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    महानगरों की कंपनियां प्लेन से झारखंडी मजदूरों का करवा रही पलायन, सरकार का रोजगार देने का दावा फेल

    कोरोनाबंदी के चलते देशभर से 7 लाख मजदूर झारखंड लौटे थे. (सांकेतिक तस्वीर)
    कोरोनाबंदी के चलते देशभर से 7 लाख मजदूर झारखंड लौटे थे. (सांकेतिक तस्वीर)

    हवाई चप्पल पहने हवाई जहाज की सफर करने निकले ये वही मजदूर (Laborers) हैं, जिन्होंने कोरोनाबंदी के कारण अपना सबकुछ छोड़कर देशभर से अपने घरों की ओर रुख किया था. लेकिन रोजगार की तलाश में अब ये एक बार फिर महानगरों की ओर रूख करने लगे हैं.

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    रांची. झारखंड में कोरोना संक्रमण (Corona Infection) की रफ्तार कम होते ही एक बार फिर मजदूरों (Laborers) का पलायन शुरू हो गया है. रोजगार की तलाश में यहां के मजदूरों ने दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों का रुख करना शुरू कर दिया है. ये वे मजदूर हैं, जो देश में कोरोना के चलते लॉकडाउन लगने के दौरान महानगरों से अपने गांव लौटे थे. लेकिन इन्हें इनके घर पर रोजगार देने की राज्य सरकार (Hemant Government) की कोशिश कामयाब नहीं हो पाई. ऐसे में ये मजदूर सरकारी रिकॉर्ड में एंट्री कराये बगैर हवाई जहाज से महानगरों की ओर जा रहे हैं. बाहरी कंपनियों इन्हें अपने खर्चे पर वहां ले जा रही हैं.

    हवाई चप्पल पहने हवाई जहाज की सफर करने निकले ये वही मजदूर हैं, जिन्होंने कोरोना के कारण अपना सबकुछ छोड़कर देशभर से अपने घरों की ओर रुख किया था. उस समय मजदूरों की घर वापसी पर सियासत के साथ-साथ सरकारी घोषणाओं की झड़ी लगा दी गई थी. मगर आज यही मजदूर रोजगार की तलाश में महानगरों की ओर रुख कर लिया है.

    ठेकेदार से बातकर मजदूरों को मंगवा रही कंपनियां 



    सबसे खास बात यह कि बाहर की कंपनियां ठेकेदार से सीधे संपर्क कर हवाई जहाज के माध्यम से मजदूरों मंगवा रही हैं. इन मजदूरों को हवाई जहाज का टिकट और मोटी तनख्वाह देने का आश्वासन दिया जाता है.
    दिल्ली, मुम्बई, बेंगलुरू और चेन्नई में रोजगार मिलने की आस में सफर पर निकले इन मजदूरों का मानना है कि जिस उम्मीद के साथ वो अपना प्रदेश लौटे थे, वह पूरा नहीं हुआ. आज रोजगार यदि यहीं मिल जाता तो हमलोग घर छोड़ने को मजबूर नहीं होते.



    सरकार की योजना हुई फेल  

    कोरोनाकाल में राज्य सरकार ने मजदूरों के पलायन पर कई पॉलिसी बनायी. रोजगार से लेकर बाहर जाने वाले मजदूरों के सारे रिकॉर्ड रखने की जिम्मेदारी श्रम विभाग को दी गई. मगर हकीकत यह है कि मजदूरों का पलायन बगैर किसी सरकारी रिकॉर्ड के बेधड़क हो रहा है.

    श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता का कहना है कि प्रदेश से वैसे लोग फिर से दिल्ली मुम्बई की तरफ रुख कर रहे हैं, जिनका वहां अपना निजी व्यवसाय है या परिवार है.

    7 लाख मजदूरों की हुई थी वापसी

    बता दें कि कोरोना बंदी के चलते देश के विभिन्न राज्यों से करीब सात लाख मजदूरों की झारखंड वापसी हुई थी. ये मजदूर झारखंड से बाहर छोटा-मोटा काम कर अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहे थे. घर वापसी के वक्त सरकार की ओर से रोजगार मुहैया कराने के वादे बड़े जोर-शोर से किये गये. मगर हकीकत ये है कि अब हर दिन रांंची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से हजारों मजदूर महानगरों की ओर रूख कर रहे हैं.
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