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दल बदला, लेकिन जनता का दिल नहीं बदल पाए, ज्यादातर दलबदलू हारे
Ranchi News in Hindi

Naween Jha | News18 Jharkhand
Updated: December 24, 2019, 1:15 PM IST
दल बदला, लेकिन जनता का दिल नहीं बदल पाए, ज्यादातर दलबदलू हारे
झारखंड चुनाव के दौरान दलबदल कर बीजेपी में शामिल होने वाले ज्यादातर नेता हारे (फाइल फोटो)

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे सुखदेव भगत (Sukhdev Bhagat) और प्रदीप बलमुचू (Pradeep Balmuchu) को भी हार का सामना करना पड़ा. पूर्व प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष ताला मरांडी भी चुनाव हार गये. विधानसभा में बीजेपी के सचेतक रहे राधाकृष्ण किशोर को भी हार का सामना करना पड़ा.

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रांची. झारखंड विधानसभा चुनाव में जनता ने दलबदलुओं को पूरी तरह से नकार दिया. पूर्व मंत्री भानुप्रताप शाही को छोड़कर अन्य सभी ऐसे नेता चुनाव हार गये. इनमें से कई सीटिंग विधायक थे. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे सुखदेव भगत (Sukhdev Bhagat) और प्रदीप बलमुचू (Pradeep Balmuchu) को भी हार का सामना करना पड़ा. पूर्व प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष ताला मरांडी भी चुनाव हार गये. विधानसभा में बीजेपी के सचेतक रहे राधाकृष्ण किशोर को भी हार का सामना करना पड़ा. इन सभी ने टिकट के चलते चुनाव से ठीक पहले सियासी घर बदल लिया था.

राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखदेव भगत को लोहरदगा सीट पर हार का सामना करना पड़ा. चुनाव से ठीक पहले वे कांग्रेस का दामन छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गये थे. बीजेपी ने उन्हें लोहरदगा से मैदान में उतारा. लेकिन वे वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रामेश्वर उरांव से चुनाव हार गये. सुखदेव भगत लोहरदगा से सीटिंग विधायक भी थे. इसी तरह चुनाव से ठीक पहले जेएमएम को छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले कुणाल सारंगी भी बहरागोड़ा सीट से चुनाव हार गये. उन्हें जेएमएम के समीर मोहंती ने हराया. कुणाल बहरागोड़ा के सीटिंग विधायक थे. कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल होने वाले मनोज यादव को भी बरही की जनता ने चुनाव में सबक सिखाया. और हार का उपहार दिया. हालांकि दलबदलने के बावजूद पूर्व मंत्री भानु प्रताप शाही ने भवनाथपुर सीट पर अपनी साख बचा ली. बीजेपी के टिकट पर वे यहां से जीते. चुनाव से ठीक पहले उन्होंने भी बीजेपी का दामन थामा था.

पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू जिस आस से कांग्रेस छोड़कर आजसू में शामिल हुए, वो पूरी नहीं हुई. टिकट के चलते उन्होंने आजसू का दामन थामा. लेकिन घाटशिला की जनता ने उन्हें नकार दिया. टिकट के लिए बीजेपी छोड़कर आजसू में जाने वाले राधाकृष्ण किशोर को भी छतरपुर सीट पर हार का सामना करना पड़ा. पूर्व प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष ताला मरांडी को भी पाला बदलना काम ना आया. बीजेपी छोड़कर जेएमएम में चले गये, लेकिन बोरियो की जनता को पाले में करने में नकाम रहे. और चुनाव हार गये. इसी तरह फूलचंद मंडल बीजेपी छोड़कर जेएमएम में शामिल हो गये थे. जेएमएम ने उन्हें सिंदरी से उम्मीदवार बनाया, लेकिन वे जीत नहीं पाए. फूलचंद यहां के सीटिंग विधायक थे. टिकट के लिए जेएमएम छोड़कर जेवीएम जाने वाले शशिभूषण सामड को भी हार का सामना करना पड़ा. वे चक्रधरपुर से सीटिंग विधायक थे.

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First published: December 24, 2019, 1:09 PM IST
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