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OMG: बतौर चपरासी हुए थे बहाल, अब बन गए क्लास वन अफसर! जानें कैसे मिला इतना बड़ा प्रमोशन

OMG News: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बंधु तिर्की ने जानकारी देते हुए बताया कि जो लोग चतुर्थ वर्ग यानि चपरासी के पद पर नियुक्त हुए थे, वे अब अब क्लास वन अधिकारी बन गए हैं.

OMG News: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बंधु तिर्की ने जानकारी देते हुए बताया कि जो लोग चतुर्थ वर्ग यानि चपरासी के पद पर नियुक्त हुए थे, वे अब अब क्लास वन अधिकारी बन गए हैं.

OMG News: अगर किसी सरकारी विभाग में कोई व्यक्ति चपरासी (Peon) यानि चतुर्थ वर्ग के पद (Fourth Grade Job) पर नियुक्त हो और महज कुछ सालों में ही उसे क्लास वन अधिकारी बनने का अवसर मिल जाए तो निश्चित तौर पर यह किसी के लिए भी बहुत बड़ी बात होगी. लेकिन, जब इतना बड़ा प्रमोशन किसी गड़बड़ी के बाद मिले तो सिस्टम और प्रशासन पर सवाल उठना लाजिमी है.

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रांची. अगर किसी सरकारी विभाग में कोई व्यक्ति चपरासी (Peon) यानि चतुर्थ वर्ग के पद (Fourth Grade Job) पर नियुक्त हो और महज कुछ सालों में ही उसे क्लास वन अधिकारी बनने का अवसर मिल जाए तो निश्चित तौर पर यह किसी के लिए भी बहुत बड़ी बात होगी. लेकिन, जब इतना बड़ा प्रमोशन किसी गड़बड़ी के बाद मिले तो सिस्टम और प्रशासन पर सवाल उठना लाजिमी है. दरअसल ये पूरा मामला झारखंड से आया है. सोमवार को झारखंड विधानसभा (Jharkhand Assembly) के बजट सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक बंधु तिर्की ने अल्पसूचित प्रश्न काल में राज्‍य सचिवालय समेत राज्य सरकार के अन्य कार्यालयों में फर्जी नियुक्ति के मामले को उठाते हुए कहा कि कैडर विभाजन के बाद प्रदेश के सरकारी विभागों में बहुत से कर्मी ऐसे आएं हैं जो काशी विद्यापीठ (Kashi Vidyapeeth), देवघर विद्यापीठ (Deoghar Vidyapeeth) से फर्जी डिग्री लेकर नौकरी कर रहे हैं. यही नहीं ऐसे कर्मियों को चार से पांच बार प्रमोशन भी मिल गया है.

बंधु तिर्की ने जानकारी देते हुए बताया कि जो लोग चतुर्थ वर्ग यानि चपरासी के पद पर नियुक्त हुए थे, वे अब अब क्लास वन अधिकारी बन गए हैं. ऐसे में सरकार को अधिक वेतन देने पड़ता है, जिससे राजस्व की हानि हो रही हैं. विधायक ने राज्य सरकार से ऐसे कर्मियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई करने की मांग की. वहीं विधायक बंधु तिर्की को जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि यह कहना मुश्किल है. यदि पर्टिकुलर किसी व्यक्ति का मामला है तो सदस्य बताए. जांच कर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने भरोसा दिलाया कि ऐसे मामलों का निराकरण करेंगे.

वहीं झारखंड़ विधानसभा में सोमवार को 1932 के खतियान के आधार स्थानीय नीति का मुद्दा एक बार फिर छाया रहा. विधायक सरयू राय ने सदन पटल पर 1932 की स्थानीय नीति को लेकर सरकार से जवाब मांगा कि क्या सरकार स्थानीय नीति के लिए 1932 के खतियान के आधार बनाना चाहती है. उन्होंने यह भी जानना चाहा कि पूर्व की सरकार ने स्थानीय नीति 2016 में तय की थी. उसमें संसोधन भी किया है जो वर्तमान सरकार को स्वीकार नहीं है.
सरयू राय के सवालों को जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि 1932 का खतियान तो रहेगा ही लेकिन सरकार 1964 और 1974 में हुए सर्वे की भी समीक्षा कर रही है. उन्होंने कहा कि अभी 2016 की स्थानीय नीति चल रही है. सरकार बहुत जल्द नई स्थानीय नीति लाएगी, इसके लिए त्रिस्तरीय मंत्रिमंडलीय उप समिति के गठन का मामला सरकार के समक्ष विचाराधीन है.

Tags: Jharkhand Politics, OMG News, Promotion

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