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आयुष्मान योजना की आड़ में पैसे बनाने का खेल! पढ़ें निजी अस्पतालों व इंश्योरेंस कंपनियों का काला सच

विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत की शुरुआत रांची से हुई थी.

विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत की शुरुआत रांची से हुई थी.

आयुष्मान योजना (Ayushman Bharat Scheme) की शुरुआत देशभर में झारखंड की राजधानी रांची से ही हुई थी. आज उसी धरती पर आयुष्मान योजना सिसकती और रेंगती नजर आ रही है.

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रांची. केन्द्र की आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Scheme) का मकसद गरीब मरीजों के आंसुओं को पोछकर उन्हें महंगे इलाज से राहत पहुंचाना है. लेकिन निजी अस्पतालों ने इंश्योरेंस के पैसे के लालच में गरीबों की इस योजना को अपने मुनाफे की सीढ़ी बना डाली है. रांची में लाभुकों ने आयुष्मान योजना के तहत इलाज करने वाले निजी अस्पतालों पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

आयुष्मान योजना की शुरुआत देशभर में झारखंड की राजधानी रांची से ही हुई थी. आज उसी धरती पर आयुष्मान योजना सिसकती और रेंगती नजर आ रही है. हाल यह है कि गरीब मरीजों की सिसकियां निजी अस्पतालों के मुनाफे के नीचे दबने को मजबूर दिख रही हैं. रांची के इटकी के रहने वाले दिनेश और नकुल की मां का इलाज आयुष्मान के तहत ही नवंबर 2019 में रांची के पिस्का मोर स्थित सिटी ट्रस्ट अस्पताल में हुआ था. इनका आरोप है कि अस्पताल में शुरुआत में अपेंडिक्स की बात कही. बाद में पैंक्रियाज में पथरी की बीमारी बताते हुए मरीज का इलाज किया और फिर हालत बिगड़ जाने पर मरीज को रिम्स रेफर कर दिया. बाद में वे फिर अपनी मां को लेकर वापस सिटी ट्रस्ट अस्पताल पहुंचे. लेकिन अस्पताल ने यह कहते हुए इलाज से इंकार कर दिया कि आयुष्मान के तहत एक ही मरीज का दो बार इलाज संभव नहीं है.

नकुल का आरोप है कि दोबारा सिटी अस्पताल पहुंचने पर उनसे प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने के बदले 70 हजार रुपये लिए गए. लेकिन इसी दौड़ भाग में हालत बिगड़ने पर नकुल की मां ने दम तोड़ दिया. नकुल के जैसे ही कहानी कुणाल की भी है जिनके 32 वर्षीय भाई की भी सिटी अस्पताल में ही पेनक्रियाज में पथरी होने की वजह से मौत हुई थी. उसका इलाज भी आयुष्मान के तहत ही हुआ था.

परिजनों के इस आरोप पर जब हमने सिटी ट्रस्ट अस्पताल के कर्मियों और डॉक्टरों से बात करने की कोशिश की तो कई मामले खुलकर सामने आए. लेकिन अस्पताल के चिकित्सक डॉ. एमएन सिंह कैमरे को देखते ही अपने चेंबर से बाहर निकलते नजर आए.

दरअसल आयुष्मान के नाम पर यह सारा खेल निजी अस्पतालों और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच चल रहा है. लेकिन कई बार आपसी खटास के बाद इंश्योरेंस कंपनियां अपनी अनुशंसा से निजी अस्पतालों को डी इन पैनल भी करती रही हैं. मतलब जो निजी अस्पताल आयुष्मान से अटैच हैं उन्हें हटा दिया जाता है. लेकिन बाद में जैसे ही इंश्योरेंस कंपनियों की उन निजी अस्पतालों से फिर सांठगांठ हो जाती है. उसके बाद डी इन पैनल से वहीं निजी अस्पताल वापस जुड़कर इन पैनल भी हो जाते हैं. अभी तक मई 2021 में राज्यभर में कुल 41 निजी अस्पतालों को डी इन पैनल किया गया है. बात राजधानी रांची की करें तो सरकारी और निजी मिलाकर कुल 102 अस्पताल आयुष्मान भारत से अटैच हैं.

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