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कहीं छत नहीं तो कहीं दीवार गायब, अधूरे शौचालयों से कैसे पूरा ODF बना झारखंड?

कहीं छत नहीं तो कहीं दीवार गायब, अधूरे शौचालयों से कैसे पूरा ODF बना झारखंड?

रांची के धुर्वा इलाके की ये तस्वीर सूबे में ओडीएफ की सच्चाई को बयां कर रही है.

रांची के धुर्वा इलाके की ये तस्वीर सूबे में ओडीएफ की सच्चाई को बयां कर रही है.

ODF in Jharkhand: बगैर छत वाला शौचालय, बगैर दीवार वाला शौचालय, बगैर दरवाजे वाला शौचालय और गोइठा रखने वाला शौचालय, झारखंड में सरकारी शौचालयों की यही जमीनी सच्चाई है. एक ऐसी सच्चाई जो बताई भी ना जाये और छुपाई भी ना जाये. चूंकि तस्वीरें झूठ नहीं बोलती, इसलिये इन तस्वीरों से झारखंड में ODF की हकीकत खुद ब खुद बयां होती है.

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रांची. झारखंड में ओडीएफ का सच जानकर आप दंग रह जाएंगे. ये हकीकत राजधानी रांची की है. सरकार ने भले ही पूरे झारखंड को साल 2018 में ओडीएफ घोषित कर दिया हो, पर ओडीएफ से जुड़ी सच्चाई को देखकर आपकी आंखें खुली की खुली रह जाएंगी.

बगैर छत वाला शौचालय, बगैर दीवार वाला शौचालय, बगैर दरवाजे वाला शौचालय और गोइठा रखने वाला शौचालय, झारखंड में सरकारी शौचालयों की यही जमीनी सच्चाई है. एक ऐसी सच्चाई जो बताई भी ना जाये और छुपाई भी ना जाये. चूंकि तस्वीरें झूठ नहीं बोलती, इसलिये इन तस्वीरों से झारखंड में ODF की हकीकत खुद ब खुद बयां होती है.

कहने को तो साल 2018 में राज्य स्थापना दिवस के दिन तत्कालीन रघुवर दास सरकार ने पूरे राज्य को ODF घोषित किया था. लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी आज तक झारखंड खुले में शौचमुक्त के अभिशाप से मुक्त नहीं हो पाया. हैरान करने वाली बात ये है कि ये सच्चाई राजधानी रांची के धुर्वा इलाके की है.

रांची के धुर्वा निवासी धर्मवीर कुमार का आज भी शौचालय का निर्माणकार्य अधूरा है. इस शौचालय की छत गायब है. शौचालय का उपयोग नहीं हो रहा है. दशरथ नायक भी शौचालय के नाम पर मची लूट का शिकार हो चुके हैं. सरकार के द्वारा शौचालय योजना का लाभ तो मिला, पर योजना की पहली किस्त 6 हजार के अलावे फिर दूसरी किस्त नहीं मिल पाई. योजना की पूरी राशि नहीं मिलने की वजह से योजना आज भी अधूरी पड़ी है.

झारखंड के सुदूर ग्रामीणों इलाकों की बात कौन करें तो राजधानी रांची में ODF के नाम पर सरकारी राशि की लूट का ये जीता जागता उदाहरण है. शौचालय निर्माण में लाभुक के बजाय सिर्फ और सिर्फ ठेकेदार की मनमानी चली. ठेकेदार ने जैसा चाहा जितना चाहा उतना ही योजना के नाम पर लूट का खेल चलता रहा. लाभुक फरियाद लगाते रहे, पर उनकी सुनने वाला कोई नहीं था. आज ऐसे कई शौचालय में लोग अपने जरूरत के सामान रखने का काम कर रहे हैं. कहीं आपको गोइठा रखा हुआ मिला जाएगा, तो कही कुछ और. जो शौचालय बनकर तैयार भी हैं, वहां पानी के अभाव में इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है. अलखनाथ बड़ाइक के घर शौचालय का निर्माण तो हुआ है, पर उसका उपयोग आज तक एक भी दिन नहीं हो पाया. शौचालय का सेप्टिक टैंक का कार्यअधूरा होने की वजह लाभुक को लाभ मिलकर भी लाभ नहीं मिल पा रहा है.

आज भी रांची के धुर्वा इलाके में प्लास्टिक और कपड़े का घेरा वाला शौचालय आपको देखने को मिल जाएंगे. लोगों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है, इसलिये खुले में शौच जाना उनकी मजबूरी है. ODF के सच से सरकार अनजान नहीं है, बल्कि खुली आंखों से इस सच को देखने के बाद वो इसे झुठलाने में जुटी है. यह शायद संभव नहीं, क्योंकि तस्वीरें झूठ नहीं बोलती.

Tags: Jharkhand news, Ranchi news, Swachh Bharat Mission, Toilet

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