रांची में निजी अस्पताल की मनमानी, 87 हजार के लिए बच्चे के शव को 16 घंटे तक कब्जे में रखा

हेल्थ पॉइंट अस्पताल ने शव नहीं देने के आरोप से इनकार किया है.

हेल्थ पॉइंट अस्पताल ने शव नहीं देने के आरोप से इनकार किया है.

Ranchi News: सड़क दुर्घटना के शिकार हुए 8 वर्षीय बच्चे की इलाज के दौरान हेल्थ पॉइंट अस्पताल में मौत हो गई. लेकिन अस्पताल की ओर से 16 घंटे बाद तक शव परिजनों को नहीं सौंपा गया. अस्पताल शव देने के लिए 87 हजार रुपये मांग रहा था.

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रांची. झारखंड में सरकार की नाक के नीचे राजधानी रांची में निजी अस्पतालों (Private Hospitals) की मनमानी नहीं रुक रही है. अब तो ये इतने निष्ठुर हो गए हैं कि पैसे की एवज में लाश को घंटों बंधक बनाए रखते हैं. जबकि न्यायालय और सरकार की ओर से अस्पतालों को स्पष्ट दिशा-निर्देश है कि किसी भी मरीज की इलाज के दौरान मौत के बाद उसके शव को नहीं रखा जा सकता है. लेकिन इस निर्देश का ताख पर रखकर रांची के हेल्थ पॉइंट अस्पताल ने बच्चे के शव को 16 घंटे तक कब्जे में रखा.

जानकारी के मुताबिक पलामू के ऊपरी कला में दुर्घटना के शिकार हुए 8 वर्षीय बच्चे की इलाज के दौरान हेल्थ पॉइंट अस्पताल में मौत हो गई. लेकिन अस्पताल की ओर से 16 घंटे बाद तक शव परिजनों को इसलिए नहीं सौंपा गया, क्योंकि गरीब पिता के पास बिल जमा करने के लिए पैसे नहीं थे. अस्पताल शव देने के लिए 87 हजार रुपये मांग रहा था.

मृतक के पिता अर्जुन मेहता ने बताया कि सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल अपने 8 वर्षीय बेटे को उन्होंने हेल्थ पॉइंट अस्पताल में भर्ती कराया था. भर्ती के समय 80 हजार रुपये जमा भी कराया. गुरुवार शाम में डॉक्टरों ने कहा कि बच्चा ठीक है, पर देर रात उसे मृत बता दिया गया. शव की मांग की गई तो 87 हजार का बिल थमा दिया गया.

हालांकि अस्पताल प्रबंधक गोपाल कुमार ने पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा कि अस्पताल की ओर से पैसे की जरूर मांग की गई, पर शव को नहीं रोका गया था.
राज्य में निजी अस्पतालों की मनमानी का ये नया मामला नहीं है. आए दिन इस तरह के मामले सामने आते रहते हैं. शिकायत भी होती है, पर प्रशासन और सरकार की ओर से ऐसा अस्पतालों पर कार्रवाई ना के बराबर होती है.
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