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झारखंड के नए सीएम हेमंत सोरेन का ऐसा रहा है राजनीतिक सफर
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News18 Jharkhand
Updated: December 29, 2019, 4:11 PM IST
झारखंड के नए सीएम हेमंत सोरेन का ऐसा रहा है राजनीतिक सफर
झारखंड के 11वें मुख्यमंत्री बने हेमंत सोरेन (फाइल फोटो)

जेएमएम के नेता हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने झारखंड के मुख्यमंत्री (Chief Minister) के तौर पर शपथ ले ली है. हेमंत सोरन दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं, इसी के साथ वह झारखंड के 11वें मुख्यमंत्री बने हैं.

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रांची. जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन (Hemant Soren) दूसरी बार झारखंड के मुख्यमंत्री (Chief Minister) बन गये हैं. मोरहाबादी मैदान में आयोजित भव्य समारोह में उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ (Oath) ली. तमाम चुनौतियों का सामना करते हुए अपने राजनीतिक सूझबूझ की वजह से वो झारखंड के 11वें मुख्यमंत्री बने. उनके साथ कांग्रेस के रामेश्वर उरांव, आलमगीर आलम और आरजेडी के सत्यानंद भोक्ता ने भी मंत्री पद की शपथ ली. बतौर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का उनका दूसरा कार्यकाल है, इससे पहले उन्होंने 13 जुलाई 2013 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, लेकिन 23 दिसंबर 2014 को चुनाव हारने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था. आज हेमंत सोरेन के साथ रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित समारोह में उन्होंने शपथ ली. 44 वर्षीय हेमंत सोरेन झारखंड के दिशोम गुरु शिबू सोरेन (Shibu Soren) के पुत्र हैं. हेमंत सोरेन ने राजनीतिक सूझबूझ के दम पर 10 साल के अंदर ही उन्होंने सियासत की नई ऊंचाइयों को छुआ.

हेमंत सोरेन के राजनीतिक सफर से जुड़ी कुछ खास बातें

हेमंत सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष हैं और उनके पिता शिबू सोरेन केंद्रीय मंत्री और तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. राजनीतिक में हेमंत का पदार्पण 2009 में हुआ था. हेमंत सोरने 24 जून, 2009 से चार जनवरी, 2010 तक झारखंड से राज्यसभा के सदस्य रहे. सितंबर, 2010 में गठित हुई अर्जुन मुंडा की सरकार में हेमंत ने उपमुख्यमंत्री का पद संभाला. उपमुख्यमंत्री के साथ ही उन्होंने वित्त मंत्रालय भी संभाला. 23 जुलाई 2013 को वह झारखंड के पांचवे और सबसे युवा मुख्यमंत्री बने, उस वक्त उनकी उम्र मजह 38 साल थी. जनवरी 2019 में उन्होंने कांग्रेस, झारखंड विकास मोर्चा-प्रजातांत्रिक, और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के साथ मिलकर झारखंड (jharkhand) का पहला महागठबंधन बनाया, जिससे झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में जीत हासिल हुई.



हेमंत सोरेन ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की ली शपथ (फाइल फोटो)
हेमंत सोरेन ने दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की ली शपथ (फाइल फोटो)




आदिवासी नेता के रूप में सोरेन की पहचान विपक्षी दल के नेता के तौर पर हुई

झारखंड के आदिवासी नेता के रूप में सोरेन की पहचान विपक्षी दल के नेता के तौर पर हुई. 2019 के चुनाव अभियान के दौरान सोरेन को महागठबंधन के मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया गया. 23 दिसंबर 2019 को झारखंड विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आए, जिसमें महागठबंधन ने पूर्ण बहुमत हासिल किया और जेएमएम सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी. एक बार फिर हेमंत सोरेन ने 29 दिसंबर को दूसरी बार शपथ ग्रहण कर लिया.

2013 में पहली बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने थे हेंमत सोरेन

 हेमंत सोरेन ने वर्ष 2013 में पहली बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने थे. उस समय सरकार बनाने में उन्हें कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल का साथ मिला था. हेमंत पहली बार 3 जुलाई 2013 से लेकर दिसंबर 2014 तक मुख्यमंत्री के पद पर बने रहे. वे झारखंड के पांचवें मुख्यमंत्री थे. इससे पहले वह अर्जुन मुंडा मंत्रीमंडल में उप मुख्यमंत्री थे. हेमंत सोरेन वर्ष 2014 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के उम्मीदवार हेमलाल मुरमू को 24,087 वोटों के अंतर से हराकर निर्वाचित हुए थे.

राज्य के कई आंदोलनों में सक्रिय रहे हेमंत सोरेन

विपक्ष में रहते हुए हेमंत सोरेन राज्य के कई आंदोलनों में सक्रिय रहे हैं. वर्ष 2016 में राज्य में बीजेपी की सरकार थी. तत्कालीन बीजेपी सरकार ने छोटा नागपुर टीनेंसी एक्ट और संथाल परगना टीनेंसी एक्ट को बदलने की कोशिश की थी. इसमें आदिवासी भूमि को गैर कृषि कार्यों में इस्तेमाल करने का प्रावधान किया था. इसका राज्य में काफी विरोध हुआ और हेमंत सोरेन ने इस आंदोलन को नेतृत्व दिया था.

बड़े भाई दुर्गा सोरेन की असमय मौत के बाद राजनीति में आए हेमंत

 वर्ष 2009 में बड़े भाई दुर्गा सोरेन की असमय मौत के बाद हेमंत सोरेन को शिबू सोरेन के बाद जेएमएम के नेता के रूप में देखा जाने लगा. वर्ष 2009 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने दुमका सीट से पहली बार जीत दर्ज की और विधानसभा पहुंचे. वर्ष 2010 में अर्जुन मुंडा की नेतृत्व वाली बीजेपी-जेएमएम गठबंधन सरकार में हेमंत सोरेन पहली बार राज्य के उपमुख्यमंत्री बने. जनवरी 2013 में जेएमएम ने गठबंधन सरकार से समर्थन वापस ले लिया और राज्य में राष्टपति शासन लगा दिए गए.

हेमंत ने पिता की उंगली पकड़कर सीखी राजनीति

झारखंड के मुख्यमंत्री रहे हेमंत सोरेन राज्य के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं. उनके पिता राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के सुप्रीमो शिबू सोरेन हैं. हेमंत सोरेन सबसे कम उम्र में मुख्यमंत्री बनने वाले नेताओं में शुमार हैं. हेमंत सोरेन का जन्म 10 अगस्त 1975 में हुआ है. हेमंत सोरेन अपने पिता की तरह राज्य में आदिवासी समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं.

हेमंत सोरेन ने पिता शिबू सोरेन से सीखी सियासत (फाइल फोटो)
हेमंत सोरेन ने पिता शिबू सोरेन से सीखी सियासत (फाइल फोटो)


शराबबंदी के समर्थक रहे हैं हेमंत

हेमंत सोरेन पीडीएस में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के मुखर आलोचक रहे हैं. एससी—एसटी एक्ट में बदलाव की बात जब आई तब हेमंत सोरेन अपने पिता शिबू सोरेन के साथ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिले थे. हेमंत भी झारखंड में शराबबंदी की वकालत करते आए हैं. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य में शराब पर पाबंदी लगाएंगे.

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First published: December 29, 2019, 4:08 PM IST
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