाना 100 रुपये देने के बावजूद मांएं बच्चों को लेकर एमटीसी सेंटर नहीं पहुंचती हैं.

Malnutrition in Jharkhand: यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड में 43 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं. वहीं करीब 55 प्रतिशत महिलाएं एनेमिक हैं. कुपोषित बच्चों में से 29-30 प्रतिशत बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित हैं.

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रांची. प्राकृतिक संसाधनों में धनी राज्य झारखंड, कुपोषण (Malnutrition) के मकड़जाल में फंसा है. यूनिसेफ (UNICEF) की कुपोषण को लेकर झारखंड की रिपोर्ट चौंकाने वाली ही नहीं, बल्कि परेशान करने वाली भी है. किसी भी देश और राज्य का भविष्य कहे जाने वाले बच्चे ही जब कुपोषण का शिकार हो जाएं तो फिर भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है.

43% बच्चे कम वजन वाले

झारखंड में 43 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं तो करीब 55 प्रतिशत महिलाएं एनेमिक हैं. कुपोषण में भी 29-30 प्रतिशत बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित हैं. और उन्हें तत्काल MTC में भर्ती कराने की जरूरत है. रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में कुपोषण के चलते जहां बच्चे नाटे हो रहे हैं, वहीं उनका वजन भी नहीं बढ़ रहा है.



अपनी डेढ़ साल की बच्ची को गोद में लेकर रांची सदर अस्पताल पहुंची हिंदपीढ़ी की आशिया परवीन बेटी की हर रोज कम होते वजन से चिंतित हैं. आशिया और उसकी मां बताती हैं कि जन्म के समय उसकी बेटी शायरा ढाई किलो के करीब थी, पर महीना दर महीना उसका वजन बढ़ने के बजाए घटते चला गया. अब वह डेढ-दो किलो की हो गई है. खूद का दूध नहीं होता इसलिए आशिया बच्ची को गाय का दूध देती है. पति रांची नगर निगम में सफाईकर्मी है. आशिया बताती हैं कि वह 18 साल की उम्र में ही मां बन गयी थी.
आशिया अकेली नहीं है जिसके बच्चे का वजन और कद उम्र के साथ समानुपातिक ढंग से नहीं बढ़ रहा हो. यूनिसेफ की रिपोर्ट बताती है कि झारखंड में जहां 43 प्रतिशत बच्चे उम्र के हिसाब से कम वजन के हैं तो 29 प्रतिशत बच्चे गंभीर तरह के कुपोषण के शिकार हैं, जिसकी वजह से वह नाटे रह गए और उनका वजन नहीं बढ़ा.

रांची सदर अस्पताल की पोषण विशेषज्ञ कुमारी ममता कहती हैं कि लड़कियों की कम उम्र में शादी, मां बन जाना और साथ ही साथ जन्म के छह महीने बाद पर्याप्त मात्रा में आहार नहीं मिलना, ये कारण हैं जिसके चलते हमारी अगली पीढ़ी कुपोषित हो रही हैं.

झारखंड में कुपोषण की भयावहता से निपटने के लिए राज्य सरकार ने राज्यभर में 95 कुपोषण उपचार केन्द्र खोल रखा है, जहां कुपोषित बच्चों को रख कर उसे पोषणयुक्त भोजन और इलाज देकर स्वस्थ किया जाता है. इस योजना में खास बात यह है कि चूंकि छोटे-छोटे कुपोषित बच्चे का इलाज एमटीसी में किया जाता है, इसलिए उनके परिवार की आय बाधित न हो इसलिए 100 रुपये हर दिन बच्चों की मां को दिया जाता है. सरकार की इस व्यवस्था के बावजूद ज्यादातर एमटीसी सेंटर में बेड खाली ही रहते हैं.

न्यूज-18 की टीम जब राजधानी रांची के डोरंडा एमटीसी सेंटर गयी, तो वहां 15 बेड वाले एमटीसी सेंटर में महज तीन बच्चे मिले, जिनका इलाज हो रहा था. केन्द्र की संचालिका सुगंधित कुजूर ने कहा कि शहरी क्षेत्र में महिलाएं कामकाजी होती हैं, इसलिए वह 100 रुपये प्रति दिन मिलने के बावजूद कम ही एमटीसी पहुंचती हैं.

रांची सदर अस्पताल के पूर्व उपाधीक्षक डॉ एके झा कुपोषण को दूर करने के लिए सरकारी योजना को बेहतर मानते हुए कहते हैं कि जबतक लोगों को जागरुक और बच्चों को एमटीसी ले जाने के प्रति जागरुक नहीं किया जाएगा तब तक कुपोषण के खिलाफ जंग अधूरी रहेगी.

कुपोषण का संबंध गरीबी, माताओं के खराब स्वास्थ के साथ-साथ बच्चों को समय से मिलने वाले पोषणयुक्त आहार से है. जरूरी है कि सरकार सिर्फ एमटीसी के भरोसे न रहे, बल्कि कुपोषण को जड़ समाप्त करने की योजना बनाए.
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