रांची में बढ़ते प्याज के भाव से गोलगप्पे का कारोबार भी प्रभावित, पूरी नहीं हो रही ग्राहकों की डिमांड

सांकेतिक फोटो.

Ranchi News: प्‍याज की बढ़ती कीमतों ने जायका बिगाड़ दिया है. गली-मुहल्‍लों में घूम-घूम कर फास्‍टफूड बेचेने वालों की हालत और खस्‍ता हो गई है.

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रांची. प्याज की बढ़ती कीमतों से जायका भी बिगड़ने लगता है. इससे होटलों के प्रभावित होने की चर्चा की बात तो आमतौर पर की ही जाती है, लेकिन गली-मुहल्‍लों में जाकर गोलगप्‍पे और चाउमिन जैसे फास्‍टफूड बेचने वालों की परेशानियों की बात नहीं की जाती है. देश के अन्‍य हिस्‍सों के साथ झारखंड की राजधानी रांची (Ranchi) में भी प्याज की कीमत 60 रुपये (प्रति किलो) को पार कर गयी है. पैसे वाले तो प्याज का आनंद ले रहे हैं, लेकिन गरीब तबकों का स्वाद और कारोबार प्रभावित हो रहा है. राजधानी रांची में प्याज के बढ़ते भाव का असर चंद हजार की पूंजी लगाकर गली-मुहल्‍लों में खानेपीने की दुकान चलाने वालों पर प्रत्‍यक्ष तौर पर पड़ रहा है.

रांची के मुख्य चौराहे अल्बर्ट एक्का, लालपुर, रातू रोड समेत कई जगहों पर कतार से गोलगप्पे, चाउमिन और फास्ट फूड की दुकानें लगती हैं. लेकिन, प्याज के बिना फास्ट फूड और गोलगप्पे का स्वाद फीका पड़ने लगा है. फास्टफूड के शौकीन ग्राहक दुकानदारों से प्याज की डिमांड कर रहे हैं, लेकिन कम पूंजी वाले दुकानदार 60 रुपये के भाव से प्याज खरीदे तो कैसे. असमंजस की स्थिति ऐसी है कि अगर दुकानदार फास्ट फूड और गोलगप्पे की कीमत बढ़ाते हैं तो ग्राहक दुकान तक आएंगे ही नहीं और अगर प्याज नहीं दिया तो बिना स्वाद के वे खाएंगे नहीं.

पूरी नहीं कर पा रहे ग्राहकों की डिमांड
कोरोना काल में गरीब तबकों की आमदनी बुरी तरह प्रभाति हुई है. चाहे वह तबका खरीदार के तौर पर हो या फिर कारोबार से जुड़ा हो. अल्बर्ट एक्का चौक पर चाउमिन की दुकान लगाने वाले गौतम महतो बताते हैं कि फास्टफूड के ग्राहक प्याज मांगते हैं, लेकिन जब चाउमिन में ही प्याज मिलाना नामुमकिन हो रहा है तो अलग से प्याज कहां से दें. उनके लिए 60 रुपये के भाव से प्याज खरीदना भारी पड़ रहा है. प्रदेश की राजधानी में घूम-घूम कर गोलगप्पे खिलाने वाले राजू की हालत और भी बुरी है. उनकी मानें तो गोलगप्पे का स्वाद बिना प्याज के पूरा ही नहीं होता. अभी श्रावण या फिर कार्तिक मास भी नहीं है, जो प्याज नहीं खाने का बहाना बनाया जा सके.