अपराध छोड़ अब हुनर सीखेंगे बच्चे, रौशन होगी जिंदगानी
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अपराध छोड़ अब हुनर सीखेंगे बच्चे, रौशन होगी जिंदगानी
रांची के डुमरदग्गा बाल सुधार गृह में रहने वाले बच्चों के लिए शनिवार का दिन खास रहा. जाने अनजाने में अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले ये बच्चे खेल खेल में अब न केवल अब प्रिंटिंग करते हुए नजर आएंगे, बल्कि इनके बनाए लिफाफे, कागज की फाइल जैसी स्टेशनरी आयटम बाजारों में देखने को मिलेगी.

रांची के डुमरदग्गा बाल सुधार गृह में रहने वाले बच्चों के लिए शनिवार का दिन खास रहा. जाने अनजाने में अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले ये बच्चे खेल खेल में अब न केवल अब प्रिंटिंग करते हुए नजर आएंगे, बल्कि इनके बनाए लिफाफे, कागज की फाइल जैसी स्टेशनरी आयटम बाजारों में देखने को मिलेगी.

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रांची के डुमरदग्गा बाल सुधार गृह में रहने वाले बच्चों के लिए शनिवार का दिन खास रहा. जाने अनजाने में अपराध की दुनिया में कदम रखने वाले ये बच्चे खेल खेल में अब न केवल अब प्रिंटिंग करते हुए नजर आएंगे, बल्कि इनके बनाए लिफाफे, कागज की फाइल जैसी स्टेशनरी आयटम बाजारों में देखने को मिलेगी. झालसा के एक्सक्युटिव चैयरमैन जस्टिस डी एन पटेल ने इन्हें हुनरमंद बनाने की शुरुआत करते हुए बच्चों को रोजगार से भी जोड़ने का भरोसा दिया.

ट्रेनिंग के लिए खास गाड़ी

बाल सुधार गृह के करीब 14 बच्चों को कौशल विकास के तहत प्रथम चरण में प्रशिक्षित किया जाएगा. राज्य सरकार और झालसा के संयुक्त प्रयास से शुरु की गई इस योजना के तहत करीब डेढ महीने तक इन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा. कुछ ट्रेनिंग रांची में भी पूरी होगी. बाल सुधार गृह से बाहर प्रशिक्षण पाने के लिए बच्चों को सुप्रीमकोर्ट से स्पेशल गाड़ी भी मुहैया कराई गई है.



प्रतिभा से चौंकाया



प्रशिक्षण की शुरुआत करते हुए जब बाल कैदियों ने अपने बनाये सामानों को न्यायाधीशगण के सामने रखा तो वे अचंभित हो उठे. इन बाल कैदियों को प्रशिक्षण दे रहे प्रशिक्षक पवन कुमार की मानें तो 14 बच्चों को पहले चरण में प्रशिक्षित करने के बाद अन्य बच्चों को भी कौशल विकास के तहत प्रशिक्षित किया जाएगा जिससे इनके अंदर छिपी हुई प्रतिभा को निखारा जा सके. उधर जस्टिस डीएन पटेल ने कहा कि हाईकोर्ट, झालसा और राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के द्वारा इन्हें प्रिटिंग का काम मुहैया कराया जाएगा.

बहरहाल, अपराध की दुनिया में कदम रखने के कारण भले ही ये बच्चे बाल सुधार गृह में हैं मगर इनके अंदर छिपी हुई प्रतिभा किसी से कम नहीं है. शायद यही वजह है कि झालसा की इस पहल ने इन बच्चों के जीवन में एक नई रोशनी प्रदान की है जिसके बल पर वे न केवल हुनरमंद होगें बल्कि इन्हें रोजगार भी मिलेगा.

(रांची से भुवन किशोर झा की रिपोर्ट)
First published: January 28, 2017, 4:15 PM IST
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