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रांची के मुड़मा में 256 घरों वाली बनेगी नई कुष्ठ कॉलोनी, सौगात या अभिशाप? जानें कुष्ठ रोगियों की राय

रांची के धुर्वा में योगदा सत्संग मठ के पास कुष्ठ रोगियों की बस्ती है.

रांची के धुर्वा में योगदा सत्संग मठ के पास कुष्ठ रोगियों की बस्ती है.

रांची के कुष्ठ कॉलोनी में रहने वाली महिलाओं को हेमंत सरकार के निर्णय पर आपत्ति है. नमिता और लुकरी का कहना है कि उनकी आप ...अधिक पढ़ें

रांची. झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने रांची के मुड़मा में 256 आवास वाले कुष्ठ कॉलोनी बनाने पर सहमति प्रदान कर दी है. कैबिनेट से मिली सहमति के अनुसार 33 करोड़ रुपये की लागत से कुष्ठ कॉलोनी का निर्माण होगा. कुष्ठ परिवार से जुड़े लोगों ने वर्षों पुरानी इस मांग को हेमंत सोरेन सरकार के द्वारा पूरा किये जाने पर आभार व्यक्त किया है, पर कोई भी मुड़मा जाने को तैयार नहीं दिख रहा है.

रांची का वर्षों पुराना कुष्ठ परिवार की बस्ती धुर्वा के योगदा सत्संग मठ के पास स्थित है. इस बस्ती का इतिहास 50 साल से भी ज्यादा पुराना है. मिट्टी के घर वाली इस बस्ती में करीब 200 कुष्ठ परिवार के लोग जैसे – तैसे गुजर बसर कर रहे हैं. कई बार पक्का मकान को लेकर सरकारी सर्वे का काम हो चुका है.

यहां रहने वाले रघुनाथ महतो बताते हैं कि अब हेमंत सोरेन सरकार ने इस सपने को साकार करने के लिये कैबिनेट की मुहर लगा दी है. रांची के मुड़मा में 33 करोड़ रुपये की लागत से 256 आवास बनाने की योजना है. कुष्ठ कॉलिनी के लोग सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हैं, पर वे मुड़मा के बजाय धुर्वा में ही अपने लिये आवास चाहते हैं. जब दिल्ली में शहर के अंदर कुष्ठ रोगियों के लिये कॉलोनी का निर्माण हो सकता है, तो रांची में शहर से बाहर क्यों ?

बस्ती के मंगल उरांव और मोहन गोस्वामी काफी गुस्से में हैं. उनका कहना है कि कुष्ठ परिवार का गुजर बसर मंदिर और बाजार के सहारे अब तक चलता आ रहा है. जगन्नाथ मंदिर की सीढ़ियों की बात करें या हिनू मंदिर के बाहर की, आपको कुष्ठ परिवार के लोग तपती धूप से लेकर ठंड और बरसात में दिख जाएंगे. भीख मांग कर या दूसरों के रहमों करम पर ही इनका पेट भरता है. जो नौजवान हैं वो मेहनत – मजदूरी कर परिवार को जिंदा रख पाने में सहयोग कर रहे हैं. अगर वो शहर से बाहर कर दिए जाएंगे, तो उनका रोजगार छीन जाएगा.

कुष्ठ कॉलोनी में रहने वाली महिलाओं को सरकार के इस निर्णय पर सबसे ज्यादा आपत्ति है. नमिता और लुकरी का कहना है कि उनकी आपत्ति पति के रोजगार छीन जाने के साथ- साथ बच्चों की शिक्षा छूट जाने को लेकर है. जेब में इतने पैसे भी नहीं है कि वो इतनी दूरी रोजाना तय कर सकें. बस्ती में रहने वालों को अब तक यही पता था कि सरकार उन्हें इसी जगह पर पक्का का मकान देगी. लेकिन अब उन्हें शहर से उजाड़ कर ग्रामीण क्षेत्र में भेजने की तैयारी है.

Tags: CM Hemant Soren, Hemant soren government, Jharkhand news, Ranchi news

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