यहां मंदिर जाने से पहले कुत्ते की समाधि पर मत्था टेकते हैं लोग

आस्था से जुड़ी यह अनोखी कहानी रांची के कोकर स्थित पागल बाबा आश्रम की है. इस आश्रम में शिवमंदिर भी है और मां दुर्गे की भी पूजा होती है. लेकिन इन सबसे पहले लोग कु्त्ते की समाधि पर पूजा करते हैं.

Ajay Lal | News18 Jharkhand
Updated: July 25, 2019, 7:43 PM IST
Ajay Lal
Ajay Lal | News18 Jharkhand
Updated: July 25, 2019, 7:43 PM IST
कुत्तों की वफादारी से भला कौन वाकिफ नहीं है, लेकिन एक कुत्ता आस्था का केन्द्र बन जाए, यह शायद आपने पहली बार सुना होगा. रांची के एक आश्रम में कुत्ते की समाधि है, जिन्हें लोग देवता की तरह पूजते हैं. मंदिर में जाने से पहले लोग इसी समाधि पर मत्था टेकते हैं.

बाबा ने बनाई कुत्ते की समाधि

आस्था से जुड़ी यह अनोखी कहानी रांची के कोकर स्थित पागल
बाबा आश्रम की है. पागल बाबा आश्रम में शिवमंदिर भी है और मां दुर्गे की भी पूजा होती है. लेकिन इन सबसे पहले भोली नामक उस कुत्ते की पूजा होती है, जो आज से 20 साल पहले एक खनसामा के हाथों मारा गया था.

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कुत्ते की समाधि


दरअसल पागल बाबा ने भोली नामक एक कुत्ता पाल रखा था. पागल बाबा भोजन से पहले भोली को श्रद्धापूर्वक खाना खिलाते थे. साल 1999 में पागल बाबा अयोध्या यात्रा पर गये थे. उसी दौरान एक दिन भोजन के लिए भौंकने पर खनसामा ने चूल्हे की जलती लकड़ी से भोली के सिर पर वार कर दिया. इससे भोली की मौत हो गयी. जब पागल बाबा यात्रा से लौटे और इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने नाराज होकर खनसामा को आश्रम से निकाल दिया. फिर भोली की समाधि मंदिर के बगल में बनवायी और रोज पूजा करने लगे. तब से यह पूजा जारी है.

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रांची के कोकर में स्थित पागल बाबा आश्रम

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समाधि पर मत्था टेकते हैं लोग

लोगों की माने तो इस आश्रम में भोली की आत्मा अभी भी बसती है. तभी तो इस आश्रम में एक- दो नहीं, बल्कि 17 कुत्ते पलते हैं. यहां आने वाले लोग इन कुत्तों को कुछ ना कुछ जरूर खिलाते हैं.

यहां नियमित आने वाले पप्पू गोप कहते हैं कि इस समाधि पर पूजा करने से मन्नतें पूरी होती हैं. उन्होंने अपने बारे में बताया कि वह कभी फटेहाल जिंदगी जीते थे, लेकिन इस समाधि पर पूजा करने पर उनकी जिंदगी बदल गई.

पंडित विनोद पाठक बताते हैं कि उज्जेन के महाकाल मंदिर में भी एक कुत्ते की पूजा होती है, जिसे भैरोनाथ के नाम से जाना जाता है. शास्त्र में कुत्ते को यमदूत भी कहा जाता है. कुत्ते को मां दुर्गा का द्वारपाल भी माना जाता है.

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First published: July 25, 2019, 4:13 PM IST
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