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बड़ी खबर: रांची एयरपोर्ट के पास पत्थलगड़ी, गांववालों ने भूमि अधिग्रहण को बताया गैर कानूनी, मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसबल तैनात

पत्थलगड़ी में बिना ग्रामसभा की अनुमति के भूमि अधिग्रहण को गैर कानूनी बताया गया है.

पत्थलगड़ी में बिना ग्रामसभा की अनुमति के भूमि अधिग्रहण को गैर कानूनी बताया गया है.

Pathalgadi in Ranchi: रांची एयरपोर्ट के पास चंदा घासी कुटे टोली के ग्रामीणों ने पेशा कानून को आधार बनाकर पत्थलगड़ी की है. ग्रामीणों के अनुसार बिना ग्रामसभा की अनुमति के भूमि अधिग्रहण, बालू घाट की बंदोबस्‍ती, पत्‍थर खदान का लीज गैर कानूनी है.

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रांची. झारखंड में एक बार फिर पत्थलगड़ी (Pathalgadi) की आग सुलगने लगी है. रविवार को रांची एयरपोर्ट (Ranchi Airport) के पास आदिवासी समुदाय के लोगों ने पत्थलगड़ी कर जमीन पर ग्रामसभा का अधिकार जताया. यह जमीन आर्ट ऑफ लिविंग को हस्तांतरित की गई थी. पत्थलगड़ी की सूचना पर बड़ी संख्या में पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया है.

जानकारी के मुताबिक रांची एयरपोर्ट के पास चंदा घासी कुटे टोली के ग्रामीणों ने पेशा कानून को आधार बनाकर पत्थलगड़ी की है. ग्रामीणों के अनुसार बिना ग्रामसभा की अनुमति के भूमि अधिग्रहण, बालू घाट की बंदोबस्‍ती, पत्‍थर खदान का लीज इत्‍यादी गैर कानूनी है.

ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामसभा आयोजित किए बिना ही जमीन हस्तांतरित कर दी गई. पूर्व की सरकार ने आर्ट ऑफ लिविंग की सहयोगी संस्था मानव विकास को लीज पर जमीन दे दी.



बता दें कि बीते दिनों यहीं पर ग्रामीणों ने दखल दिहानी रोकी थी, आज वहीं पत्थलगड़ी की. पत्थलगड़ी की सूचना पर सिटी डीएसपी समते कई थानों की पुलिस मौके पर तैनात हैं.
बता दें कि हाल में ही झारखंड हाईकोर्ट के पास उस वक्त हंगामा मच गया, जब सूबे के 22 जिलों से आए पड़हा पंचायत के प्रतिनिधियों ने पत्थलगड़ी की कोशिश की. शिलापट्ट पर भारत का राजपत्र खुदा हुआ था. आनन-फानन में पांच थानेदार, डीएसपी, एसडीओ और एसपी ने मौके पर पहुंचकर आदिवासी समुदाय के लोगों को समझा-बुझाकर हटाया था.

दूसरे दिन आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों ने राजभवन जाकर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी. और संविधान में शेड्यूल एरिया को दिए गये अधिकारों को लागू कराने की मांग की. राज्यपाल से मुलाकात के बाद प्रतिनिधियों ने राजधानी रांची सहित राज्यभर में पत्थलगढ़ी करने की घोषणा की थी. दावा किया था कि अनुसूचित क्षेत्र में शासन का अधिकार आदिवासियों के पास है.
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