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हाय रे खेल विभाग! बूट फट न जाए इसलिए खाली पैर प्रैक्टिस करती है नेशनल फुटबॉलर

हाय रे खेल विभाग! बूट फट न जाए इसलिए खाली पैर प्रैक्टिस करती है नेशनल फुटबॉलर

रांची की सलोनी तिग्गा ने ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन समेत देश के सभी बड़े टूर्नामेंट में अपने खेल से लोगों का दिल जीता है. (सांकेतिक तस्वीर)

रांची की सलोनी तिग्गा ने ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन समेत देश के सभी बड़े टूर्नामेंट में अपने खेल से लोगों का दिल जीता है. (सांकेतिक तस्वीर)

Jharkhand News: रांची के मांडर की रहने वाली नेशनल फुटबॉल खिलाड़ी सलोनी तिग्गा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से गुहार लगाई है कि वो उसकी प्रतिभा और उपलब्धियों को देखते हुए सरकारी नौकरी दें, ताकि वह अपने खेल को आगे जारी रख सके.

रांची. हॉकी और तीरंदाजी की प्रतिभा की भीड़ के बीच झारखंड की एक फुटबॉलर बिटिया मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मदद के लिए आवाज दे रही है. राष्ट्रीय स्तर पर अपने टैलेंट से सबका दिल जीतने वाली फुटबॉलर सलोनी तिग्गा पिछले कुछ दिनों से किट और‌ दूसरे संसाधनों की कमी से जूझ रही है. देश के लिए खेलने की चाहत रखने वाली इस आदिवासी बेटी को जरूरत है तो सिर्फ और सिर्फ थोड़ी मदद की, जो उसका हक है.

हॉकी और तीरंदाजी की नर्सरी झारखंड में एक फुटबॉलर बिटिया की आवाज लगातार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कानों तक पहुंचने के लिए गूंज रही है. रांची के मांडर प्रखंड के ब्राम्बे गांव की रहने वाली नेशनल फुटबॉलर सलोनी तिग्गा बिना बूट के ही अपने अभ्यास में जुटी है. 23 साल की सलोनी ने देश के ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन समेत सभी बड़े टूर्नामेंटों में अपने खेल से लोगों का दिल जीता है. इतना ही नहीं देश के सबसे बड़े टूर्नामेंट यानी महिलाओं की संतोष ट्रॉफी कही जाने वाली सीनियर नेशनल वुमन चैंपियनशिप में भी उसका प्रदर्शन शानदार रहा. लेकिन झारखंड की इस फुटबॉलर बिटिया को राज्य सरकार के हॉस्टल और कोचिंग समेत खेल सुविधाओं को छोड़ना पड़ा.

दरअसल राज्य सरकार के खेल नियमों के अनुसार खिलाड़ियों को राज्य सरकार की ओर से होस्टल समेत तमाम सुविधाओं का लाभ 22 साल की उम्र तक ही मिलता है. ऐसे में प्रतिभाशाली सलोनी को हॉस्टल छोड़कर अब गांव में रहकर प्रैक्टिस करना उसकी मजबूरी बन गई है.

नेशनल फुटबॉलर सलोनी तिग्गा बताती है कि जब तक राज्य सरकार के हॉस्टल में थी तब तक उसे खाने-पीने के साथ-साथ खेल से संबंधित तमाम सुविधाएं मिल रही थी. लेकिन होस्टल छोड़ने के बाद खेल से उसकी दूरी बढ़ती जा रही है. उसने बताया कि उसके पास एक ही बूट है जिससे फटने के डर से वह संभाल कर रखती है. ‌

सलोनी तिग्गा का सफर
* ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन-2013
* सुब्रतो कप फुटबॉल टूर्नामेंट U 17 2014
* ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन 2015
* ऑल इंडिया इंटर साई रीजनल फुटबॉल टूर्नामेंट 2015
* ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन 2016
* ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी 2018
* ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी 2019
* ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी 2020
* सीनियर नेशनल विमेन चैंपियनशिप 2021 (संतोष ट्रॉफी)

घर चलाने के लिए पिता चलाते हैं रिक्शा

सलोनी के पिता एक रिक्शा चालक हैं और हर दिन उनके सामने 5 बच्चों की जरूरतों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती होती है. हाल यह है कि जिस नेशनल फुटबॉलर का ज्यादातर समय मैदान में प्रैक्टिस में गुजरता था. आज उसका समय घर की रसोई में भी बीत रहा है.

सलोनी के पिता छोटेलाल नाथ तिग्गा बताते हैं कि सलोनी सभी भाई बहनों में बड़ी है. वह बचपन से ही फुटबॉल खेल रही है. ऐसे में उसकी जरूरतों को पूरा करना उनके लिए हमेशा संभव नहीं हो पाता. सलोनी के पिता मौसमी खेती करते हैं साथ में खेती का काम बंद होने के बाद रिक्शा चलाकर परिवार का भरण पोषण करते हैं.

सीएम से नौकरी की गुहार

अब सलोनी और उसके पिता ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से गुहार लगाई है कि वह उसकी प्रतिभा और उपलब्धि को देखते हुए उसे नौकरी उपलब्ध कराएं. ताकि वह अपने खेल को आगे जारी रख सके.

Tags: Football news, Jharkhand news, Ranchi news

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