कांवरियों के लिए वस्त्र तैयार कर रहीं मुस्लिम महिलाएं, भाईचारे का दे रहीं पैगाम
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कांवरियों के लिए वस्त्र तैयार कर रहीं मुस्लिम महिलाएं, भाईचारे का दे रहीं पैगाम
कांवरियों के लिए वस्त्र तैयार कर रही मुस्लिम महिलाएं, भाईचारे का दे रही पैगाम

रांची की मुस्लिम महिलाएं गेरुआ वस्त्र तैयार कर न सिर्फ अपनी आमदनी में इज़ाफा कर रही हैं बल्कि भाईचारे का पैग़ाम भी पेश कर रही हैं.

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राजधानी रांची में मुस्लिम महिलाएं भगवान शिव के श्रद्धालुओं के लिए गेरुआ वस्त्र की सिलाई करने में व्यस्त हैं. धार्मिक कार्य के लिए प्रयोग होने वाले वस्त्रों की सिलाई से यह महिलाएं बेहद प्रसन्न हैं.

सावन का महीना हिंदुओं के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. इस महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु गेरुआ वस्त्र धारण करके भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक करते हैं. इन श्रद्धालुओं के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं वस्त्र की सिलाई कर रही हैं. इनमें कई मुस्लिम महिलाएं भी शामिल हैं.

कारीगर साज़िया नसीम और गुलनाज़ परवीन कहती हैं कि इस वस्त्र को पहनकर कांवरियां जल चढ़ाते हैं और इसे सीलने का हमें मौका मिला है. इसे सीलकर हमें काफी अच्छा और खुशी महसूस होती है. वहीं टेलर ग़ुलाम मुस्तफा कहते हैं कि इस धार्मिक वस्त्र को सीलकर हमें काफी खुशी होती है. साथ ही कहा कि कांवरियों के लिए वस्त्र बनाने में काफी अच्छा लगता है और आनंद आता है.



गौरतलब है कि राज्य के दे‌वघर शहर में भगवान शिव की ऐतिहासिक मंदिर है, जहां सावन के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान भोले शंकर के ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक करते हैं. श्रद्धालुओं के आस्था के मद्देनज़र खादी बोर्ड ने पांच हज़ार वस्त्र की सिलाई का निर्णय लिया है.
रांची की मुस्लिम महिलाएं गेरुआ वस्त्र तैयार कर न सिर्फ अपनी आमदनी में इज़ाफा कर रही हैं बल्कि भाईचारे का पैग़ाम भी पेश कर रही हैं.

 
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