शाबाश आमिर हुसैन! दोनों हाथ नहीं हैं लेकिन फिर भी करते हैं आक्रामक बल्लेबाजी
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शाबाश आमिर हुसैन! दोनों हाथ नहीं हैं लेकिन फिर भी करते हैं आक्रामक बल्लेबाजी
दिव्यांग क्रिकेटर आमिर हुसैन

आमिर के मुताबिक जब वह छह-सात साल का था तो उसका जैकेट आरा मशीन में फंस गया और उसके दोनों हाथ काटने पड़े

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दोनों हाथ नहीं हैं, फिर भी न सिर्फ आक्रामक बल्लेबाजी करते हैं, बल्कि पैरों से गेंदबाजी कर बैट्समैन के छक्के छुड़ा देते हैं जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग के आमिर हुसैन. 26 साल के आमिर की इन्हीं खूबियों की बदौलत उनका भारतीय पैरा क्रिकेट टीम में चयन हुआ है. वह पैरा टी-20 सीरीज में बांग्लादेश के खिलाफ भारत के लिए खेलेंगे. बांग्लादेश सीरीज से पहले रांची के एक स्कूल में पैरा क्रिकेट टीम का कैंप लगा, जिसमें जब लोगों ने आमिर को गर्दन में बैट फंसाकर बल्लेबाजी और पैरों से गेंदबाजी करते देखा, तो सभी दंग रह गए.

आमिर हुसैन के क्रिकेटर बनने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है. आमिर के मुताबिक जब वह छह-सात साल का था तो उसका जैकेट आरा मशीन में फंस गया और उसके दोनों हाथ काटने पड़े. जिंदगी असहाय लगने लगी. इसी बीच उसे क्रिकेट खेलने का शौक चढ़ा और बेलचा को बैट बनाकर दादी से बॉल फिंकवाता था.

बतौर आमिर उसके खेल को देखकर गांव के ही एक शख्स ने उसे दिव्यांग टीम में शामिल कर लिया. यहीं से उसके क्रिकेट का सफर शुरू हुआ. कुछ साल बाद वह जम्मू-कश्मीर दिव्यांग टीम का कप्तान बन गया. इसी दौरान भारतीय पैरा फेडरेशन ने संपर्क साधा और वह दिल्ली आ गया. दिल्ली के साथ ही पंजाब, हरियाणा और लखनऊ में भी खेला. उसके परफॉर्मेंस को देखकर भारतीय पैरा टीम में उसका सेलेक्शन हुआ और अब वह बांग्लादेश के खिलाफ भारत के लिए खेलने को तैयार है.



आमिर के माने तो यह सफलता उसके जीवन की सबसे बड़ी सफलता है कि वह देश के लिए खेल रहा है. आमिर के मुताबिक नेताओं के कारण जम्मू-कश्मीर के हालात बिगड़े हैं. जब नौजवानों को रोजगार नहीं मिलेगा, तो वे गलत रास्ते पर ही जाएंगे. अगर कश्मीर में रोजगार मिलने लगे तो अमन-चैन खुद-व-खुद आ जाएगा. तमाम परेशानी के बावजूद अामिर ने 9 क्लास तक पढ़ाई की.
 
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