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रांची के बिरसा जू को दो हिस्सों में बांटता है NH-33, हर पल सैलानियों पर होता है हादसे का खतरा

रांची के बिरसा जू को दो हिस्सों में बांटता है NH-33, हर पल सैलानियों पर होता है हादसे का खतरा

रांची के बिरसा जू में जानवरों को देखने के लिए हर रोज भीड़ उमड़ती है.

रांची के बिरसा जू में जानवरों को देखने के लिए हर रोज भीड़ उमड़ती है.

Birsa Zoo Ranchi: रांची का बिरसा जू नेशनल हाईवे-33 के दोनों तरफ दो हिस्सों में बंटा है. एक तरफ के हिस्से में जंगली जानवरों को रखा गया है, तो दूसरी तरफ मछली घर और तितली घर हैं. ऐसे में जू पहुंचने वाले सैलानियों को व्यस्ततम नेशनल हाईवे को पार कर जू का दीदार करना पड़ता है.

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रांची. रांची के ओरमांझी में स्थित भगवान बिरसा मुंडा जैविक उद्यान (Birsa Zoo) में हर दिन सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ती है. यहां आने वाले सैलानियों की कोशिश यही रहती है कि बिरसा जू में रखे गए तमाम जानवरों का दीदार किया जा सके. लेकिन इस दीदार के दौरान सैलानी एक बड़े खतरे को भी पार करते हैं. आइए जानते हैं बिरसा जू पहुंचने वाले सैलानी आखिर किस जानलेवा खतरे का सामना करते हैंं.

राजधानी रांची के ओरमांझी में स्थित भगवान बिरसा जैविक उद्यान सैलानियों के पसंदीदा जगहों में एक है. जहां हर दिन हजारों की संख्या में सैलानी बिरसा जू में रखे गए कुल 1498 जंगली जानवरों का दीदार करने यहां पहुंचते हैं. लेकिन इस दीदार में एनएच 33 एक बड़ी परेशानी की वजह बन जाता है. दरअसल बिरसा जू नेशनल हाईवे 33 के दोनों तरफ दो हिस्सों में बंटा है. एक तरफ के हिस्से में बिरसा जू में जंगली जानवरों को रखा गया है, तो दूसरी तरफ मछली घर और तितली घर का हिस्सा है. ऐसे में बिरसा जू पहुंचने वाले सैलानियों को जंगली जानवरों को देखने के बाद दूसरे हिस्से में जाने के लिए उन्हें नेशनल हाईवे को पार करना पड़ता है, जो कि बेहद ही व्यस्ततम हाईवे है.

रविवार को बिरसा जू घूमने पहुंचे रणधीर मिश्रा ने बताया कि नेशनल हाईवे की वजह से एक बड़ा खतरा हमेशा बना रहता है. लिहाजा सरकार को जल्द से जल्द अंडर पाथवे बनाने की पहल शुरू करनी चाहिए

वहीं आठवीं की छात्रा शांभवी ने बताया कि व्यस्ततम नेशनल हाईवे से गुजरने में काफी डर लगता है. कई बार माता-पिता सड़क पार करने के डर से भी मछली घर और तितली घर दिखाने से कतराते हैं.

बिरसा जू में हर दिन औसतन तीन से चार हजार सैलानी यहाँ पहुंचते हैं. जबकि रविवार को यह संख्या बढ़कर 8 से 10 हजार तक चली जाती है. यहां प्रवेश करने के लिए वयस्क सैलानियों का टिकट जहां ₹40 है. वहीं बच्चों के लिए टिकट ₹20 का रखा गया है. दरअसल जंगली जानवरों को रखने के साथ-साथ बिरसा जू में रिहायशी इलाकों में पकड़े गए जख्मी जंगली जानवर भी लाए जाते हैं. दरअसल यह जानवर भी आकर्षण का एक मुख्य केंद्र होते हैं. पिछले दिनों गुमला के भरनो से एक देसी भालू का बच्चा ग्रामीण इलाके से पकड़ा गया था. हालांकि वह ग्रामीणों की पिटाई से जख्मी हो गया था. बिरसा जू अस्पताल में इलाज के दौरान मालूम चला कि भालू का बच्चा देखने में असमर्थ है. लिहाजा बचाए गए इस बच्चे को देखने के लिए भी कई पर्यटक पहुंचते हैं.

दरअसल नेशनल हाईवे के दोनों तरफ बंटे बिरसा जू को आपस में जोड़ने और कनेक्टिविटी के लिए एक अंडर पाथवे के निर्माण का प्रस्ताव भी तैयार किया गया था. जिसको लेकर जू प्रबंधन की ओर से सरकार को पत्र भी भेजा गया था. लेकिन आज तक इसको लेकर राज्य सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की गई. लिहाजा बिरसा जू पहुंचने वाले सैलानी जान खतरे में डालकर इस नेशनल हाईवे को पार कर दोनों तरफ रखे गए जानवरों का दीदार करने को मजबूर हैं.

बिरसा जू के चिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश साहू ने बताया कि अंडर पाथवे का निर्माण हो जाने के बाद सैलानियों को लेकर खतरा कम हो जाएगा और नेशनल हाईवे पार करने की मजबूरी भी खत्म हो जाएगी.

Tags: Jharkhand news, Ranchi news

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