झारखंड : थोक शराब बिक्री के लाइसेंस का नॉन रिफंडेबल आवेदन शुल्क 25 लाख रुपये - जानें क्या है खेल

सीएम हेमंत सोरेन की झारखंड सरकार का यह फैसला कई सवाल खड़े कर रहा है.

झारखंड सरकार ने इस बार थोक शराब बिक्री का लाइसेंस देने के लिए 25 लाख रुपये का आवेदन शुल्क रखा है और वह भी नन रिफंडेबल. मतलब लाइसेंस नहीं मिला तो शराब कारोबारी के 25 लाख रुपये पानी में.

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रांची. झारखंड में थोक शराब बिक्री का लाइसेंस लेने के नाम पर सिंडिकेट का खेल शुरू हो गया है. खेल भी ऐसा वैसा नहीं बल्कि फूल प्रूफ. आपको जानकर हैरानी होगी कि झारखंड सरकार ने इस बार थोक शराब बिक्री का लाइसेंस देने के लिए 25 लाख रुपये का आवेदन शुल्क रखा है और वह भी नन रिफंडेबल. मतलब लाइसेंस नहीं मिला तो शराब कारोबारी के 25 लाख रुपये पानी में. अब ऐसे में ये साफ हो गया है कि लाइसेंस पाने की दौड़ में कौन शामिल होंगे और कौन हिम्मत नहीं जुटा सकेंगे.

झारखंड में शराब की बिक्री को लेकर राज्य सरकार हमेशा ही ऊहापोह की स्थिति में रही है. कभी सरकार खुद से शराब बेचती नजर आती है, तो कभी इसे निजी हाथों में दे दिया जाता है. वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार ने भी झारखंड राज्य बेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड को भंग कर थोक शराब की बिक्री को निजी हाथों में सौपने का निर्णय किया है. नई नियमावली के अनुसार जिलास्तर पर दिए जाने वाले लाइसेंस के लिए 25 लाख रुपये आवेदन शुल्क तय किया गया है. यानी लाइसेंस मिले या न मिले आवेदक को 25 लाख रुपये का चालान या बैंक ड्राफ्ट देना अनिवार्य होगा. राज्य में यह पहला मौका है जब आवेदन शुल्क के तौर पर इतनी बड़ी राशि रखी गई है. विभाग की नियामवाली यह बताने के लिए काफी है कि थोक शराब का लाइसेंस पाने के लिए एक खास सिंडिकेट ही इसमें शामिल हो सकेगा, क्योंकि 25 लाख का जुआ खेलना हर व्यापारी के बस की बात नहीं. सरकार के इस निर्णय ने बीजेपी को बोलने को मौका दे दिया है.

नई नियमावली के अनुसार, राज्य के 24 जिलों में करीब 30 शराब व्यापारियों को थोक शराब बिक्री का लाइसेंस देने की तैयारी है. मामला 25 लाख नन रिफंडेबल आवेदन शुल्क तक ही सीमित नहीं है, बल्कि 5 साल का एकमुश्त लाइसेंस फीस के साथ-साथ 50 लाख रुपये जमानत राशि भी देनी होगी. रांची जैसे शहर के लिए लाइसेंस की सालाना फीस 1 करोड़ रुपये तय की गई है. राज्य में शराब का सालाना कारोबार भी 4 हजार करोड़ के आसपास का है. राज्य सरकार को उत्पाद विभाग से 1 हजार करोड़ से लेकर 17 सौ करोड़ रुपये सालाना राजस्व की प्राप्ति हो जाती है. यही वजह की सिंडिकेट में शामिल शराब व्यापारियों को ध्यान में रखते हुए ही नई नियमावली तैयार की गई है. सत्ता पक्ष इसे राजस्व उगाही में बढ़ोत्तरी के तौर पर देख रहा है.

थोक शराब का लाइसेंस पाने के लिए झारखंड में सिंडिकेट सक्रिय हो गया है. राज्य का एक बड़ा शराब कारोबारी झारखंड और बिहार की सीमा से लगे जिलों का लाइसेंस हासिल करने की जुगत में है, ताकि बिहार में भी शराब खपाई जा सके. वैसे अभी आवेदन डालने की तिथि तय नहीं हुई है और सिंडिकेट में शामिल शराब कारोबारी नई नियामवाली के तहत पेपर वर्क करने में जुट गए हैं.

जानें कब हुई कितने राजस्व की वसूली

वित्त वर्ष       करोड़ में
2010-11     407.62
2011-12     492.13
2012-13     593.00 (इसी साल जेएसबीसीएल का गठन हुआ)
2013-14     643.70
2014-15     764.55
2015-16     915.68
2016-17     957.62
2017-18     847.24
2018-19     1082.00
2019-20     1792.80

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