Lok Sabha Election 2019: झारखंंड की इस सीट पर 1% वोट से तय होती है जीत-हार, क्या 6ठी बार खिलेगा कमल?

रांची सीट पर अब तक पांच बार बीजेपी का कमल खिला है. पांचों बार सीटिंग सांसद रामटहल चौधरी के सिर पर ही जीत का सेहरा सजा है.

News18 Jharkhand
Updated: March 14, 2019, 3:20 PM IST
Lok Sabha Election 2019: झारखंंड की इस सीट पर 1% वोट से तय होती है जीत-हार, क्या 6ठी बार खिलेगा कमल?
क्या रांची में 6वी बार खिल पाएगा कमल?
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Updated: March 14, 2019, 3:20 PM IST
लोकसभा चुनाव का बिगुल फूंका जा चुका है. विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का भविष्‍य अब जनता के हाथ में है. अब जनता जनार्दन है और रांची लोकसभा क्षेत्र के जनार्दन चुनाव के लिए अपना मन चुके हैं. रांची झारखंड की राजधानी है. यह काफी खूबसूरत जगह है और यहां की आबोहवा काफी सुखद है. यहां की राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विशेषताएं विविधतापूर्ण हैं.

रांची में कांग्रेस- बीजेपी में रही है टक्कर 

रांची लोकसभा क्षेत्र में कुल 6 विधानसभा क्षेत्र आते हैं. रांची, हटिया, खिजरी, कांके, सिल्ली और ईचागढ़. ईचागढ़ सरायकेला खरसावां जिला में पड़ता है. चुनाव आयोग के आंकड़े के हिसाब से रांची लोकसभा क्षेत्र में 18,55,535 मतदाता हैं. इनमें से महिला मतदाताओं की संख्या 8,85,010 है, जबकि पुरुष मतदाता 9,70,465 हैं. 1951 से अभी तक रांची लोकसभा क्षेत्र में 16 बार चुनाव हुए हैं. इनमें से 8 बार कांग्रेस ने जीत दर्ज कराई है. भाजपा ने अब तक पांच बार कमल खिलाया है. पांचों बार सीटिंग सांसद रामटहल चौधरी के सिर पर ही जीत का सेहरा सजा है. उन्होंने 1991, 1996, 1998, 1999 के बाद 2014 में भी यहां बीजेपी का झंड़ा गाड़ने में कामयाबी पाई.



रामटहल चौधरी पांच बार रहे हैं सांसद

निवर्तमान सांसद रामटहल चौधरी पांच बार लोकसभा में रांची का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. दो बार जनसंघ से विधायक रह चुके हैं. वह कांके क्षेत्र से विधायक थे. रामटहल चौधरी ने अपने कार्यकाल में पूरा काम करने का दावा किया है. संसद में उनके द्वारा कई प्रश्न उठाए गये. सांसद का दावा है कि उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं को उठाया है. रेलवे की कनेक्टिविटी बढ़ाने और कई संस्थानों को खुलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. साथ ही वह सदा जनता के बीच में रहे हैं. इसलिए क्षेत्र की जनता उन्हें पांच बार जीत का उपहार दिया.

एक फीसदी वोट से तीन बार हारे रामटहल

वोटों के महत्व क्या होता है, यह रांची सीट से लडऩे वाले सुबोधकांत सहाय और रामटहल चौधरी को बखूबी पता है. सिर्फ एक फीसद वोट के कारण तीन बार सुबोधकांत सहाय जीते, तो भाजपा के रामटहल चौधरी पराजित हुए. 2009 में सुबोधकांत सहाय कांग्रेस के टिकट से 19 फीसद वोट लाकर जीते थे, जबकि रामटहल चौधरी को 18 फीसद वोट से हार का मुंह देखना पड़ा था. 2004 में भी रामटहल चौधरी के लिए सीट आसान थी, मगर निर्दलीय चुनाव लड़कर बंधु तिर्की ने खेल बिगाड़ दिया था. उस समय सुबोधकांत सहाय 20 फीसद वोट लाकर जीते थे और रामटहल चौधरी 19 फीसद मत पाकर दूसरे नंबर पर रहे थे. पहली बार सुबोधकांत सहाय रांची संसदीय सीट से 1989 में जनता दल के टिकट पर लड़े थे. उस समय भी सुबोधकांत सहाय 17 फीसद वोट लाकर जीते थे, जबकि रामटहल चौधरी 16 फीसद वोट पाकर चुनाव हार गये थे.
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क्षेत्र में 45 प्रतिशत आबादी जनजातियों की

रांची लोकसभा क्षेत्र का एक हिस्सा सरायकेला- खरसावां जिले में पड़ता है. इस लोकसभा क्षेत्र में जनजातीय समाज के लोग काफी संख्या में रहते हैं. यहां लगभग 45 प्रतिशत जनजाति आबादी है. इनकी सांस्कृतिक पहचान रांची की धरोहर रही है. इस क्षेत्र में
कोयला क्षेत्र भी पड़ते हैं. लिहाजा कई औद्योगिक इकाइयां भी हैं. कृषि यहां की आबादी का बड़ा आधार है. कृषि पर निर्भरता लगभग 70 प्रतिशत है. सिंचाई के सीमित संसाधन रहे हैं. यह क्षेत्र अक्सर सूखे की चपेट में रहा है. रांची में मानसिक आरोग्य संस्थान है. यहां नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी भी है. सड़कों की हालत कमोवेश ठीक है.

सीटिंग सांसद के कामकाज पर लोग की मिक्स राय

रांची लोकसभा क्षेत्र में कई खूबसूरत दर्शनीय स्थल भी हैं. यहां झील नुमा बड़ा तालाब और पहाड़ी मंदिर है. पहाड़ी मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. यहां की पुरानी जेल, जहां भगवान बिरसा मुंडा ने बंदी के दौरान शहादत दी थी. साथ ही आईआईएम भी है. बीआईटी मेसरा, रिम्स जैसा सुर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल भी है. शहर में रौनक है. लेकिन यातायात की समस्या कई स्थानों पर है. कई इलाके नक्सल प्रभावित हैं. स्वास्थ्य सुविधा ग्रामीण क्षेत्र में उम्मीद के अनुरुप नहीं है. ग्रामीण इलाके के लोगों की सांसद के कामकाज पर मिलीजुली प्रतिक्रिया है. कुछ लोगों का कहना है कि सांसद ने सड़क, बिजली और पानी की समस्या दूर की है. जबकि कुछ का कहना है कि पांच साल में सांसद ने क्या किया, पता ही नहीं चला. हालांकि क्षेत्र के युवा वोटर्स रामटहल चौधरी के कामकाज से खुश हैं. हालांकि उनका ये भी कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में और काम होना चाहिए था.

रिपोर्ट- राजेश कुमार

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