MS Dhoni Retirement: महेंद्र सिंह धोनी ऐसे बने गोलकीपर से महान क्रिकेटर

महेंद्र सिंह धोनी ने रांची के जवाहर विद्यालय मंदिर, श्यामली से स्कूली पढ़ाई की. इसी स्कूल में सबसे पहले उन्होंने क्रिकेट का बल्ला पकड़ा. यह साल 1992 की बात है.

News18 Jharkhand
Updated: July 3, 2019, 6:07 PM IST
MS Dhoni Retirement: महेंद्र सिंह धोनी ऐसे बने गोलकीपर से महान क्रिकेटर
धोनी ने रांची के जवाहर विद्यालय मंदिर, श्यामली से स्कूली पढ़ाई की. इसी स्कूल में सबसे पहले उन्होंने क्रिकेट का बल्ला पकड़ा. यह साल 1992 की बात है.
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Updated: July 3, 2019, 6:07 PM IST
आखिरकार 15 साल के उम्दा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कॅरियर का अंत नजदीक आ गया है. पूर्व क्रिकेट कप्तान और रांची के राजकुमार महेन्द्र सिंह धोनी क्रिकेट को जल्द अलविदा कहने वाले हैं. वर्तमान में चल रहे विश्व कप में टीम इंडिया का अंतिम मैच उनके करियर का अंतिम मैच हो सकता है. वैसे स्कूल टीम के गोलकीपर से भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान बनने तक का उनका सफर हमेशा यादगार रहेगा.

स्कूल में पहली बार पकड़ा बल्ला 

महेन्द्र सिंह धोनी का जन्म झारखंड के रांची में हुआ. उन्होंने रांची के जवाहर विद्यालय मंदिर, श्यामली से स्कूली पढ़ाई की. इसी स्कूल में सबसे पहले धोनी ने क्रिकेट का बल्ला पकड़ा. साल 1992 की बात है. तब धोनी छठी क्लास में पढ़ते थे. स्कूल की क्रिकेट टीम को एक विकेट कीपर की जरूरत पड़ी. उस समय धोनी स्कूल की फुटबॉल टीम के गोलकीपर हुआ करते थे. संयोग ऐसा बना कि उन्हें गोलकीपर से विकेटकीपर बना दिया गया. स्कूल के बाद धोनी जिलास्तरीय कमांडो क्रिकेट क्लब की ओर से खेलने लगे. फिर सेंट्रल कोल फील्ड लिमिटेड की टीम से क्रिकेट खेला.

क्रिकेट के लिए छोड़ दी रेलवे की नौकरी 

18 साल की उम्र में धोनी ने पहली बार रणजी मैच खेला. वह उस समय बिहार रणजी टीम की तरफ से खेलते थे. इसी दौरान धोनी की नौकरी रेलवे में टिकट कलेक्टर के रूप में लगी. उनकी पहली पोस्टिंग पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में हुई. 2001 से 2003 तक धोनी खड़गपुर के स्टेडियम में क्रिकेट खेलते रहे. हालांकि धोनी को ये नौकरी रास नहीं आई. उनका इरादा तो कुछ और ही था. धोनी रेलवे की टीम के लिए खेलने लगे.

2004 में मिली टीम इंंडिया में जगह 

धोनी को 2003- 04 में जिंबाब्वे और केन्या दौरे के लिए भारतीय ‘ए’ टीम में चुना गया. इस दौरे पर उन्होंने विकेट कीपर के तौर पर 7 कैच और 4 स्टंपिंग की. बल्लेबाजी करते हुए धोनी ने 7 मैचों में 362 रन बनाए. धोनी के इस शानदार प्रदर्शन को देखते हुए तत्कालीन भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने उन्हें टीम में लेने की सलाह दी. 2004 में धोनी को पहली बार भारतीय टीम में जगह मिली. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. रोज नए कीर्तिमान गढ़ते चले गए.
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कप्तान के तौर पर जीता विश्व कप

सितंबर 2007 में धोनी पहली बार भारत की ट्वेंटी-20 टीम के कप्तान बने. फिर उसी साल वनडे टीम की भी कप्तानी मिली. साल 2008 में धोनी टेस्ट टीम के भी कप्तान बने. धोनी की कप्तानी में भारत ने 2007 में 20-20 विश्व कप, साल 2011 में वनडे विश्व कप का खिताब जीता. आईपीएल में उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स को साल 2010, 2011 और 2018 में खिताब दिलाया.

करियर के दौरान कई सम्मान मिले

अपने लंबे करियर में धोनी को कई सम्मान मिले. 2008 में आईसीसी प्लेयर ऑफ द ईयर अवॉर्ड, राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार और 2009 में भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री पुरस्कार उन्हें मिला. दुनिया के सबसे अमीर खिलाड़ियों की लिस्ट में फोर्ब्स पत्रिका ने उन्हें 16वें नंबर पर रखा. 2009, 2010 और 2013 में धोनी को आईसीसी के वर्ल्ड इलेवन में भी जगह मिली.

2014 में लिया टेस्ट मैच से संन्यास

30 दिसंबर 2014 को ऑस्ट्रेलिया के साथ ड्रॉ हुए तीसरे टेस्ट मैच के बाद धोनी ने टेस्ट मैच से संन्यास की घोषणा कर दी. धोनी ने 90 टेस्ट मैचों में 4,876 रन बनाए. 60 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी करते हुए उन्होंने 27 में जीत दिलाई. धोनी के नेतृत्व में विदेश में खेले गए 30 टेस्ट में भारतीय टीम को केवल छह जीतें मिलीं. 15 में उसे हार मिली. अब धोनी क्रिकेट को पूरी तरह अलविदा कहने वाले हैं.

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First published: July 3, 2019, 4:57 PM IST
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