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लालगढ़ में कमल का फूल खिलाकर अपर्णा सेनगुप्ता ने रचा इतिहास

News18Hindi
Updated: December 23, 2019, 10:02 PM IST
लालगढ़ में कमल का फूल खिलाकर अपर्णा सेनगुप्ता ने रचा इतिहास
अपर्णा सेन गुप्ता को टिकट दिए जाने को लेकर निरसा विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी के अंदर काफी नाराजगी दिखी थी

अपर्णा सेन गुप्ता (Aparna Sengupta) निरसा में कमल फूल खिलाने में कामयाबी हासिल कर पाती हैं तो इस क्षेत्र के लिए इतिहास रचने जैसा होगा.

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  • Last Updated: December 23, 2019, 10:02 PM IST
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निरसा सीट पर बीजेपी  उम्मीदवार अपर्णा सेनगुप्ता ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्द्वी मार्क्ससिस्ट को-ऑर्डिनेशन (एमसीओ) उम्मीदवार  अरुप चटर्जी को हरा कर बड़ा उलटफेर कर दिया है. धनबाद जिले की निरसा विधानसभा सीट को वाम दल का गढ़ माना जाता है. 2014 के झारखंड विधानसभा चुनाव में निरसा विधानसभा सीट से मार्क्ससिस्ट को-ऑर्डिनेशन (एमसीओ) उम्मीदवार के अरुप चटर्जी जीते थे. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी बीजेपी के गणेश मिश्रा को 1035 वोटों से हराया था. 2009 में भी इस सीट पर मार्क्ससिस्ट को-ऑर्डिनेशन (एमसीओ) उम्मीदवार अरुप चटर्जी ने बाजी मारी थी जबकि 2005 में ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के प्रत्याशी को सफलता मिली थी. लेकिन इस बार अपर्णा सेन गुप्ता ने निरसा का सियासी इतिहास बदल कर रख दिया.

साल 2015 में अपर्णा सेन गुप्ता (Aparna Sengupta) ने बीजेपी ज्वाइन की और पार्टी में लगातार अपना योगदान देकर साल 2019 के विधानसभा चुनाव (Jharkhand Assembly Election 2019) में टिकट पाने में सफलता भी हासिल कर ली. वैसे अपर्णा सेन गुप्ता को टिकट दिए जाने को लेकर निरसा विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी के अंदर काफी नाराजगी दिखी थी क्योंकि वहां से बीजेपी के दिग्गज नेता गणेश मिश्र का टिकट तय माना जा रहा था. गणेश मिश्र पिछले विधानसभा चुनाव मार्क्स कॉरडिनेशन कमेटी पार्टी के उम्मीदवार अरुप चटर्जी से महज 1 हजार 35 मतो के अंतर से चुनाव हारे थे.

राजनीतिक पृष्ठभूमि
प्रदेश भाजपा के प्रशिक्षण प्रमुख गणेश मिश्र टिकट ले पाने मे असफल रहेंगे इसकी उम्मीद वहां के पुराने कार्यकर्ताओं को तनिक भी नहीं थी लेकिन बीजेपी ने पूर्व मंत्री अपर्णासेन गुप्ता को टिकट देकर सबको हैरान कर दिया. निरसा विधानसभा क्षेत्र में आजादी के बाद बीजेपी एकबार भी चुनाव जीत पाने में सफल नहीं हो पाई है. पिछले तीन विधानसभा चुनाव के परिणाम पर नजर डालें तो साल 2005 में अपर्णा सेन गुप्ता फॉरवर्ड ब्लॉक पार्टी से सहानुभूति लहर की वजह से जीत पाई थी क्योंकि उनके पति की हत्या कर दी गई थी. उसके बाद लगातार दो बार मार्क्स कॉरडिनेशन कमेटी के नेता अरूप चटर्जी लगातार दो बार चुनाव जीत पाने में सफल रहे हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर


पुरानी बीजेपी और नई बीजेपी के बीच पनपे असंतोष को खत्म करना एक बड़ी चुनौती
ऐसे में अपर्णा सेन गुप्ता ने निरसा में कमल फूल खिलाकर  क्षेत्र में इतिहास रच दिया. अपर्णा सेन गुप्ता ने अपने चुनावी भाषणों में निरसा को झारखंड का नंबर वन विकसित क्षेत्र बनाने का दावा किया तो साथ ही क्षेत्र में लाल झंडे के प्रभाव को पूरी तरह खत्म करने की बात भी वो अक्सर कहती रहीं.अपर्णा बीजेपी के निष्ठावान कार्यकर्ता की तरह प्रधानमंत्री के बताए रास्ते पर चलने की बात पर पुरजोर बल देती हैं और लोकल नेताओं में अपनी पैठ बनाने के लिए नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने का भी भरपूर प्रयास करती रही हैं. इस कड़ी में साल 2014 के बीजेपी प्रत्याशी गणेश मिश्र को मनाने वो उनके घर भी पहुंची और उनका पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया.

धनवाद जिले के निरसा क्षेत्र में  अपने पति को खोकर राजनीति में उतरने वाली अपर्णा अब लाल झंडे को छोड़कर कमल के साथ हैं और उन पर क्षेत्र में पुरानी बीजेपी और नई बीजेपी के बीच बंटी खाई को पाटना  किसी गंभीर चुनौती से कम नहीं है. इसी खाई की वजह से बीजेपी झारखंड में अप्रत्याशित हार का शिकार हो गई.
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First published: December 23, 2019, 10:02 PM IST
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