बंगाल की बीज से होती है खेती, फिर तैयार अफीम की झारखंड से इन राज्यों में होती है सप्लाई

पुलिस की तमाम कार्रवाई के बावजूद झारखंड में हजारों एकड़ अफीम के फसल तैयार हैं.

पुलिस की तमाम कार्रवाई के बावजूद झारखंड में हजारों एकड़ अफीम के फसल तैयार हैं.

Opium Smuggling: झारखंड के अफीम तस्करों के तार पड़ोसी देश नेपाल समेत कई राज्यों से जुड़े हैं. यहां से अफीम की सप्लाई यूपी, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और पंजाब में होती है.

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रांची. झारखंड में अफीम की तस्करी (Opium Smuggling) का काम धड़ल्ले से शुरू हो गया है. राज्य के नक्सल प्रभावित जिलों में उगाई गई अफीम तस्करों के माध्यम से राज्य के बाहर भेजा जाने लगा है. झारखंड की अफीम की मांग पंजाब, हरियाणा, यूपी, बंगाल के साथ-साथ नेपाल में भी है, जहां से ये अफीम दूसरे राज्यों और अंतराष्ट्रीय बाज़ार में भेजे जाते हैं. इसको देखते हुए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं.

झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में इस साल भी बड़े पैमाने पर अफीम की खेती हुई. हालांकि पुलिस ने कई एकड़ में लगी अफीम की फसल को नष्ट भी किया. लेकिन खुफिया विभाग को जो जानकारी मिली है वह बेहद चौंकाने वाला है. मिली जानकारी के अनुसार इस साल भी नशे के सौदागर हजारों एकड़ में अफीम की फसल उगाने में कामयाब हो गए. अब उस अफीम को दूसरे राज्यों के तस्करों के जरिये बाहर भेजा जा रहा है. इसको देखते हुए अफीम के मुफीद वाले जिलों के एसपी को विशेष निगरानी का निर्देश दिया गया है. वही प्रदेश भर के एसपी को भी हाइवे और उससे जुड़ने वाले सड़कों पर विशेष चौकसी बरतने का भी निर्देश दिया गया है.

झारखंड के एडीजी सीआईडी अनिल पालटा ने बताया कि नक्सल अभियान में जाने वाले जवानों और सैटेलाइट पिक्चरों के माध्यम से अफीम की खेती की जानकारी मिलती है. वहीं आमलोगों के द्वारा भी पुलिस को सूचना मिली और पुलिस ने उसके आधार पर कार्रवाई भी की.

हालांकि उन्होंने माना कि तमाम कवायदों के बाद भी कई जगह अफीम की फसल बच गई. इसकी तस्करी का समय शुरू हो गया है, जिसे देखते हुए अब तस्करों को पकड़ने और सूचना संग्रह करने पर फोकस किया जा रहा है. उन्होंने माना कि अफीम की खेती के पीछे नक्सलियों का भी अहम रोल होता है और इसके मुनाफे का हिस्सा नक्सलियों तक भी जाता है.
झारखंड के अफीम तस्करों के तार पड़ोसी देश नेपाल समेत कई राज्यों से जुड़े हैं. राज्य से अफीम के डोडा की सप्लाई यूपी, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और पंजाब में की जाती है. जमशेदपुर के बड़े अफीम तस्कर गौतम की गिरफ्तारी के बाद ये बात भी पुख्ता हो गई क्योंकि वो नेपाल और पश्चिम बंगाल के नशे के सौदागरों के संपर्क में था. रांची, खूंटी, सरायकेला, गुमला, लातेहार, चतरा, पलामु, गढ़वा, हज़ारीबाग ,गिरिडीह, देवघर, दुमका, गोड्डा, पाकुड़, जामताड़ा और साहेबगंज में अफीम की खेती होती है.

कार्रवाई की बात करें तो पिछले साल 2020 में 2634.7 एकड़ अफीम की फसल को पुलिस ने नष्ट कर दिया. वहीं साल 2019 में 2015.4 एकड़, साल 2018 में 2160.5 एकड़, 2017 में 2676.5 एकड़, 2016 में 259.19 एकड़, 2015 में 516.69 एकड़, 2014 में 81.26 एकड़, 2013 में 247.53 एकड़, 2012 में 66.6 एकड़ व 2011 में 26.85 एकड़ जमीन से अफीम नष्ट करने की कार्रवाई की गई.

अफीम की तस्करी में शामिल सोमा मुंडा ने बताया कि अफीम के सौदागर बंगाल से उसके गांव पहुंचकर बीज और तमाम चीजें उपलब्ध कराते हैं. फिर फसल तैयार होने पर माल भी खरीद लेते हैं. इस धंधे में उन्हें अच्छा मुनाफ़ा होता है.
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