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झारखंड में आयुष दवाओं का करोड़ों का कारोबार, लेकिन गुणवत्ता जांच के लिए कोई लैब नहीं

रांची के डोरंडा में स्थित आयुष लेब में स्वास्थ्य विभाग का कॉल सेंटर चल रहा है.

रांची के डोरंडा में स्थित आयुष लेब में स्वास्थ्य विभाग का कॉल सेंटर चल रहा है.

Ranchi News: पूर्व की रघुवर सरकार ने रांची के डोरंडा में बन रहे स्टेट लेबल आयुष लैब को 104 कॉल सेंटर और 108 एंबुलेंस कॉल सेंटर में तब्दील कर दिया.

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रांची. झारखंड (Jharkhand) में करोड़ों रुपये का व्यापार देसी चिकित्सा पद्धति की दवाओं का है, पर बाजार में बिक रही दवाओं की असली-नकली जांच की कोई व्यवस्था नहीं है. राज्य गठन के 20 साल में झारखंड की अबतक की किसी भी सरकार ने आयुष दवाओं (Ayush Drugs) की जांच के लिए स्टेट स्तर का लैब बनाने की जरुरत तक नहीं समझी. और तो और पूर्व की रघुवर दास की नेतृत्व वाली सरकार ने डोरंडा में बन रहे स्टेट लेवल आयुष लैब भवन को लैब न बनाकर स्वास्थ्य कॉल सेंटर 104 और 108 एंबुलेंस कॉल सेंटर बना दिया. नतीजा यह कि राज्य की आयुष मेडिसीन टेस्ट लैब की योजनाएं फाइलों में ही दबी की दबी रह गयीं.

स्टेट लेवल लैब नहीं रहने से जनता और सरकार दोनों को नुकसान
नियमानुसार राज्य में आयुर्वेदिक, यूनानी और होमियोपैथी दवाओं की गुणवत्ता जांच के लिए लैब होना जरुरी है, क्योंकि जब भी सरकार या स्वास्थ्य विभाग को किसी दवा की खरीद करने की जरुरत पड़ती है तो ऐसे में उसकी गुणवत्ता की जांच का प्रमाण जरुरी होता है. लेकिन जब राज्य में कोई ऐसा जांच लेबोरे़टरी ही नहीं है तो फिर दवा खरीद से पहले सैंपल को दूसरे राज्यों को भेजा जाता है ताकि यह पता चल सके कि जो दवा सरकार जनहित के लिए खरीद रही है उसकी गुणवत्ता क्या है. दूसरे राज्यों के लैब में भेजने और वहां से रिपोर्ट आने में लंबा वक्त लग जाता है. वहीं दूसरी ओर जनता जो दवाएं बाजार से खरीद रही है उसमें वास्तव में वह तत्व या सार मिला हुआ है या नहीं इसकी भी जांच नहीं हो पाती है. ऐसे में कम गुणवत्ता वाले या नकली आयुष दवा कारोबारियों पर लगाम लगाना मुश्किल होता है.

क्या कहते हैं जानकार
झारखंड आयुष निदेशालय के मेडिकल निरीक्षक और होमियोपैथिक चिकित्सक डॉ अशोक पासवान कहते हैं कि राज्य में आयुष दवाओं की जांच के लिए लैब होना बहुत जरूरी है. यह स्टेट लैब अबतक शुरु भी हो जाता पर जो भवन लैब के लिए बन रहा था. उसे सरकार ने 104 का कॉल सेंटर बना दिया. डॉक्टर अशोक पासवान के अनुसार बिना जांच के नकली और खराब दवाओं के काला कारोबारियों पर कार्रवाई संभव नहीं.



जल्द तीन स्टेट लेबल लैब बनाने की प्रक्रिया शुरु करने का भरोसा
झारखंड में आयुष के तहत यूनानी, होमियोपैथी और आयुर्वेदिक दवाओं की गुणवत्ता जांच के लिए शीघ्र लैब बनाने का भरोसा दिलाते हुए राज्य के स्टेट नो़डल पदाधिकारी लैब डॉ फजलुस समी कहते हैं कि स्वास्थ्य सचिव ने तीन नए लैब बनाने के लिए बैठक की है और डीपीआर बनाने का निर्देश दिया है. जल्द ही नामकुम में आयुष निदेशालय के बगल में आयुर्वेदिक, यूनानी और होमियोपैथी दवाओं की जांच के लिए लैब बनना शुरु होगा.
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