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झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में शामिल लोगों की सरकारी नौकरियों में होगी सीधी भर्ती

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि ये बाबा (शिबू सोरेन) के सहयोगियों का सम्मान है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि ये बाबा (शिबू सोरेन) के सहयोगियों का सम्मान है.

झारखंड बनने के 20 साल बाद यह फैसला मंत्रिपरिषद की बैठक में किया गया है. इस सीधी भर्ती लिए रिटायर्ड भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 25, 2021, 11:05 PM IST
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रांची. जिन लोगों ने झारखंड (Jharkhand) अलग राज्य के लिए आंदोलन किया, उन्हें या उनके परिवार के एक सदस्य को तृतीय और चतुर्थ वर्ग की सरकारी नौकरियों (government jobs) में शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualifications) के अनुसार सीधी भर्ती (direct recruitment) दी जाएगी. झारखंड राज्य बनने के 20 साल बाद अब यह फैसला मंत्रिपरिषद की बैठक में किया गया है. इस सीधी भर्ती लिए रिटायर्ड भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया जाएगा. आयोग को प्राप्त आवेदनों के आधार पर दस्तावेजों की जांच कर आंदोलनकारी और उनके आश्रित चिन्हित किए जाएंगे.

7000 तक का मासिक पेंशन

सरकार शहीद परिवार के एक सदस्य को 7000 तक का मासिक पेंशन भी देगी. इसके अतिरिक्त पुलिस की गोली से 40% तक दिव्यांग हुए आंदोलनकारियों को भी पेंशन दिया जाएगा. आंदोलन के दौरान कुछ आंदोलनकारियों को कई महीने तक जेल में रातें गुजारनी पड़ी थीं, ऐसे आंदोलनकारियों या उनके परिवार के किसी एक सदस्य को भी इस योजना के तहत पेंशन का लाभ दिया जाएगा.



सरकारी नौकरियों में क्षैतिज आरक्षण का भी लाभ
सरकार ने यह फैसला किया है कि लाभुकों को सरकारी नौकरियों में 5 प्रतिशत तक का क्षैतिज आरक्षण भी दिया जाएगा. इसके तहत सरकार द्वारा विभिन्न सरकारी नौकरियों में लाभुकों के लिए पात्रता के आधार पर वर्गवार सीटें भी आरक्षित की जाएंगी.

बाबा के सहयोगियों का सम्मान : हेमंत सोरेन

इस ऐतिहासिक योजना की घोषणा के दौरान बात करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा 'जिस सपने के साथ झारखंड आंदोलन में लोगों ने सक्रिय भागिदारी निभाई थी, आज आखिर कोई राज्य उसे कैसे नजरअंदाज कर सकता है. अपने आंदोलनकारियों के त्याग और बलिदान से अस्तित्व में आया कोई राज्य कैसे उन्हें 20 वर्षों तक भूल कर आगे बढ़ सकता है. आज, इस माध्यम से मुझे बाबा (शिबू सोरेन) के सहयोगियों और उनके साथियों को सम्मानित करने का मौका मिला है. यह मेरे लिए गौरव की बात है.'
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