झारखंड में प्लाज्मा थेरेपी से Corona मरीजों के इलाज में आ रही परेशानी, जानिए पूरा मामला
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झारखंड में प्लाज्मा थेरेपी से Corona मरीजों के इलाज में आ रही परेशानी, जानिए पूरा मामला
झारखंड में प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना मरीजों का इलाज शुरू हो गया है. (सांकेतिक तस्वीर)

रिम्स कोविड-19 प्लाज्मा विंग की हेड डॉ सुषमा कुमारी बताती हैं कि राज्य में ज्यादातर मरीज (Corona Patients) बिना लक्षण वाले हैं. ऐसे में जो मरीज कोरोना को हरा चुके हैं उनमें भी एंटी बॉडी काफी कम पायी जा रही है, जिसके चलते उनका प्लाज्मा (Plasma) रोगियों के लिये लाभप्रद नहीं होगा.

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रांची. गत 28 जुलाई को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन (Hemant Soren) ने इस उम्मीद के साथ रिम्स में प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy) की शुरुआत की थी कि कोरोना के गंभीर मरीजों (Corona Patients) की जान बचाई जा सके. लेकिन एक सप्ताह में सिर्फ सात कोरोना से ठीक हुए मरीजों ने प्लाज्मा दान में रुचि दिखाई है. उसमें से भी चार के रक्त प्लाज्मा में पर्याप्त एंटी बॉडी ही नहीं मिला.

रिम्स ब्लड बैंक की एचओडी और कोविड-19 प्लाज्मा विंग की हेड डॉ सुषमा कुमारी बताती हैं कि राज्य में ज्यादातर मरीज एसिम्प्टोमैटिक यानी बिना लक्षण वाले मरीज हैं. ऐसे में जो मरीज कोरोना को हरा चुके हैं उनमें भी एंटीबॉडी काफी कम पायी जा रही है. जिसके चलते उनका प्लाज्मा रोगियों के लिये लाभप्रद नहीं होगा.

दरअसल झारखण्ड में 95 प्रतिशत वैसे कोरोना पॉजिटिव हुए हैं, जिसमें कोई लक्षण ही नहीं आया. और वे ठीक हो गए. ऐसे ठीक हुए कोरोना मरीजों में पर्याप्त मात्रा में ही नही हैं. एंटीबॉडी कम मिलने से ऐसे रोगियों का प्लाज्मा थेरेपी के लिए कारगर नहीं होता है. रिम्स ने ज्यादा से ज्यादा ठीक हुए मरीजों से प्लाज्मा दान के लिए आह्वान किया है. फ़ोन करके वैसे लोगों को काउन्सलिंग किया जा रहा है, ताकि प्लाज्मा थेरेपी से  रोगियों की जान बचाई जा सके.



50 में से सिर्फ 12 प्‍लाज्‍मा देने को हुए तैयार
रिम्स में प्लाज्मा थेरेपी में आ रही परेशानियों को इसी से समझा जा सकता है कि रिम्स ने 380 लोगों की लिस्ट बनाई थी. जिसमें से 50 ही वैसे ठीक हुए कोरोना मरीज थे जिसमें कोरोना के लक्षण आये थे. अब जब इन 50 को कॉल किया गया तो सिर्फ 12 प्लाज्मा दान के लिए तैयार हुए. उसमें से भी कई उम्र एवं अन्य बीमारियों के चलते छंट गए. और सिर्फ 03 का ही प्लाज्मा एंटी बॉडी मरीज को ठीक करने लायक था.

रिम्स कोविड टास्क फोर्स के संयोजक डॉ प्रभात कुमार ने कोरोना रोगियों के लिए ज्यादा से ज्यादा प्लाज्मा दान की अपील की है. पहले रक्तदान को महादान कहा जाता था. कोरोनाकाल में अब डॉक्टर प्लाज्मा दान महादान का नारा देकर कोरोना को परास्त कर ठीक हुए लोगों से अपील कर हैं कि वह आगे आये और प्लाज्मा दान करे ताकि कोविड मरीजों की जान बचे जा सके.
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