झारखंड में आंदोलनरत सहायक पुलिसकर्मियों पर नक्सलियों की नजर, क्या है माजरा? पढ़ें
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झारखंड में आंदोलनरत सहायक पुलिसकर्मियों पर नक्सलियों की नजर, क्या है माजरा? पढ़ें
पिछले कई दिनों से सहायक पुलिसकर्मी आंदोलन कर रहे हैं.

झारखंड में 22 सौ से ज्यादा सहायक पुलिसकर्मी (Assistant policeman) इनदिनों नौकरी की मांग को लेकर आंदोलन पर हैं. जबकि सरकार इन्हें हटाने पर विचार कर रही है. ऐसे में नक्सलियों (Naxals) की नजर इनपर है.

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रांची. झारखंड में सहायक पुलिसकर्मी (Assistant policeman) आंदोलनरत हैं. और अब इसकी आग राजधानी रांची में भी देखने को मिल रही है. 2269 सहायक पुलिसकर्मी वर्तमान में सूबे की विधि व्यवस्था में अपना सहयोग दे रहे हैं. लेकिन अब इनकी नौकरी को लेकर समीक्षा की जा रही है कि इन्हें रखना फायदेमंद है या नहीं?  इसी को लेकर पुलिस मुख्यालय (Police Head Quarter) ने एक पत्र जारी किया, जिसके बाद ही ये बवाल परवान चढ़ा है. प्रदेश के 12 जिलों से पैदल चलकर सहायक पुलिसकर्मी सरकार तक अपनी आवाज को पहुंचाने एक लिए रांची पहुंचे हैं.

सहायक पुलिसकर्मियों का कहना है कि पूर्व की रघुवर सरकार में उन्हें अनुबंध पर नियुक्त किया गया था और 3 वर्षों बाद सीधी नियुक्ति का भी आश्वासन दिया गया था. लेकिन अब इनकी नौकरी पक्की करने के बजाय इन्हें हटाने की बात की जा रही है.

सरकार तक अपनी मांगों को पहुंचाने को लेकर सहायक पुलिसकर्मियों का शनिवार को राजभवन और मुख्यमन्त्री आवास घेराव का कार्यक्रम था. लेकिन रांची पुलिस ने सभी को मोरहाबादी मैदान में ही रोका दिया. कुछ लोग राजभवन तक पहुंचे, लेकिन उन्हें भी पहले हल्का बल प्रयोग कर और बाद में समझा-बुझाकर वापस मोरहाबादी मैदान भेज दिया गया.



चाईबासा के रहने वाले सहायक पुलिसकर्मी सुनील कुमार का कहना है कि अगर उनकी नौकरी जाती है तो वह अपने गांव में भी रहने लायक नहीं रहेंगे. क्योंकि नक्सल प्रभावित इलाकों से निकलकल वे लोग पुलिस में बहाल हुए. इसकी जानकारी नक्सलियों को भी है. ऐसे में नौकरी जाने की स्थिति में या तो इन्हें नक्सली दस्ते में शामिल होना होगा, नहीं नक्सली की गोली का शिकार होना होगा.
सहायक पुलिसकर्मियों को लेकर रांची के वरीय पुलिस अधिकारी संवेदनशील नजर आए. उन्होंने बताया है इनकी बातों से वरीय अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा और वरीय अधिकारी भी इस पूरे मुद्दे पर संजीदगी से विचार करेंगे, क्योंकि ये भी पुलिस परिवार का ही हिस्सा हैं.

सहायक पुलिसकर्मियों को भले ही आर्म्स की ट्रेनिंग ना दी गई हो, लेकिन पुलिसिंग की ट्रेनिंग इन्हें मिल चुकी है. उधर, नक्सली भी अपने कैडर को बढ़ाने को लेकर इनदिनों जद्दोजहद कर रहे हैं. ऐसे में ये सहायक पुलिसकर्मी उनके लिए तैयार कैडर साबित हो सकते हैं.
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