रांची में धोनी का कड़कनाथ मुर्गा सुर्खियों में, जानें क्या है माही की आगे की प्लानिंग

धोनी के इजा फार्म हाउस में फिलहाल 200 की संख्या में कड़कनाथ मुर्गे और मुर्गियां हैं.

धोनी के इजा फार्म हाउस में फिलहाल 200 की संख्या में कड़कनाथ मुर्गे और मुर्गियां हैं.

धोनी के फार्म हाउस की ओर से झाबुआ में दो हजार कड़कनाथ और ग्रामप्रिया प्रजाति के मुर्गों और मुर्गियों का ऑर्डर दिया गया है. अप्रैल के आखिरी तक फार्म हाउस पहुंच जाएंगे. इन चूजों को रखने के लिए इजा फार्म हाउस में एक बड़ा पॉल्ट्री फॉर्म बनाया जा रहा है.

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रांची. राजधानी रांची में धोनी का कड़कनाथ मुर्गा इन दिनों सुर्खियों में है. धोनी के फैंस और नॉनवेज के शौकीनों के बीच माही के फार्म हाउस के कड़कनाथ मुर्गों और मुर्गियों की चर्चा आम हो चली है. कोई कह रहा है कि धोनी के फार्म हाउस में इन दिनों हजारों की संख्या में कड़कनाथ पाले गए हैं. कोई कह रहा है कि धोनी को मुर्गों में कड़कनाथ ही पसंद है और वह इसी पर फोकस करेंगे. न्यूज 18 ने कड़कनाथ को लेकर अचानक शुरू हुई इस गॉसिप को लेकर धोनी के फार्म हाउस तक पड़ताल की. धोनी के इजा फार्म हाउस स्थित पॉल्ट्री फार्म पहुंचने पर पता चला कि फिलहाल वहां 200 की संख्या में कड़कनाथ मुर्गे और मुर्गियां है. मुर्गे की बिक्री मांस के लिए और मुर्गियों को अंडे के लिए पाला जा रहा है.

पॉल्ट्री फॉर्म हाउस के वेटनरी डॉ. विश्वरंजन ने बताया कि करीब छह माह पहले मध्य प्रदेश के झाबुआ से टेस्टिंग के तौर पर करीब 200 चूजे मुर्गों और मुर्गियों के लाए गए थे. सरवाइवल को लेकर शुरुआत में संदेह था कि वे रांची के वातावरण में एडजस्ट कर पाते हैं या नहीं. समय के साथ साफ सफाई, चूजों के खान-पान और विशेष एहतियात का ध्यान रखा गया. छह माह बाद सभी 200 चूजे एक से डेढ़ किलो के बीच के हो गए हैं. अब बिक्री के लिए बाजारों

में भेजा जा रहा है.

डॉ. विश्वरंजन ने बताया कि झाबुआ में दो हजार कड़कनाथ और ग्रामप्रिया प्रजाति के मुर्गों और मुर्गियों का ऑर्डर दिया गया है. अप्रैल के आखिरी तक धोनी के फार्म हाउस पहुंच जाएंगे. इन चूजों को रखने के लिए इजा फार्म हाउस में एक बड़ा पॉल्ट्री फॉर्म बनाया जा रहा है. सभी स्टाफ को ट्रेनिंग दी जा रही है. साथ ही वेटनरी डॉक्टर की भी तैनाती की गई है.
पूरी तरह काले कड़कनाथ मुर्गों की पहचान बताते हुए उन्होंने कहा कि मुर्गों का कॉम्ब (कलगी) लंबी होती है. साथ ही इनकी पूंछ भी काफी लंबी होती है. मुर्गियों का कॉम्ब थोड़ा छोटा होता है. मुर्गों का स्वाद मुर्गियों की तुलना में थोड़ा ज्यादा बेहतर होता है. मुर्गों के मांस में मुर्गियों की तुलना में फैट भी कम होता है. कड़कनाथ अपने अपने ग्रुप बनाकर रहना पसंद करते हैं और उस ग्रुप में दूसरे मुर्गों को इंट्री नहीं दी जाती.

पॉल्ट्री फार्म की देखभाल करने वाले निर्मल ने बताया कि कड़कनाथ का पालन दूसरे मुर्गे और मुर्गियों से थोड़ा अलग होता है. इनकी साफ सफाई, खान-पान और वातावरण का विशेष ध्यान रखना होता है. कड़कनाथ मुर्गों को दाने के अलावा पत्तियों, साग, घास और ब्रोकली खाना बेहद पसंद है. बहरहाल धोनी की टीम झाबुआ से अप्रैल के आखिरी में आने वाली दो हजार चूजों के खेप का बेसब्री से इंतजार कर रही है.
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