चारा घोटाला में नया खुलासा, भैंसों के सींग की मालिश पर खर्च किए गए 16 लाख रुपये

राज्य सरकार ने ये खुलासा विधानसभा में बिहार विनियोग अधिकाई व्यय विधेयक 2019 को पेश करने के दौरान किया.

News18.com
Updated: July 28, 2019, 4:48 PM IST
चारा घोटाला में नया खुलासा, भैंसों के सींग की मालिश पर खर्च किए गए 16 लाख रुपये
चारा घोटाले में दोषी करार दिए गए बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव फिलहाल रांची के अस्पताल में इलाज करा रहे हैं. (फाइल)
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Updated: July 28, 2019, 4:48 PM IST
चारा घोटाला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. इस बार मामला मालिश का है. वह भी भैंसों के सींगों की मालिश. चौंकिए मत क्योंकि अभी यह बताना तो बाकि है कि इसमें घोटाला क्या हुआ. बिहार सरकार ने हाल ही में खुलासा किया कि सिर्फ भैंसों के सींग की मालिश करने के लिए 16 लाख रुपये खर्च कर दिए गए. इस मालिश के लिए पांच सालों में (साल 1990-91 से 1995-96) कुल मिलाकर 16 लाख रुपये का सरसों का तेल खरीदा गया था. गौरतलब है कि इस मामले में लालू प्रसाद यादव जेल में हैं.

बिहार सरकार ने ये खुलासा विधानसभा में बिहार विनियोग अधिकाई व्यय विधेयक 2019 को पेश करने के दौरान किया. 1977-78 से लेकर 2015-16 के दौरान किए गए अधिकाई व्यय को विनियमित कराने के लिए यह विधेयक मानसून सत्र में विधानसभा में पेश किया गया.

खरीदा गया 49,950 लीटर सरसों का तेल
आंकड़ाें पर गौर किया गया तो पता चला कि 1990-91 से 1995-96 तक कुल मिलाकर 16 लाख रुपये में 49,950 लीटर सरसों का तेल खरीदा गया था. होटवार दुग्ध आपूर्ति सह डेयरी फार्म के महाप्रबंधक डॉ जेनुअल भेंगराज ने वरिष्ठ अधिकारियों और शीर्ष नेताओं की मिलीभगत से तेल का नकली बिल तैयार किया.

चारा घोटाले से संबंधित ये नया खुलासा बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बुधवार को विधानसभा में बिहार विनियोग अधिकाई व्यय विधेयक 2019 को पेश करने के दौरान किया. उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अत्यधिक व्यय या आवश्यकता को बजट के माध्यम से लिया जाता है लेकिन लालू प्रसाद यादव की अगुवाई वाली तत्कालीन सरकार ने इसका पालन नहीं किया और फर्जी बिलों के माध्यम से जनता के धन को लूटने के लिए बजटीय आवंटन से अधिक निकासी की गई.'

हालांकि, पशुपालन विभाग द्वारा खर्च किए गए 658 करोड़ रुपये की राशि पर विचार नहीं किया जा सकता है क्योंकि चारा घोटाले के ये मामले रांची और पटना में सीबीआई कोर्ट के पास लंबित हैं.

पशुपालन विभाग की जांच से पता चलता है कि 1990 के बाद बजटीय आवंटन में वृद्धि के माध्यम से संगठित लूट को अंजाम दिया गया और जाली बिलों के माध्यम से अत्यधिक निकासी की गई.
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बैलों को ले जाने के लिए कार का इस्तेमाल
चारा घोटाले पर बनी रिपोर्ट के अनुसार फाइलों में बैलों को रांची से घाघरा तक स्कूटर की सवारी करवाई गई थी. वहीं कैग रिकॉर्ड के अनुसार, रांची से झींकपानी तक चार बैल ले जाने के लिए एक कार (पंजीकरण संख्या BHV-5777) का इस्तेमाल भी किया गया था.

(अशोक मिश्र)

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First published: July 28, 2019, 12:25 PM IST
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