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मिशनरीज ऑफ चैरिटी से बच्चे बेचे जाने के मामले में एक और बच्ची बरामद

मिशनरीज ऑफ चैरिटी से बच्चे बेचे जाने के मामले में एक और बच्ची बरामद

मिशनरी ऑफ चैरिटी से बच्चों के बेचे जाने के मामले में मामले पर सोशल एक्टिविस्ट की मानें तो ये खेल कई सालों से चलता आ रहा है.

    रांची के मिशनरी ऑफ चैरिटी होम से बच्चों के बेचे जाने के मामले में पुलिस ने रांची के कोकर इलाके से एक और बच्ची को बरामद कर लिया है. पुलिस ने बच्ची को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) को सौंप दिया है.

    इस मामले में चैरिटी के एक सिस्टर और स्टॉफ को गिरफ्तार किया गया था. दोनों ने पुलिस के सामने 4 बच्चों को बेचने की बात कबूली थी. इसी आधार पर पुलिस छापेमारी में अब तक 3 बच्चों को अलग-अलग ठिकानों से बरामद कर चुकी है. वहीं, एक बच्चे को खोजने की तलाश जारी है.

    एडीजी आर के मलिक ने बताया की पूरे मामले में जांच जारी है. सीआईडी जांच कर रही है. डीजीपी ने राज्य सरकार को पत्र लिख कर पूरे मामले की सीबीआई जांच की अनुशंसा की है. फिलहाल इस मामले में 14 से 15 संस्थाओं की जांच राज्य बाल संरक्षण आयोग और सीडब्ल्यूसी करेगी और जो भी इस दायरे में आएंगे उस पर कार्रवाई होगी.

    फिलहाल इस मामले में नई बात ये सामने आई है कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी के जो रजिस्टर को सीज हुए हैं, उनमें 2016 से अब तक के 121 महिलाओं के रिकार्ड हैं जिसमें से 24 का कोई पता नहीं चला है.

    इस पूरे मामले पर सोशल एक्टिविस्ट की मानें तो ये खेल कई सालों से मिशनरी में चलता आ रहा है. इससे पहले भी ऐसी शिकायत 2014 में आई थी. बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के चेयरपर्सन ओम प्रकाश ने शिकायत आने पर मामले को उठाया भी था पर मिशनरी के आगे ये मामला दब गया था.

    सामाजिक कार्यकर्ता और सीडब्ल्यूसी सदस्य बैधनाथ ने दावा किया है कि मिशनरी से 4 बच्चे नहीं बल्कि बहुत से बच्चे अलग-अलग राज्यों में गए हैं. उन्होंने इसमें सीडब्लूसी के लोगों के भी शामिल होने की बात कही है.

    मिशिनरीज ऑफ चैरिटी के निर्मल हृदय से मासूम बच्चों के सौदेबाजी मामले की जांच सीबीआई से कराने को लेकर राज्य पुलिस के मुखिया ने गृह सचिव को पत्र लिखा है. डीजीपी ने अपने पत्र में कहा है कि यह एक गंभीर मामला है और इस संस्था से जुड़े तमाम संस्थानों की जांच सीबीआई से करवाई जाए और जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती है तब तक संस्था के बैंक खाता को फ्रीज कर दिया जाए. डीजीपी ने लिखा है कि वर्ष 2006 से लेकर 2011 तक इन संस्थानों को द फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट के तहत 927.27 करोड़ रुपए मिले हैं लेकिन इसके खर्च का सही हिसाब नहीं मिल रहा. (अमिता की रिपोर्ट)

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    Tags: Jharkhand news

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