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झारखंड में अब दुधारू पशुओं का भी बनेगा अाधार कार्ड

झारखंड में अब दुधारू पशुओं का भी बनेगा अाधार कार्ड

झारखंड से दुधारु पशुओं की तस्करी और चोरी अब आसान नहीं होगी.  चोरी और तस्करी कर ले जायी गई गाय और अन्य दुधारु पशुओं की पहचान की जा  सकेगी और उसे सही मालिक के पास पहुंचाया जा सकेगा. ये सब होगा दुधारु पशुओं के बन रहे आधार कार्ड से.

झारखंड से दुधारु पशुओं की तस्करी और चोरी अब आसान नहीं होगी. चोरी और तस्करी कर ले जायी गई गाय और अन्य दुधारु पशुओं की पहचान की जा सकेगी और उसे सही मालिक के पास पहुंचाया जा सकेगा. ये सब होगा दुधारु पशुओं के बन रहे आधार कार्ड से.

झारखंड से दुधारु पशुओं की तस्करी और चोरी अब आसान नहीं होगी. चोरी और तस्करी कर ले जायी गई गाय और अन्य दुधारु पशुओं की पहचान की जा सकेगी और उसे सही मालिक के पास पहुंचाया जा सकेगा. ये सब होगा दुधारु पशुओं के बन रहे आधार कार्ड से.

    झारखंड से दुधारु पशुओं की तस्करी और चोरी अब आसान नहीं होगी.  चोरी और तस्करी कर ले जायी गई गाय और अन्य दुधारु पशुओं की पहचान की जा  सकेगी और उसे सही मालिक के पास पहुंचाया जा सकेगा. ये सब होगा दुधारु पशुओं के बन रहे आधार कार्ड से. जी हां राज्य सरकार ने अब गाय और अन्य दुधारु पशुओं का आधार कार्ड बनाने की अनोखी कवायद शुरु की है.

    अगले तीन सालों में होगी हर गाय की पहचान

    आम भारतीय नागरिक की तरह अब झारखंड की गाय और दुधारु पशुओं की भी अपनी अलग पहचान होगी. राज्य सरकार ने गुजरात की तर्ज पर पशुओं का आधार कार्ड बनाना शुरु किया है. कृषि एंव पशुपालन मंत्री रणधीर सिंह की माने तो अगले तीन सालों में सभी गाय - भैंस का आधार कार्ड बना कर एक डाटा बेस तैयार कर लिया जाएगा. इस आधार कार्ड से ना सिर्फ गायों की पहचान आसान होगी, बल्कि और तस्करी और चोरी पर लगाम लगेगा. बल्कि दुधारु पशुओं का एक डाटा बेस तैयार होगा जिसका उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सकेगा. मंत्री ने कहा कि पछले दिनों गुजरात दौरे पर उन्होंने देखा कि सभी दुधारु पशुओं का डेटा वहां तैयार है. इसके फायदे समझे. इसके बाद ही यह निर्णय लिया.

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    गौ पालकों में उत्साह

    सरकार की इस पहल  का गौ पालकों ने स्वागत किया है. गौ पालक गणेश यादव कहते हैं कि गायों की पहचान नहीं होने की वजह से कई बार चोरी हुई गायों पर दावा करने के बाद भी उन्हें नहीं मिल पाती. आधार कार्ड तैयार होने पर उसकी पहचान हो पाएगी और उन्हें उनकी चोरी हुई गाय भैंस वापस मिल पाएगी. गौ पालक शैलेंद्र यादव कहते हैं कि इससे दुधारु पशुओं की तस्करी पर भी लगाम लगेगी और खरीद बिक्री में भी सहूलियत होगी.

    लगेगी तस्करी पर रोक

    राज्य सरकार ने दुधारु पशुओं के आधार कार्ड निर्माण और डाटा बेस तैयार करने की मियाद तीन साल रखी है. अगर सरकार की यह कवायद अमली जामा पहनता है तो इसमें संदेह नहीं कि पशुओं के आधार कार्ड और डाटा बेस से ना सिर्फ चोरी तस्करी पर लगाम लगेगी बल्कि इसका उपयोग दुधारु पशुओं की बीमारी , उससे जुड़े अन्य तथ्य भी सूचीबद्ध हो पाएंगे जिनका उपयोग स्वेतक्रांति लाने में किया जा सकेगा.

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